Exclusive Interview: एस्ट्रोनॉट Angad Pratap ने बताया Gaganyaan मिशन का फ्यूचर, जानें पूरी डिटेल्स
भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन Gaganyaan पर Astronaut Angad Pratap ने बताया कि कैसे योगा ISRO की तैयारियां मिशन को नई ऊंचाई देगी.


Published : November 22, 2025 at 11:09 AM IST
सुरभी गुप्ता की रिपोर्ट
हैदराबाद: नई दिल्ली: भारत का ह्युमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम अब अपने सबसे महत्वपूर्ण फेज़ में पहुंच चुका है. ISRO ने 2027 के लिए पहली Crewed Gaganyaan Flight का टारगेट सेट कर दिया है. इसका मतलब है कि हम एक बार फिर अपने एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस में भेजेंगे, लेकिन इस बार वो भारत में बनी इसरो के स्पेसक्राफ्ट में जाएंगे.
एक तरफ ISRO लगातार बड़े-बड़े तकनीकी ब्रेकथ्रू कर रहा है, तो दूसरी तरफ एस्ट्रोनॉट्स भी अपनी ज़िंदगी के सबसे कठिन और हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग फेज़ में हैं. झांसी की सफल पैराशूट टेस्टिंग से लेकर 80,000+ वैलिडेशन टेस्ट और महेंद्रगिरी में Cryogenic CE-20 Engine के रिकॉर्ड-ब्रेक रन तक, ISRO फिलहाल लगभग “लॉन्च-रेडी” मोड में है, बस PM मोदी की तरफ से डेट का इंतज़ार है.
गगनयान मिशन के ग्रुप कैप्टन का इंटरव्यू
गगनयान के सेंटर में चार भारतीय एस्ट्रोनॉट्स हैं:
- ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप (Group Captain Angad Pratap)
- ग्रुप कैप्टन प्रशान्त बालकृष्णन नायर (Group Captain Prashanth Balakrishnan Nair)
- ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन (Group Captain Ajit Krishnan)
- ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (Group Captain Shubhanshu Shukla)
ये सभी अनुभवी इंडियन एयर फोर्स यानी IAF Test Pilots हैं और मिशन का असली चेहरा हैं. ETV Bharat की क्रॉसपॉन्डेंट सुरभी गुप्ता ने ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप से एक लंबी और दिलचस्प बातचीत की, जिसमें उन्होंने मिशन की तैयारी, ट्रेनिंग के असली चैलेंज, Yoga के स्पेस में फायदे और भारत के Human Spaceflight Future पर विस्तार से बात की.
ETV Bharat: जब आपने पहली बार सुना कि आपको गगनयान के लिए Astronaut चुना गया है, उस पल का क्या मतलब था आपके लिए—एक इंसान और एक प्रोफ़ेशनल के तौर पर?
Angad Pratap: एस्ट्रोनॉट चुना जाना मेरे लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। लोग सोचते हैं कि Spaceflight असली काम है, लेकिन सच में Orbit जाकर वापस आने वाला हिस्सा तो पूरे सफर का एक छोटा सा अंश है—बस कुछ दिन।
असल काम ज़मीन पर होता है:
- तैयारी
- सिस्टम्स की समझ
- मिशन डेवलपमेंट में योगदान
- पूरा ग्राउंड वर्क
एस्ट्रोनॉट की जिम्मेदारी स्पेस जाने से कहीं ज्यादा है, पूरे मिशन को जमीन से तैयार करना होता है.
ETV Bharat: आप इस समय इंडिया के सबसे एडवांस्ड Astronaut Training प्रोग्राम से गुजर रहे हैं। आपकी ट्रेनिंग कैसी दिखती है? Crew Safety और Escape Systems पर क्या तैयारी है?
Angad Pratap: मिशन के लिए खुद को तैयार करना ही सबसे मुख्य और प्राथमिक जिम्मेदारी है.
हम रोज़ अलग-अलग रोल में शिफ्ट होते हैं:
- एक दिन pure academics और spacecraft systems
- दूसरे दिन इंटेंस फिज़िकल वर्कआउट
- उसके बाद Psychological और behavioral conditioning पर काम करना होता है
- यह एक कंटीन्यूस चैलेंज है, सिर्फ एक बार स्पेस चले जाना किसी को एस्ट्रोनॉट नहीं बनाता, ये जर्नी कई सालों की होती है.
