मानसून सीजन में टूटा पीड़ा का पहाड़, इस साल 47 बार फटे बादल, 98 जगह आई बाढ़, 454 जीवन बने काल का ग्रास
मानसून हिमाचल में पिछले सालों से तबाही मचा रहा है. इस दौरान हुए नुकसान के आंकड़े डराने वाले हैं

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 26, 2025 at 7:24 PM IST
|Updated : December 26, 2025 at 10:50 PM IST
शिमला: जून महीने का आखिरी दिन...बाहर मूसलाधार बारिश और मंडी के पहाड़ों में घरों के भीतर घुप्प अंधेरा...अचानक घनघोर गर्जना के साथ आसमान से धारासार पानी बरसा और मंडी जिला का थुनाग इलाका कांप उठा. एक ही रात में सैकड़ों घर बाढ़ के पानी में बह गए. कुल 466 घर, सैकड़ों गौशालाएं बह गई. 30 से अधिक लोग लापता हो गए. कुल 14 निष्प्राण शरीर मिले. मानसून सीजन समाप्त हो गया, लेकिन पीड़ा बरकरार है.
मंडी में 28 लापता लोगों के शव नहीं मिले तो उन्हें मृत मान लिया गया. आपदा के नियम कहते हैं कि तय समय में लापता लोग न मिलें तो उन्हें मरा हुआ मान लिया जाए. ऐसे में उन लोगों की पीड़ा का अनुमान लगाएं, जिन्हें अंतिम संस्कार के लिए अपने प्रिय का पार्थिव शरीर भी नहीं मिला. ये कुल जमा दुख पहाड़ी प्रदेश हिमाचल का है. मानसून सीजन में इस साल 47 बार बादल फटे, कुल 98 जगह बाढ़ के पानी ने तबाही मचाई, 454 लोग काल का ग्रास बने. सबसे अधिक तबाही मंडी, कुल्लू, चंबा, शिमला जिला में हुई. मणिमहेश यात्रा में भी आस्थावान लोगों के हिस्से दुख अधिक आया. हिमाचल में वर्ष 2023 में भी भारी तबाही मची थी. तब साढ़े पांच सौ से अधिक लोग मौत का शिकार हुए थे. दस हजार करोड़ के करीब संपत्ति नष्ट हुई. इस तरह दो साल में यानी 2023 व 2025 में हिमाचल को जो पीड़ा मिली है, उसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता.

नन्हीं निकिता रह गई अकेली
मंडी जिला में सिराज घाटी में तलवाड़ा नामक गांव है. यहां एक परिवार में नन्हीं बिटिया निकिता नाम से हंसती-खेलती अपना बचपन एंजॉय कर रही थी. पहाड़ में आई तबाही में निकिता के मां-बाप व दादी की मौत हो गई. हालांकि बाद में निकिता को नेह देने के लिए कई हाथ आगे बढ़े, लेकिन मां की गोद व पिता के कांधे पर सवार होकर दुनिया देखने का सुख उसे नहीं मिलेगा. ये सुख मानसून की भयावह बारिश लील गई है. ये अलग बात है कि देश के मुखिया यानी पीएम नरेंद्र मोदी का दुलार भी निकिता को मिला है. ऐसी दुख व पीड़ा की कई कहानियां मानसून सीजन में सामने आती हैं.

हिमाचल में मानसून सीजन में इस साल 454 लोगों की मौत हुई. इनमें से 190 लोगों की मौत मानसून सीजन के कारण होने वाले सड़र हादसों में दर्ज की गई. सड़क हादसों में बिलासपुर में 8, चंबा में 26, हमीरपुर में 3, कांगड़ा में 22, किन्नौर में 15, कुल्लू में 13, लाहौल-स्पीति में 4, मंडी व शिमला में क्रमश: 25,25, सिरमौर में 11, सोलन में 25, ऊना में 13 लोगों ने जान गंवाई. इसी प्रकार बाढ़, लैंड स्लाइड में बिलासपुर में 16, चंबा में 42, हमीरपुर में 14, कांगड़ा में 35, किन्नौर में 15, कुल्लू में 36, लाहौल-स्पीति में 6, मंडी में 42, शिमला में 23, सिरमौर में 12, सोलन में 7 व ऊना में 16 लोग मारे गए.

