योगिनी एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा पाने का पावन अवसर, जानिए व्रत का महत्व, पूजा-विधि व मंत्र
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत विशेष रूप से चर्म रोगों से पीड़ित लोगों के लिए लाभकारी माना गया है.

Published : July 8, 2026 at 12:39 PM IST
बीकानेर: आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी 10 जुलाई को मनाई जाएगी. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी की पूजा तथा व्रत करने से पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है. सनातन धर्म में प्रत्येक एकादशी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है. आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है. इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने से पापों का क्षय होता है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और विशेष रूप से चर्म रोगों से राहत मिलने का पुण्यफल प्राप्त होता है. इस बार 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा तथा 11 जुलाई को पारणा किया जाएगा.
पंचांगकर्ता पंडित राजेंद्र किराडू के अनुसार यह व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है.
एकादशी तिथि प्रारंभ:
- 10 जुलाई को सुबह 08:16 बजे
- समाप्त: 11 जुलाई को सुबह 05:22 बजे
- पारण समय: 11 जुलाई को दोपहर 2:03 बजे से शाम 4:42 बजे तक
धार्मिक महत्व और पूजा विधि: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को अनेक जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है. यह व्रत विशेष रूप से रोगों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है. पंडित राजेंद्र किराडू बताते हैं कि योगिनी एकादशी पर सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी की पूजा करनी चाहिए. पीपल के वृक्ष का पूजन भी शुभ माना गया है. पूरे दिन सात्विक आचरण अपनाते हुए उपवास रखना चाहिए तथा भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करना चाहिए. रात्रि में भगवान विष्णु के समक्ष दीपक जलाकर श्रीविष्णुसहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है. यथाशक्ति रात्रि जागरण कर भगवान का भजन-कीर्तन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
इन मंत्रों का करें जाप:
योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप अत्यंत शुभ माना गया है.
'श्री राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे.
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने.'
इस मंत्र के जप को श्रीविष्णुसहस्रनाम के समान फलदायी बताया गया है. इसके अलावा "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" द्वादशाक्षर मंत्र अथवा अपने गुरु मंत्र का जाप भी करना चाहिए.
इन बातों का रखें विशेष ध्यान: योगिनी एकादशी के दिन कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है. इस दिन घर में झाड़ू लगाने से बचना चाहिए. आवश्यकता होने पर कपड़े से सफाई की जा सकती है. बाल कटवाने जैसे क्षौर कर्म नहीं करने चाहिए. यथाशक्ति अन्नदान करना शुभ माना गया है, लेकिन व्रत का संकल्प लिया हो तो अन्न ग्रहण करने से बचना चाहिए. भोजन में गोभी, गाजर, शलजम, पालक तथा विशेष रूप से चावल का सेवन नहीं करना चाहिए और न ही किसी को खिलाना चाहिए.
स्वास्थ्य और आध्यात्मिक लाभ: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत विशेष रूप से चर्म रोगों से पीड़ित लोगों के लिए लाभकारी माना गया है. श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का माध्यम माना जाता है. साथ ही परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में भी इसका विशेष महत्व है.योगिनी एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, भक्ति, सेवा और सदाचार का संदेश भी देती है. भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी की आराधना के साथ इस दिन दान, जप, ध्यान और सात्विक जीवन अपनाने से आध्यात्मिक उन्नति तथा शुभ फलों की प्राप्ति की मान्यता है.

