UGC और आरक्षण नीति के खिलाफ युवाओं का फूटा गुस्सा; कानपुर में निकाला मशाल जुलूस
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 2027 के चुनाव से पहले सरकार को लोकसभा में इस पर खुली चर्चा करानी चाहिए.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 2, 2026 at 8:23 AM IST
कानपुर: UGC के नए प्रावधानों को वापस लेने और आरक्षण व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को लेकर हजारों युवाओं का सैलाब सड़कों पर उतरा. आरक्षण सुधार आंदोलन कानपुर के बैनर तले युवाओं ने मोतीझील स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा से गोल चौराहा स्थित शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा तक विशाल मशाल मार्च निकाला.
आंदोलन के दौरान आयोजकों ने कहा कि यह पूरा विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और गांधीवादी विचारों के दायरे में रखा गया है. प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य किसी भी प्रकार का असहयोग करना नहीं, बल्कि जनसमर्थन जुटाकर सरकार तक अपनी बात मजबूती से पहुंचाना है. मार्च में अरविंद राज त्रिपाठी, रविंद्र पाटनी, सोनू पांडेय, आशुतोष दीक्षित और राघवेंद्र मिश्रा सहित कई प्रमुख लोग शामिल रहे.
आंदोलन के दौरान राघवेंद्र मिश्रा ने सरकार की नीतियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए नए UGC कानून को देश के स्वर्ण समाज के युवाओं के भविष्य पर थोपा गया बरबरतापूर्ण निर्णय बताया. कहा कि इसे तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए. आजादी के 80 साल पूरे होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था की अब नए सिरे से समीक्षा होनी चाहिए, क्योंकि इसका लाभ कुछ ही लोग उठा रहे हैं, जबकि हजारों जातियां आज भी इससे वंचित हैं.
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए गरीबों और वंचितों को उनका हक मिलना चाहिए. जाति या पंथ के बजाय जो भी व्यक्ति गरीब है, उसे आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए और क्रीमी लेयर में आ चुके संपन्न लोगों को इसे छोड़कर अपने जरूरतमंद भाई-बंधुओं की मदद करनी चाहिए. सरकार को चेतावनी देते हुए उन्होंने नया नारा दिया कि तिलक, तराजू और तलवार, नहीं सहेंगे अत्याचार.
उन्होंने कहा कि 2027 के चुनाव से पहले सरकार को लोकसभा में इस पर खुली चर्चा करानी चाहिए, अन्यथा इसका खामियाजा शासन को भुगतना पड़ सकता है. गोल चौराहे पर पहुंचकर युवाओं ने यह कहा कि यह लड़ाई केवल कानपुर तक सीमित नहीं रहेगी.
यदि सरकार ने समय रहते UGC के प्रावधानों और आरक्षण नीति पर पुनर्विचार नहीं किया, तो इस आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से देश के अन्य राज्यों और शहरों तक फैलाया जाएगा. आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में दोहराया कि यह संघर्ष की सिर्फ शुरुआत है और जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, यह सिलसिला नहीं थमेगा.

