भारतीय प्राइवेट स्पेस सेक्टर का बड़ा कदम, PSLV-C62 से 10 स्पेस मिशन होंगे लॉन्च
ध्रुवा स्पेस का Polar Access-1 मिशन PSLV-C62 से 10 सैटेलाइट मिशन लॉन्च कर भारत के निजी स्पेस सेक्टर को नई ताकत देगा.


Published : January 9, 2026 at 6:26 PM IST
हैदराबाद: भारत के ज्यादातर लोग अभी तक भारतीय स्पेस सेक्टर की उपलब्धियों के लिए भारत की सरकारी स्पेस एजेंसी यानी इसरो (ISRO) को ही जानते हैं, लेकिन अब वो वक्त भी आ रहा है कि भारत और दुनिया के लोग भारत की प्राइवेट स्पेस सेक्टर की उपलब्धियों को देखेंगे. भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर लगातार नई ऊंचाईयों को छू रहा है और इसी कड़ी में हैदराबाद की स्पेस टेक कंपनी ध्रुवा स्पेस ने एक बड़ा ऐलान किया है.
8 जनवरी 2026 की हुई प्रेस मीटिंग में कंपनी ने अपने अब तक के सबसे अहम लॉन्च प्रोग्राम का ऐलान किया, जिसका नाम Polar Access-1 (PA-1) है. इस मिशन के तहत एक साथ 10 स्पेस मिशन लॉन्च किए जाएंगे, जो भारत के 6 राज्यों और 2 देशों से जुड़ें होंगे.

Polar Access-1 की डिटेल्स
यह मिशन 12 जनवरी 2026 को ISRO के भरोसेमंद रॉकेट PSLV-DL-C62 के जरिए श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च होगा. ध्रुवा स्पेस का यह प्रोग्राम खास तौर पर सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में नियमित और संगठित एक्सेस देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. आपको बता दें कि ध्रुवा स्पेस की शुरुआत साल 2012 में हुई थी और तब से यह कंपनी भारत में स्पेस सेक्टर के प्राइवेटाइजेशन की दिशा में लगातार काम कर रही है. कंपनी सैटेलाइट, ग्राउंड स्टेशन और लॉन्च सर्विसेज़ को एक साथ या अलग-अलग समाधान के तौर पर उपलब्ध कराती है.

Polar Access-1 में ध्रुवा स्पेस की पूरी इन-हाउस स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें सैटेलाइट प्लेटफॉर्म, सेपरेशन सिस्टम और ग्राउंड-स्टेशन-एज़-ए-सर्विस शामिल हैं. इसके लिए कंपनी को 2024 में IN-SPACe से मंजूरी भी मिल चुकी है.
लॉन्च डिटेल्स
| फील्ड | वैल्यू |
| नाम | Polar Access -1 (PA-1) |
| प्रकार | सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) |
| ऑर्बिट | सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) |
| ऑफरिंग्स | पी-डॉट (P-DoT सैटेलाइट प्लेटफॉर्म), डीएसओडी-1यू (DSOD-1U सेपरेशन सिस्टम), डीएसओडी-6यू (DSOD-6U सेपरेशन सिस्टम), ग्राउंड स्टेशन, जीएसएएएस (Ground Station as a Service) |
| लॉन्च साइट | SDSC-SHAR, आंध्र प्रदेश, भारत |
कई राज्यों और देशों की पहली सैटेलाइट
इस मिशन के जरिए कई राज्यों और देशों की पहली सैटेलाइट पहल को हकीकत में बदला जा रहा है.
- नेपाल का अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट पर्यावरण निगरानी पर फोकस करेगा.
- ओडिशा का पहला सैटेलाइट CGUSAT-1 आपदा के समय कम्युनिकेशन को बेहतर बनाने में मदद करेगा.
- कर्नाटक का DSAT-1 दो-तरफा कम्युनिकेशन और टेलीमेट्री पर काम करेगा.
- पूर्वोत्तर भारत के लिए यह मिशन खास मायने रखता है. असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर तैयार किया गया LACHIT-1, पूरे नॉर्थ ईस्ट का पहला सैटेलाइट मिशन है.
- तमिलनाडु से जुड़ा मिशन ऑर्बिट में रिफ्यूलिंग टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन करेगा.
- गुजरात का 1U सैटेलाइट एक आर्टिफिशियल स्टार का प्रयोग करेगा, जिसे अहमदाबाद से देखा जा सकेगा.
- इसके अलावा तेलंगाना से ध्रुवा स्पेस का खुद का सैटेलाइट THYBOLT-3 भी शामिल है, जो आपदा संचार नेटवर्क को मजबूत करने पर काम करेगा.

इसमें खास बात यह है कि इन मिशनों को दुनियाभर के एमेच्योर रेडियो ऑपरेटर्स के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा. ध्रुवा स्पेस का यह कदम न सिर्फ टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाता है, बल्कि छात्रों, विश्वविद्यालयों और राज्यों को सीधे स्पेस टेक्नोलॉजी से जोड़ने का मजबूत आधार भी तैयार करता है.

