Exclusive Interview: गगनयान एस्ट्रोनॉट पीबी नायर ने कहा, 'अंतरिक्ष में ढलना शारीरिक से ज्यादा मानसिक चुनौती है'
भारत अपनी पहली क्रू वाली स्पेसफ्लाइट यानी गगनयान की तैयारी कर रहा है, जिसके ग्रुप कैप्टन पीबी नायर ने हमसे खास बातचीत की है.

Published : December 24, 2025 at 5:52 PM IST
सुरभी गुप्ता की रिपोर्ट
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट और एस्ट्रोनॉट यानी अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुने गए ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर भारत के पहले स्वदेशी ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन गगनयान की कमान संभालने वाली चुनिंदा चार अफसरों की टीम का हिस्सा हैं. भारतीय एयरफोर्स के इस टेस्ट पायलट के पास दशकों का उड़ान अनुभव है. उन्होंने 1998 से लेकर अभी तक में सुखोई Su-30 MKI, MiG-21 और An-32 जैसे फ्रंटलाइन एयरक्राफ्ट उड़ाए हैं और फ्लाइट इंस्ट्रक्टर भी रहे हैं.
ISRO और इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (IAM) की ओर से कराए गए बेहद सख्त एस्ट्रोनॉट सिलेक्शन प्रोग्राम के बाद 2019 में उन्हें टॉप चार उम्मीदवारों में चुना गया. इसके बाद उनका सफर रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर से लेकर बेंगलुरु स्थित ISRO के एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग फैसिलिटी तक पहुंचा. इसी दौरान उन्होंने IISc बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स डिग्री भी हासिल की.
प्रशांत नायर ने NASA के जॉनसन स्पेस सेंटर में भी ट्रेनिंग ली है. यह ट्रेनिंग प्राइवेट Axiom-4 मिशन से जुड़ी तैयारियों का हिस्सा थी, जिसमें उन्हें अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के बैकअप के तौर पर नामित किया गया था. इसी साल ISRO ने उन्हें गगनयान-4 मिशन का कमांडर घोषित किया, जो भारत के पहले प्रयास का अहम हिस्सा है, जिसमें देश अपने दम पर अंतरिक्ष यात्रियों को लो-अर्थ ऑर्बिट में भेजेगा और सुरक्षित तरीके से वापस लाकर समुद्र में स्प्लैशडाउन कराएगा.
आपको बता दें कि आज से करीब 40 साल पहले 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा की ऐतिहासिक स्पेस फ्लाइट के बाद अब गगनयान भारत के लिए स्पेस मिशन में एक नई छलांग है. यह मिशन दिखाता है कि भारत अब ह्यूमन स्पेसफ्लाइट में भी काफी हद तक आत्मनिर्भर बन चुका है, हालांकि इसमें अमेरिका, रूस और फ्रांस जैसे देशों के साथ इंटरनेशनल कोलैबोरेशन भी शामिल है.
प्रशांत बालकृष्णन नायर का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
ईटीवी भारत से खास बातचीत करते हुए ग्रुप कैप्टन पीबी नायर ने स्पेसफ्लाइट की चुनौतियों, ट्रेनिंग और उस माइंडसेट पर बात की जो भारत को अगली उड़ान के लिए तैयार कर रहा है. आइए हम आपको सिलसिलेवार तरीके से सवाल और गगनयान एस्ट्रोनॉट द्वारा दिए गए जवाब बताते हैं:
सवाल: स्पेस में पहुंचने के बाद आपको सबसे ज्यादा चुनौती किस चीज में लगती है?
नायर: माइक्रोग्रैविटी में खुद को संभालना और मूव करना सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है. यह सुनने में फिजिकल लगता है, लेकिन असल में यह ज्यादा साइकोलॉजिकल होता है. इसके बावजूद फिजिकल फिटनेस और एयरोमेडिकल रेडीनेस बेहद जरूरी है, ताकि स्पेस में जल्दी एडजस्ट किया जा सके.

सवाल: ISRO लगातार क्रू सेफ्टी पर जोर दे रहा है. आपकी सेफ्टी ट्रेनिंग कैसी चल रही है?
नायर: सेफ्टी ट्रेनिंग एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. मैं डिटेल्स शेयर नहीं कर सकता, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि हर संभव एहतियात बरती जा रही है. हमारे चेयरमैन पहले ही साफ कर चुके हैं कि इंसानी सुरक्षा सबसे ऊपर है और यही सोच हमारी पूरी ट्रेनिंग को गाइड करती है.
सवाल: गगनयान ट्रेनिंग का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा मुश्किल रहा?
नायर: असल में, कुछ भी खास तौर पर मुश्किल नहीं लगा. पूरा ट्रेनिंग प्रोग्राम बहुत सोच-समझकर डिजाइन किया गया है. फिजिकल ट्रेनिंग हो, मेडिकल टेस्ट, थ्योरी क्लासेस, एक्सपोजर विजिट्स या आउटरीच प्रोग्राम - सब कुछ इतना अच्छे से मैनेज किया गया है कि यह सफर काफी एंजॉयबल रहा.
सवाल: आप फाइटर पायलट, टेस्ट पायलट और फ्लाइट इंस्ट्रक्टर रह चुके हैं. यह अनुभव गगनयान में कैसे मदद करता है?
नायर: टेस्ट पायलट और इंस्ट्रक्टर होने का अनुभव इस मिशन में बहुत काम आता है. जब कोई नया स्पेसक्राफ्ट बनाया जाता है, तो ऐसे लोगों की जरूरत होती है जो मशीन को उसकी पूरी ऑपरेशनल लिमिट तक समझते हों और इमरजेंसी में तुरंत सही फैसला ले सकें. इस कारण ऐसे प्रोग्राम्स के शुरुआती दौर में फाइटर टेस्ट पायलट्स की अहम भूमिका होती है. हालांकि, स्पेसफ्लाइट मिलिट्री एविएशन से काफी अलग है. इस गैप को ISRO ने मॉस्को, भारत की ट्रेनिंग फैसिलिटीज और NASA, JAXA, ESA जैसी एजेंसियों के एक्सपोजर प्रोग्राम्स के जरिए भर दिया है. हमारी ट्रेनिंग अभी भी जारी है और अब हम मिशन का इंतजार कर रहे हैं.
सवाल: स्पेस में मसल लॉस और न्यूट्रिएंट डेफिशिएंसी को लेकर चिंताएं रहती हैं, इसकी तैयारी कैसे हो रही है?
नायर: हर चीज एक वेल-डिफाइंड प्लान के तहत हो रही है. फिजिकल फिटनेस से लेकर मेंटल कंडीशनिंग तक, सभी पहलुओं का ध्यान रखा जा रहा है. लॉन्च से पहले ही सारे प्रोटोकॉल लागू कर दिए जाएंगे, ताकि मिशन के दौरान क्रू पूरी तरह हेल्दी रहे.
सवाल: स्पेस में करियर का सपना देखने वाले युवाओं के लिए आपका क्या मैसेज है?
नायर: सबसे जरूरी इस महान देश भारत पर विश्वास और अपने व्यक्तिगत धर्म को इमानदारी से निभाना है. यकीन मानिए, जो आपके हिस्से में लिखा है, वह आपको जरूर मिलेगा. यही विश्वास और उद्देश्य की भावना एस्ट्रोनॉट माइंडसेट है, जिसे हम अपने युवाओं में देखना चाहते हैं.
यह खास बातचीत न सिर्फ गगनयान मिशन की तैयारियों की झलक देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारत का अगला स्पेस चैप्टर कितनी मजबूती और भरोसे के साथ लिखा जा रहा है.

