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AI Summit 2026: बच्चों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर उम्र सीमा लगाने की तैयारी: अश्विनी वैष्णव

भारत सरकार डीपफेक खतरे को देखते हुए सोशल मीडिया पर उम्र आधारित पाबंदियों और सख्त नियमों पर कंपनियों से बातचीत कर रही है.

Age limit on social media and preparation of strict laws on deepfake, children's digital safety has become a priority of the government.
सोशल मीडिया पर उम्र की सीमा और डीपफेक पर सख्त कानून की तैयारी, बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी. (Image Credit: PTI)
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By ETV Bharat Tech Team

Published : February 17, 2026 at 4:17 PM IST

3 Min Read
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नई दिल्ली: भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उम्र के आधार पर पाबंदियों को लेकर गंभीरता पर विचार कर रही है. भारत के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के साथ लगातार बातचीत कर रही है, ताकि बच्चों और समाज को डीपफेक जैसे खतरों से सुरक्षित रखा जा सके. आईटी मंत्री यह बात एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कही.

उन्होंने बताया कि जिस तरह ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने का फैसला किया है, उसी तर्ज पर भारत भी सही और संतुलित रास्ता तलाश रहा है. अश्विनी वैष्णव ने साफ कहा कि डीपफेक की समस्या हर दिन गंभीर होती जा रही है. इससे न सिर्फ बच्चों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि समाज में गलत जानकारी और भ्रम भी फैलने वाली घटनाएं भी बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनों के अलावा अब और मजबूत नियमों की जरूरत महसूस की जा रही है. इसी को लेकर सरकार ने इंडस्ट्री के साथ सलाह-मशविरा शुरू कर दिया है.

सभी प्लेटफॉर्म को मानने होंगे भारतीय नियम

केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी डिजिटल प्लेफॉर्म हो, चाहे वो Netflix, YouTube, Meta या X - सभी को भारत के कानून और संविधान का पालन करना ही होगा. उन्होंने आगे बताया कि इस मामले के बारे में संसदीय कमेटी ने गहराई से स्टडी भी की है. सरकार चाहती है कि संसद के अंदर इस पर व्यापक सहमति बने, ताकि डीपफेक को लेकर सख्त और असरदार कानून बनाए जा सकें. इसका मकसद बिल्कुल साफ है कि समाज और खासतौर पर बच्चों को डिजिटल नुकसान से बचाना है.

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कई देश अब यह मान चुके हैं कि उम्र के आधार पर कंटेंट और प्लेटफॉर्म एक्सेस को कंट्रोल करना जरूरी है. भारत में भी डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून के तहत पहले ही बच्चों और युवाओं के लिए अलग नियमों की शुरुआत हो चुकी है. एआई इम्पैक्ट समिट में मंत्री ने यह भी बताया कि भारत के स्वदेशी यानी सॉवरेन एआई मॉडल्स को समिट में पेश किया गया है. ये मॉडल्स ग्लोबल एआई मॉडल्स के बराबर प्रदर्शन कर रहे हैं. आने वाले समय में एआई मिशन 2.0 के तहत इन मॉडल्स के लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि 12 संस्थानों और स्टार्टअप्स को भारतीय डेटा पर बेस्ड बड़े और छोटे लैंग्वेज मॉडल विकसित करने के लिए चुना गया है. वहीं, OpenAI का ChatGPT और Google का Gemini जैसे ग्लोबल मॉडल पहले ही बाजार में मौजूद हैं. मंत्री के मुताबिक भारत में एआई को लेकर इन्वेस्टर्स का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है और अगले एक-दो साल में 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आने की उम्मीद है.