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Meta Muse विवाद के बाद Apple ने लिया बड़ा फैसला, अब Mac पर मजबूत होगी प्राइवेसी

Apple अब मैक यूजर्स से Full Disk Access देने से पहले बहुत साफ और जानबूझकर अनुमति मांगेगा ताकि डेटा सुरक्षित रहे.

In view of the growing threat posed by AI agents, Apple has decided to further strengthen user privacy protection.
AI एजेंट्स के बढ़ते खतरे को देखते हुए एपल ने यूजर्स की प्राइवेसी सुरक्षा को और मजबूत बनाने का फैसला लिया है. (Image Credit: Apple)
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By ETV Bharat Tech Team

Published : October 3, 2026 at 10:10 AM IST

4 Min Read
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हैदराबाद: एपल ने हाल ही में मैक कंप्यूटर के लिए एक बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है. यह बदलाव फुल डिस्क एक्सेस नाम की सुविधा से जुड़ा है. Full Disk Access एक खास परमिशन होती है, जो कुछ ऐप्स को पूरे मैक के डेटा तक पहुंचने की अनुमति देती है. इसमें फाइल्स, मेल, मैसेज और ब्राउज़िंग हिस्ट्री जैसी निजी चीजें शामिल होती हैं. एपल का कहना है कि कुछ डेवलपर्स इस सुविधा का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे यूज़र्स का पूरा सिस्टम खतरे में पड़ सकता है. खासतौर पर एआई एजेंट्स के आने के बाद यह खतरा काफी बढ़ गया है.

फुल डिस्क एक्सेस और इसकी जरूरत

मैक पर आईफोन या आईपैड की तरह कड़ी सैंडबॉक्सिंग नहीं होती. iPhone और iPad में एक ऐप दूसरे ऐप के डेटा को आसानी से नहीं देख सकता, लेकिन मैक में ऐसा नहीं है. इस कारण बैकअप सर्विस जैसी चीजों के लिए फुल डिस्क एक्सेस जरूरी है. यूज़र खुद परमिशन देकर किसी ऐप को पूरा डेटा देखने की छूट दे सकता है.

इसमें समस्या तब आती है, जब कोई ऐप बिना यूज़र की पूरी समझ के इस अनुमति का इस्तेमाल करता है. मेटा ने हाल ही में अपना एक नया एआई एजेंट लॉन्च किया है, जिसका नाम म्यूज़ (Muse) है. इस एजेंट को लेकर कई शिकायतें आईं. कुछ यूज़र्स ने आरोप लगाया कि म्यूज़ ने उनके पर्सनल मैसेज पढ़ लिए. इस पर मेटा का कहना है कि यूज़र्स के निजी मैसेज पढ़ने के लिए फुल डिस्क एक्सेस (Full Disk Access) और Messages कनेक्टर दोनों को चालू करना पड़ता है. यह पूरी तरह ऑप्ट-इन है और इसे कभी भी बंद किया जा सकता है.

Meta clarifications on muse controversy
Muse विवाद पर मेटा ने सफाई दी थी. (Image Credit: X/andymstone)

एपल का नया फैसला क्यों जरूरी

एपल ने अपनी एक लेटेस्ट पोस्ट में बिल्कुल साफ लिखा है कि अब Full Disk Access देने के लिए यूजर को बहुत स्पष्ट और जानबूझकर कदम उठाने होंगे. अब पहले की तरह सिर्फ एक क्लिक में परमिशन नहीं मिलेगी. कंपनी का मानना है कि एआई एजेंट्स जितने स्मार्ट और स्वतंत्र होते जा रहे हैं, उतना ही खतरा बढ़ता जा रहा है. अगर कोई एआई एजेंट पूरे सिस्टम तक पहुंच पाए तो वो फाइल्स, मेल, मैसेज और यहां तक कि ब्राउज़िंग हिस्ट्री भी देख सकता है. इसके अलावा कम्युनिकेशन ऐप्स के मामले में यह उन लोगों की प्राइवेसी भी प्रभावित कर सकता है जिनसे यूजर बात कर रहा हो.

एपल ने जोर दिया कि यूज़र्स को इन खतरों की पूरी जानकारी होनी चाहिए. उसके बाद ही वो अपने डेटा और प्राइवेसी के बारे में सही फैसला ले पाएंगे. कंपनी ने कहा कि वो डेवलपर्स को पावरफुल टूल्स देती है, लेकिन यूजर्स की प्राइवेसी की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है.

AI एजेंट्स के दौर में प्राइवेसी की नई चुनौती

आजकल एआई एजेंट्स कई मुश्किल काम खुद से कर सकते हैं, जैसे - सब्सक्रिप्शन कैंसल करना या कीमत कम करवाना, लेकिन जब ये एजेंट्स पूरे कंप्यूटर के डेटा का एक्सेस पा लेते हैं तो खतरा काफी बढ़ जाता है. एपल का यह कदम ऐसे ही खतरों को कम करने के लिए है. यूज़र्स को अब ज्यादा सावधानी बरतनी होगी. उन्हें यह समझना होहा कि फुल डिस्क एक्सेस देना कितना बड़ा और गंभीर फैसला है.

एपल ने यह नया अपडेट उन लोगों के लिए राहत की ख़बर है, जो प्राइवेसी को लेकर चिंतित रहते हैं. इसके अलावा डेवलपर्स को भी अब ज्यादा जिम्मेदारी से काम करना होगा. यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी ऐप को Full Disk Access देने से पहले अच्छी तरह सोच लें. यहां तक कि परमिशन देने के बाद भी समय-समय पर चेक करते रहें कि कौन से ऐप इस सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं.