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Airtel और Google की साझेदारी, RCS मैसेजिंग में AI स्पैम फिल्टर और बिजनेस वेरिफिकेशन शुरू

Airtel और Google की साझेदारी से RCS मैसेजिंग में AI आधारित स्पैम फिल्टर और बिजनेस वेरिफिकेशन से सुरक्षा बढ़ेगी.

Airtel and Google strengthened the security of Android users by adding AI spam filter to RCS messaging.
Airtel और Google ने RCS मैसेजिंग में AI स्पैम फिल्टर जोड़कर Android यूजर्स की सुरक्षा मजबूत की. (Image Credit: Getty Images)
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By ETV Bharat Tech Team

Published : March 2, 2026 at 2:38 PM IST

3 Min Read
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हैदराबाद: भारत में मोबाइल मैसेजिंग को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए भारती एयरटेल ने गूगल के साथ पार्टनरशिप की है. इस पार्टनरशिप का मकसद रिच कम्यूनिकेशन सर्विस यानी RCS मैसेजिंग में स्पैम और डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाना है. दोनों कंपनियां मिलकर ऐसा सिस्टम ला रही हैं, जो खासतौर पर एंड्रॉयड यूजर्स को सुरक्षित मैसेजिंग का बेहतर अनुभव देगा.

यह नया फीचर गूगल मैसेजेस ऐप के जरिए उपलब्ध होगी. कंपनी का कहना है कि अपनी टेलीकॉम नेटवर्क इंटेलिजेंस को गूगल के RCS प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ रही है. इससे मैसेज भेजने वाले बिजनेस अकाउंट्स की सख्त जांच होगी और संदिग्ध कंटेंट को पहले ही फिल्टर किया जा सकेगा.

एयरटेल अपने एआई बेस्ड स्पैम डिटेक्शन टूल्स को सीधे RCS फ्रेमवर्क में शामिल कर रही है. इसका फायदा यह होगा कि किसी भी बिजनेस मैसेज को रियल टाइम में परखा जा सकेगा. अगर कोई संदिग्ध लिंक, फर्ज़ी ऑफर या धोखाधड़ी से जुड़ा संदेश होगा तो सिस्टम उसे ब्लॉक या फिल्टर कर देगा. साथ ही, असली बिजनेस सेंडर की पहचान भी टेलीकॉम लेवल पर वेरिफाई की जाएगी, जिससे यूजर्स को भरोसेमंद मैसेज मिलें.

RCS के सभी फीचर्स मिलेंगे

कंपनियों ने साफ किया है कि यूज़र को RCS की सभी पॉपुलर फीचर्स भी मिलते रहेंगे - जैसे हाई रेजॉल्यूशन फोटो और वीडियो शेयर करना, टाइपिंग इंडिकेटर देखना, रीड रिसीट और मैसेज रिएक्शन. फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब इन सबके साथ एक अतिरिक्त सुरक्षा परत भी जुड़ जाएगी.

एयरटेल के मुताबिक, पिछले 18 महीनों में उसके AI सिस्टम ने 71 अरब से ज्यादा स्पैम कॉल्स और 2.9 अरब स्पैम SMS को ब्लॉक किया है. कंपनी का दावा है कि इन कदमों से उसके नेटवर्क पर रिपोर्ट होने वाले वित्तीय नुकसान में करीब 68.7 प्रतिशत की कमी आई है. हालांकि कुछ ओवर द टॉप मैसेजिंग प्लेटफॉर्म अभी भी टेलीकॉम ग्रेड सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते, जिससे खतरा बना रहता है.

नई RCS बेस्ड व्यवस्था में कई लेवल की सिक्योरिटी होगी. इसमें बिजनेस सेंडर्स की टेलीकॉम बेस्ड वेरिफिकेशन, डू नॉट डिस्टर्ब यानी DND नियमों का पालन, प्रमोशनल और ट्रांजैक्शनल मैसेज की अलग पहचान और खतरनाक लिंक की मल्टी-लेयर जांच शामिल है.

अगर कोई सेंडर एयरटेल या गूगल के एआई सिस्टम में संदिग्ध पाया जाता है, तो उसके मैसेज सीमित या ब्लॉग किए जा सकते हैं. दोनों कंपनियों का कहना है कि यह पार्टनरशिप दिखाती है कि टेलीकॉम ऑपरेटर और टेक प्लेटफॉर्म मिलकर भारत के डिजिटल मैसेजिंग इकोसिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और जवाबदेह बना सकते हैं.