- हमारा सेकेंडरी रोल स्पेसक्राफ्ट और मिशन डेवलपमेंट में योगदान देना है,जहां हमारी प्रोफेशनल योग्यता काम आती है.
- यहां तक कि गगनयान का astronaut food भी पूरी तरह भारत में तैयार हुआ है. DRDO ने अलग-अलग धर्मों से इंग्रिडिएंट्स लेकर हर एस्ट्रोनॉट के हिसाब से कस्टमाइज़्ड फूड बनाया है.
ETV Bharat: आपने रूस के Yuri Gagarin Cosmonaut Training Center में कई महीने ट्रेनिंग की. वो अनुभव कैसा था?
Angad Pratap: हमने वहां Generic astronaut training ली और साथ ही Soyuz spacecraft और Russian ISS segment की simulator training भी की थी.
इससे हमें समझ आया कि:
- एक astronaut training ecosystem कैसा होता है
- इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा होना चाहिए
- और training की philosophy क्या होती है
- पिछले पांच साल में हम उन लर्निंग्स को भारत की human spaceflight ecosystem में जोड़ कर चुके हैं.
ETV Bharat: Astronaut Training इंड्योरेंस और इमोशनल दोनों तरह की परीक्षा लेती है. कौन-से चैलेंजेस आपके लिए सबसे कठिन थे?
Angad Pratap: मुश्किलें कई हैं- physical, technical, psychological जैसे -
- दिन के 8 घंटे में से 3–3.5 घंटे सिर्फ फिज़िकल ट्रेनिंग
- बाकी में योगा सेंशन्स
- एकेडमिक्स
- मिशन संबंधित एक्टीविटिज
उन्होंने बताया कि अधिकतर लोग नहीं जानते कि योगा एस्ट्रोनेट एरोमेडिकल ट्रेनिंग का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है. जब आप ऑर्बिट में पहुंचते हैं, तो पहले 3–5 दिन Space Motion Sickness होता है. इसके लिए योगा सबसे इफेक्टिव तरीका साबित हुआ है, क्योंकि ये vestibular system को ट्रेन करता है. हम फ्यूचर मिशन्स में वैज्ञानिक तौर पर प्रूव करेंगे कि योगा space sickness को कितना कम कर सकता है.
ETV Bharat: गगनयान के बाद आप India’s Human Spaceflight को कैसे evolve होते देखते हैं?
Angad Pratap: हमें इंटरनेशनल सपोर्ट मिला है—जैसे रूस से ट्रेनिंह और IVA suits. लेकिन हार्डवेयर, मिशन आर्किटेक्चर, और लॉन्ग-ड्यूरेशन साइकोलॉजी जैसी कई चीज़ें हमें खुद बनानी हैं. सरकार का ₹20,000 करोड़ की नई मंजूरी और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की मंजूरी दिखाती है कि भारत स्पेस में लॉन्ग-टर्म प्लानिंग कर रहा है. इंडस्ट्री पार्टनर्स 50 साल से बिना प्रॉफिट सोचे देश की अंतरिक्ष क्षमताओं को बना रहे हैं. अब वो इन्वेस्टमेंट अपना असली फल देगी. Human Spaceflight आगे चलकर, माइक्रोग्रैवेटी रिसर्च, टेक डेवलपमेंट, स्पेस टूरिज़म जैसे क्षेत्रों में भी नए रास्ते खोलेगा.
ETV Bharat: Chandrayaan ने भारत के स्पेस साइंस को नई दिशा दी है. आगे कौन-से ब्रेकथ्रू दिख सकते हैं?
Angad Pratap: गगनयान एक स्नोबॉल इफेक्ट क्रिएट करेगा. एक बार हम इंसानों को स्पेस भेजने में सफल हो गए, उसके बाद:
- Bharatiya Antariksha Station
- Lunar Sample Return
- Long-duration Space Missions
- future lunar landing missions
इन सबकी के लिए रास्ते खुल जाएंगे. गगनयान एक ऐसा मिशन है, जिसमें लगभग 16 चंद्रयान और मंगलयान जितनी मुश्किलें होती हैं. अगले साल की शुरुआत में पहला मानवरहित लॉन्च देखने को मिलेगा.
ETV Bharat: फाइटर पायलट से एस्ट्रोनॉट तक का सफर… ये प्रेरणा कहां से मिली?
