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बस्ती में PRV टीम की बर्बरता! युवक को लाठियों से पीटा, मौत; आरोपी पुलिसकर्मी लाइनहाजिर

​परिजनों का आरोप है कि पुलिस पीआरवी टीम मनीष को घर से निकालकर गांव के वर्तमान प्रधान के दरवाजे पर ले गई.

बस्ती में PRV पुलिस टीम की बर्बरता.
बस्ती में PRV पुलिस टीम की बर्बरता. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : July 5, 2026 at 7:36 AM IST

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Updated : July 5, 2026 at 1:28 PM IST

4 Min Read
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बस्ती: घर के मामूली विवाद को सुलझाने के लिए 112 नंबर पर पुलिस की मदद लेना एक पिता को भारी पड़ गया. आरोप है कि पुलिसकर्मियों की बेरहम पिटाई से पीड़ित पिता के 30 वर्षीय बेटे की मौत हो गई. लाचार और दुखी परिजनों ने घटना की जांच और आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है. वहीं, उच्चाधिकरियों के निर्देश पर आरोपी पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर कर दिया गया है. घटना कलवारी थाना क्षेत्र के बैजलपुर गांव की है.

जानकारी के मुताबिक, कलवारी थाना क्षेत्र के बैजलपुर गांव के निवासी मनीष चौरसिया (30) की अपने घर में पिता से किसी बात को लेकर सामान्य कहासुनी हो गई थी. घर के भीतर बढ़ते विवाद को शांत करने और मामले को सुलझाने के उद्देश्य से मनीष के पिता ने खुद अपने मोबाइल से डायल 112 पुलिस को सूचना देकर मौके पर बुलाया था.

​परिजनों का आरोप है कि मौके पर पहुंची पीआरवी टीम मनीष को घर से निकालकर गांव के वर्तमान प्रधान के दरवाजे पर ले गई. वहां बंद परिसर में उसे लाठियों और जूतों से बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसे गंभीर आंतरिक चोटें आईं. मृतक की मां का दावा है कि जहां मनीष को लहूलुहान किया गया, वहां फर्श पर खून के गहरे निशान मौजूद थे. घटना की अगली सुबह साक्ष्यों को मिटाने के उद्देश्य से उस जगह को पानी से धोकर साफ कर दिया गया.

​मृतक युवक मनीष के परिवार ने दावा किया है कि ग्राम प्रधान के आवास पर लगे CCTV कैमरों में पुलिस की यह पूरी बर्बरता और मनीष को घसीटकर ले जाने के दृश्य रिकॉर्ड हुए हैं, जिसे अब दबाने का प्रयास किया जा रहा है. ​मृतक मनीष चौरसिया के भाई और मां ने रोते हुए बताया कि पुलिसिया पिटाई के बाद जब मनीष अधमरा हो गया, तब डायल-112 के पुलिसकर्मी उसे मरणासन्न हालत में वहीं छोड़कर फरार हो गए.

बदहवास और चीखते-चिल्लाते परिजन मनीष को आनन-फानन में स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कलवारी लेकर पहुंचे. वहां मनीष की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल बस्ती के लिए रेफर कर दिया. जिला अस्पताल में भी जब उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, तो उसे गंभीर अवस्था में महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए मनीष ने आखिरकार दम तोड़ दिया.

​मनीष की मौत की खबर जैसे ही बैजलपुर गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया. मृतक मनीष बेंगलुरु में रहकर मेहनत-मजदूरी करता था. वहां शादियों और त्योहारों में मेहंदी लगाने का काम करता था. वह कुछ दिन पहले ही अपने परिवार से मिलने गांव आया था. मनीष अपने पीछे अपनी पत्नी और दो अत्यंत छोटे बच्चों को बेसहारा छोड़ गया है. बच्चों और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, जिनके भरण-पोषण का एकमात्र सहारा मनीष ही था.

परिजनों का सीधा आरोप है कि यदि समय रहते पुलिस ने मनीष को प्रताड़ित करने के बजाय अस्पताल पहुंचाया होता या उच्चाधिकारियों ने तुरंत दखल दिया होता, तो मनीष की जान बचाई जा सकती थी. घटना के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह बैकफुट पर है. अधिकारियों के निर्देश पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का तकनीकी खुलासा हो सकेगा.

​डीएसपी प्रदीप त्रिपाठी ने बताया कि घटना के वक्त तैनात पीआरवी कर्मियों की सूची तैयार कर ली गई है. उनके कॉल लॉग्स और मूवमेंट की सघन जांच की जा रही है. ग्राम प्रधान के घर और आसपास के रास्तों पर लगे CCTV कैमरों के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर को पुलिस टीम अपने कब्जे में लेकर जांच कर रही है.

​उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है. चाहे वह पुलिस का ही जवान क्यों न हो. आसपास के सभी CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए हैं. यदि डायल-112 के कर्मियों या किसी अन्य स्थानीय व्यक्ति की संलिप्तता और दोष सिद्ध होता है, तो उनके खिलाफ हत्या जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

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Last Updated : July 5, 2026 at 1:28 PM IST