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योगी सरकार ने रद्द की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा, जानिए क्यों लिया फैसला?

एसटीएफ ने 20 अप्रैल 2025 को पेपर लीक कर अभ्यर्थियों को बेचने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को किया था गिरफ्तार

सीएम योगी.
सीएम योगी. (UP Government)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 7, 2026 at 5:59 PM IST

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लखनऊः उत्तर प्रदेश प्रदेश में होने वाली सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) भर्ती परीक्षा को लेकर सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा बुधवार को प्रेस नोट जारी कर बताया कि सहायक आचार्य पद के लिए अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा को लेकर नकल, धांधली और अवैध धन वसूली की सूचनाएं एसटीएफ को मिली थीं. इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गोपनीय जांच के आदेश दिए थे.

उत्तर प्रदेश सरकार अनुसार, जांच के दौरान एसटीएफ ने 20 अप्रैल 2025 को फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्य महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया था. आरोपियों पर परीक्षा में धांधली और अवैध धन वसूली के गंभीर आरोप हैं. इस संबंध में लखनऊ के विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था.

सरकार के अनुसार, जांच की निष्पक्षता और गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से तत्कालीन आयोग अध्यक्ष से त्यागपत्र भी लिया गया, क्योंकि मुख्य आरोपी महबूब अली निवर्तमान अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था. पूछताछ में महबूब अली ने स्वीकार किया था कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र हासिल कर लिए थे और उन्हें कई अभ्यर्थियों को मोटी रकम लेकर उपलब्ध कराया. एसटीएफ की गहन विवेचना और डेटा एनालिसिस से उसकी स्वीकारोक्ति की पुष्टि हुई है.

इसके अलावा गिरफ्तार आरोपियों और उनसे जुड़े अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों के डेटा विश्लेषण और मुखबिर तंत्र से मिली जानकारी के आधार पर कई अन्य संदिग्ध नाम भी सामने आए. आयोग से संदिग्ध अभ्यर्थियों का डेटा मंगवाकर मिलान किया गया, जिसमें यह स्पष्ट हो गया कि परीक्षा की शुचिता पूरी तरह भंग हुई है.
इन सभी तथ्यों को आधार बनाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहायक आचार्य परीक्षा को निरस्त करने के आदेश दिए हैं. साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा का पुनः आयोजन शीघ्र किया जाए और यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद तरीके से सुनिश्चित की जाए. सरकार ने साफ किया है कि परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और योग्य अभ्यर्थियों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.