Angad Pratap: मैंने बचपन में दूरदर्शन का एक कार्यक्रम “परम वीर चक्र" देखा, जिसने मुझे मिलिट्री लाइफ की ओर आकर्षित होने के लिए मजबूर किया था. उसके बाद 1999 में हुए कारगिल वार के दौरान पूरी तरह से मन बना लिया था कि आर्म्ड फोर्स जॉइन करना है. फाइटर पायलट की ट्रेनिंग ने डिसिप्लिन, मेंटल टफनेस और सिस्टम की गहरी समझ दी, जो एस्ट्रोनॉट बनने में बहुत काम आई.
ETV Bharat: आपने Su-30, MiG-21, MiG-29, Jaguar जैसे जबरदस्त एयरक्राफ्ट उड़ाए हैं. सबसे चुनौतीपूर्ण कौन सा लगा?
Angad Pratap: हर एयरक्राफ्ट अपने पर्पस के लिए बनाया जाता है और उसी में बेस्ट होता है. तुलना करना सही तरीका नहीं है. टेस्ट पायलट के तौर पर हर एयरक्राफ्ट ने कुछ नया सिखाया.
ETV Bharat: आपके पास कितने flight hours हैं, और flying skills sharp रखने के लिए क्या करना पड़ता है?
Angad Pratap: मेरे पास लगभग 2,300 फ्लाइट आवर्स का एक्सपीरियंस है. फ्लाइंग स्किल्स मेंटन करने के लिए हम हर महीने में एयर फोर्स वापस जाकर फाइटर जेट्स में फ्लाइंग आवर्स लॉग करते हैं. साथ ही मल्टी-क्रू ट्रांसपोर्ट और थोड़ी rotary-wing flying भी करते हैं.
ETV Bharat: युवा भारतीय, जो एस्ट्रोनॉट बनना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सलाह देंगे?
Angad Pratap: एस्ट्रोनॉट बनने के लिए बहु-डोमेन एस्सीलेंस चाहिए, जैसे:
- एकेडमिक्स (academics)
- कोर प्रोसेशन (core profession)
- एविएशन नोलेज (aviation knowledge)
- फिज़िकल फिटनेस (physical fitness)
- टीमवर्क एंड लीडरशिप (teamwork & leadership)
- लैंग्वेजेस (languages)
- कंप्यूटर स्किल्स (computer skills)
- प्रोग्रामिंग (programming)
- सर्वाइवल ट्रेनिंग (survival training)
यह सब कुछ एक पैकेज है. आपको हरेक चीज़ में एक्सपर्ट नहीं बनना लेकिन अच्छी-खासी जानकारी होनी जरूरी है. इन सभी स्किल्स के अलावा एस्ट्रोनॉट बनने के लिए सबसे जरूरी चीज स्वास्थ्य है. आप अच्छे स्वास्थ्य के बिना स्पेस एजेंसी के लिए वैल्यूबल नहीं बल्कि बोझ बन जाते हैं.
ETV Bharat: मिशन पूरा करने के बाद आपकी आगे की प्लानिंग क्या है?
Angad Pratap: अभी पूरा फोकस मिशन पर है. मिशन के बाद के प्लान्स सोचने का समय अभी नहीं आया है.
ISRO के बड़े ब्रेकथ्रू और आने वाले Mission Timeline
ISRO ने हाल ही में CE-20 cryogenic engine का boot-strap mode start सफलता से टेस्ट किया, जो एक वर्ल्ड-क्लास उपलब्धि है. इससे इंजन को कई बार अंतरिक्ष में रीस्टार्ट किया जा सकता है. इससे भविष्य के मल्टी-ऑर्बिट मिशन्स बहुत आसान हो जाएंगे.
| साल/मिशन टाइमलाइन | मिशन |
| दिसंबर 2025 में | पहला मानवरहित गगनयान मिशन लॉन्च |
| 2027 की शुरुआत में | Chandrayaan-4: भारत का पहला लूनर सैंपल वापस आएगा |
| 2027 में | भारत का पहला मानव सहित गगनयान मिशन लॉन्च |
| 2028 | भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल |
| 2028 | LUPEX (जापान के साथ Chandrayaan-5) |
| 2035 | 52-टन Indian Space Station |
| 2038–40 | भारत का पहला क्रूड लूनर ऑर्बिट और लैंडिंग |
| लॉन्ग टर्म प्लान | 2062 तक ग्लोबल स्पेस इकोनॉमी में भारत के शेयर को 2% से 15% तक पहुंचाना |
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