मानसून सीजन के बाद भी नहीं थमते दुख
सितंबर महीने में मानसून सीजन में को खत्म माना जाता है. यानी सितंबर महीने के बीतने पर कहते हैं कि मानसून सीजन इज ओवर, लेकिन हिमाचल के दुख इसके बाद भी जारी रहते हैं. इसी साल अक्टूबर महीने में बिलासपुर के झंडूता में पहाड़ी गिरने से एक बस दब गई. इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई. वैसे तो अगस्त महीना हिमाचल पर भारी पड़ता है, लेकिन ये सिलसिला मानसून सीजन पूरा होने के बाद भी थमता नहीं है. वर्ष 2023 में अगस्त महीने में एक ही दिन में 55 लोगों ने भारी बारिश के कारण जान गंवाई थी. शिमला के समरहिल के शिव बावड़ी हादसे के जख्म इसी मानसून की तबाही से मिले हैं। इस साल मणिमहेश यात्रा के दौरान भी भूस्खलन के कारण 16 हजार श्रद्धालु फंस गए थे। उन्हें निकालने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी थी.

हर साल टूटता है दुख का पहाड़
वर्ष 2018 के आंकड़ों पर नजर डालें तो मानसून सीजन में हिमाचल में 343 लोगों की मौत हुई. कुल 1520 करोड़ की संपत्ति को नुकसान हुआ. इसी प्रकार मानसून सीजन में वर्ष 2019 में 218 लोगों को जान गंवानी पड़ी. वर्ष 2020 में 240 लोगों की मौत हुई तो वर्ष 2021 में मौतों का आंकड़ा 481 हो गया. इसी तरह से वर्ष 2022 में मानसून सीजन में भारी बारिश के कारण 435 मौतें दर्ज की गई. वर्ष 2023 में तो हिमाचल ने सदी की भीषणतम आपदा देखी. इस साल मानसून सीजन में 509 लोगों की मौत हुई. शिमला के समरहिल में शिव बावड़ी भूस्खलन और सोलन जिला के ममलीग में भारी मलबा आने से एक ही दिन में 55 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी. शिमला के समरहिल में 14 अगस्त को सावन के सोमवार के दिन महाकाल ने 20 लोगों का जीवन छीन लिया था. उस दौरान हिमाचल प्रदेश में 14 अगस्त 2023 के दिन 55 लोगों ने एक ही दिन में जान गंवाई थी. इसी तरह वर्ष 2024 में बरसात के सीजन में हिमाचल ने 353 व इस वर्ष 2025 में मानसून सीजन में 454 लोगों की जान गई.

साल दर साल तबाही
आंकड़ों में संख्या बेशक दिख जाती है, लेकिन मन की पीड़ा अबूझ रहती है. यदि प्राकृतिक आपदाओं की बात की जाए तो पिछले अढ़ाई साल में हिमाचल में इन हादसों में 4468 लोगों की जान गई है. सबसे अधिक प्रभावित उपमंडल कुल्लू रहा है. सब-डिवीजन कुल्लू में अढ़ाई साल में 225 लोगों की मौत हुई. चंबा उपमंडल में मौतों की संख्या 173, ऊना उपमंडल में 145, रामपुर उपमंडल में 131, भरमौर उपमंडल में 115, शिमला ग्रामीण में 112, चौपाल उपमंडल में 111, ठियोग में 110, रोहड़ू उपमंडल में 107 लोगों ने अपनी जान ऐसे हादसों में गंवाई है. ये जानकारी हिमाचल सरकार की तरफ से विधानसभा में दी गई है.

खैर, हादसों के जख्म पर मरहम लगाना राज्य सरकार और केंद्र सरकार का काम है. राज्य सरकार ने आपदा में तबाह हुए घरों के लिए मुआवजा राशि बढ़ाई है. राज्य सरकार ने आपदा के राहत मैनुअल को संशोधित किया है. इसी तरह पीएम नरेंद्र मोदी ने हिमाचल के लिए 1500 करोड़ रुपए की सहायता का ऐलान किया है. अभी इस रकम का इंतजार है.

