OpenAI और Anthropic के बाद, Meta के AI मॉडल ने भी बाहरी सिस्टम को किया हैक
Meta ने जानकारी दी है कि टेस्टिंग के दौरान गलत कॉन्फ़िगरेशन की वजह से उसके AI मॉडल को इंटरनेट का एक्सेस मिल गया.

Published : August 6, 2026 at 1:00 PM IST
हैदराबाद: टेक्नोलॉजी कंपनी Meta ने बताया कि उसके एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल ने साइबरसिक्योरिटी टेस्टिंग के दौरान इंटरनेट का इस्तेमाल किया और एक बाहरी सर्विस के सिस्टम को हैक कर लिया. ऐसा तब हुआ है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में Meta की प्रतिद्वंद्वी कंपनियों, OpenAI और Anthropic ने भी इसी तरह की घटनाएं बताई थीं.
इनमें AI ने अपने टेस्ट एनवायरनमेंट से बाहर जाकर काम पूरा करने के लिए डेटाबेस या बाहरी सिस्टम को हैक किया था. Meta ने कहा कि उसके हाल ही में जारी किए गए मॉडल 'म्यूज स्पार्क 1.1' (Muse Spark 1.1) ने एक अज्ञात थर्ड-पार्टी सर्विस के सिस्टम में सेंध लगाई.
कंपनी के मुताबिक, साइबरसिक्योरिटी वेंडर 'इरेगुलर' के साथ मिलकर बनाए गए टेस्टिंग एनवायरनमेंट में एक गड़बड़ी की वजह से AI मॉडल इंटरनेट से कनेक्ट हो गया.
Meta के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा कि, "Meta जिस इंडिपेंडेंट टेस्टिंग कंपनी 'इरेगुलर' का इस्तेमाल करती है, उसकी एक गलत कॉन्फ़िगरेशन की वजह से मूल्यांकन के दौरान हमारे एक मॉडल को अनजाने में इंटरनेट का एक्सेस मिल गया."
प्रवक्ता ने आगे कहा कि मॉडल ने बाद में एक थर्ड-पार्टी सर्विस की सिक्योरिटी खामी का फ़ायदा उठाया. यह घटना वैसी ही थी जैसी दूसरी कंपनियों के साथ पहले हो चुकी हैं. कंपनी इस घटना की जांच कर रही है और सभी तथ्य पता चलने के बाद पूरी रिपोर्ट जारी करने की योजना बना रही है.
पिछले महीने, Hugging Face पर एक साइबर हमला हुआ, जिसे पूरी तरह से एक ऑटोनॉमस AI एजेंट ने अंजाम दिया था. बाद में पता चला कि इस हमले के पीछे OpenAI का GPT-5.6 Sol और एक ऐसा मॉडल था जिसे अभी तक रिलीज़ नहीं किया गया था. ये मॉडल अपने टेस्टिंग एनवायरनमेंट से बाहर निकलकर इंटरनेट तक पहुंच गए और Hugging Face के सिस्टम में सेंध लगा दी.
Hugging Face पर वे मॉडल, डेटासेट और सॉल्यूशन मौजूद थे, जिनकी ज़रूरत AI को दिए गए काम के लिए थी. इस घटना के कुछ ही दिनों बाद, एंथ्रोपिक ने यह भी बताया कि इंटरनल साइबरसिक्योरिटी इवैल्यूएशन के दौरान उसके क्लॉड (Claude) मॉडल ने तीन ऑर्गनाइज़ेशन के प्रोडक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर का अनऑथराइज़्ड एक्सेस हासिल कर लिया था.
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि टेस्टिंग एनवायरनमेंट गलत तरीके से कॉन्फ़िगर किया गया था, जिससे अनजाने में इंटरनेट कनेक्टिविटी की सुविधा मिल गई थी. कंपनी ने कहा कि OpenAI के खुलासे के बाद 1,41,000 से ज़्यादा साइबरसिक्योरिटी इवैल्यूएशन रन की समीक्षा करने पर उसे इन घटनाओं का पता चला.

