Yearender 2025 : बिहार की राजनीति के लिए कंट्रोवर्सी का साल रहा 2025.. जानिए कौन सा घटनाक्रम बनीं सुर्खियां?
ये साल बिहार के लिए चुनावी साल था, इसलिए यह वर्ष काफी उथल-पुथल भरा रहा. लालू परिवार में विवाद से लेकर SIR-कंट्रोवर्सी ने सुर्खियां बटोरीं..पढ़ें-

Published : December 23, 2025 at 1:56 PM IST
पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 केवल सत्ता परिवर्तन या हार-जीत की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह चुनाव लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता, डिजिटल राजनीति के बढ़ते प्रभाव और पारंपरिक सामाजिक समीकरणों के नए स्वरूप का बड़ा परीक्षण बनकर सामने आया.
राजनीतिक उथल-पुथल का रहा साल : 2025 बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जहां एक ओर सत्तारूढ़ एनडीए ने मजबूत संगठन और रणनीति के दम पर सत्ता पर पकड़ बनाए रखी, वहीं दूसरी ओर INDIA गठबंधन बिखराव, आंतरिक कलह और नेतृत्व संकट से जूझता नजर आया. चुनाव प्रक्रिया के पहले चरण से लेकर परिणामों की घोषणा तक, बिहार की राजनीति विवादों, आरोप-प्रत्यारोप और जनआंदोलनों से घिरी रही. मतदाता सूची संशोधन से लेकर डिजिटल दुष्प्रचार, जातिगत ध्रुवीकरण और राजनीतिक परिवारों के भीतर संघर्ष हर मोर्चे पर सवाल उठे.
SIR विवाद पर संग्राम: 2025 बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सबसे बड़ा विवाद निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ने सबसे पहले राजनीतिक तापमान बढ़ाया. चुनाव आयोग का दावा था कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य फर्जी और एक से अधिक जगह दर्ज नामों को हटाकर मतदाता सूची को शुद्ध बनाना है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे भाजपा के इशारे पर किया जाने वाला कार्य बताया.
विपक्ष के केंद्र पर आरोप : SIR को लेकर पूरे प्रदेश में राजनीति शुरू हुई. चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी प्रक्रिया कराना संदेह पैदा करता है. राजद, कांग्रेस और वाम दलों ने दावा किया कि हजारों ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए जो वर्षों से नियमित रूप से मतदान करते आ रहे थे.

कोर्ट तक पहुंची SIR की लड़ाई : कानूनी लड़ाई और आंदोलन के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. विपक्ष ने नागरिकता संबंधी प्रावधानों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए SIR को तत्काल रोकने की मांग की. इसी मुद्दे पर INDIA गठबंधन ने बिहार बंद का आह्वान किया. बिहार बंद में शामिल होने के लिए राहुल गांधी पटना आए. बिहार बंद के दौरान उनके साथ तेजस्वी प्रसाद यादव, दीपांकर भट्टाचार्य, मुकेश सहनी सहित इंडिया गठबंधन के सभी बड़े नेता एक साथ दिखे.
विपक्ष के निशाने पर आयोग : आरजेडी के प्रवक्ता चितरंजन गगन ने बताया कि 2024 लोकसभा के बाद 2025 में बिहार विधानसभा का चुनाव हुआ. 2025 बिहार की राजनीति में उथल-पुथल का वर्ष माना जाएगा. राजनीतिक रूप से कई ऐसे काम हुए जो पहले कभी नहीं हुआ था. SIR की शुरुआत बिहार से हुई जो अब राष्ट्रीय स्तर तक होने की बात की जा रही है. इससे पहले भी देश में निर्वाचन आयोग की तरफ से SIR हुआ था, लेकिन इतना विवाद कभी नहीं हुआ. SIR को लेकर इस बार अनेक प्रावधान जोड़ दिए गए जो लोगों के लिए परेशानी का सबक बन गया.

''सत्तारूढ़ NDA को फायदा पहुंचाने के लिए प्रक्रिया जल्दबाजी में कराई गई. विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और नागरिकता प्रावधानों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए SIR प्रक्रिया वापस लेने की मांग की. लेकिन कानूनी रूप से SIR बिहार में करवाया गया लेकिन निर्वाचन आयोग की तरफ से कई ऐसे काम किए गए जिसको लेकर लोगों के मन में भ्रम पैदा हुआ.''- चितरंजन गगन, प्रवक्ता, आरजेडी
निर्वाचन आयोग पर आरोप : निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाते हुए चितरंजन गगन ने कहा 2025 में निर्वाचन आयोग की तरफ से कई ऐसे काम किए गए जिसको लेकर सवाल अभी भी उठ रहे हैं. ताजा मामला पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का है जिन्होंने स्वीकार किया है कि 2020 के चुनाव में उन्होंने कैसे जिलाधिकारी को कहकर चुनाव परिणाम बदलवा दिया था. भारत के चुनाव में भारत के चुनाव आयोग की तारीफ होती थी. बाहर के देश के अधिकारी यहां चुनाव प्रक्रिया को समझने के लिए आते थे. लेकिन इस बार संवैधानिक संस्था के कार्यशैली पर सवाल उठने लगे.
''विपक्ष के तरफ से कई चीजें आयोग से पूछी गई लेकिन इसका कोई जवाब निर्वाचन आयोग की तरफ से विपक्षी दलों को नहीं दिया गया. मतदान केंद्रों के CCTV फुटेज सार्वजनिक न करना, चुनावी डेटा तक पहुंच सीमित करना. ईवीएम (EVM) की विश्वसनीयता को लेकर उठे सवालों पर स्पष्ट जवाब से बचना इसके उदाहरण है.''- चितरंजन गगन, प्रवक्ता, आरजेडी

हाईटेक चुनाव प्रचार : 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव हाईटेक चुनाव प्रचार के लिए जाना जाएगा. 2025 के चुनाव में AI जनरेटेड कंटेंट, डीपफेक वीडियो और छेड़छाड़ किए गए रील्स चुनाव प्रचार के दौरान देखने को मिला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत माता हीराबेन मोदी को लेकर एक विवादित डीपफेक वीडियो वायरल हुआ, जिससे आक्रोश और विपक्ष के प्रति सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं का आक्रोश देखने को मिला. फर्जी कंटेंट के जरिए जनमत को प्रभावित करने के आरोप लगे. बिहार चुनाव डिजिटल कैंपेन का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा, जिसके बाद ऑनलाइन राजनीतिक कंटेंट पर सख्त नियमों की मांग तेज हुई.
जाति आधारित चुनावी राजनीति : वरिष्ठ पत्रकार कौशलेंद्र प्रियदर्शी का मानना है कि 2025 बिहार विधानसभा का चुनाव एक बार फिर से जाति आधारित पॉलिटिक्स के रूप देखा गया. सभी राजनीतिक दलों ने कास्ट फैक्टर देखते हुए प्रत्याशियों का चयन किया. राजद ने जहां अपना पुराना वोट बैंक MY को साधने की फिर से कोशिश की. वहीं अन्य राजनीतिक दलों ने अपने राजनीतिक समीकरण को देखते हुए प्रत्याशियों का चयन किया.
''विवादित नारे और पोस्टर सामने आए, जिनमें एक पोस्टर में राबड़ी देवी के आवास के बाहर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 'खलनायक' बताया गया. जाति आधारित ध्रुवीकरण ने रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे असली मुद्दों को पीछे धकेल दिया. फिर से बिहार में MY समीकरण और पिछड़ा, अति पिछड़ा और महिला के ध्रुवीकरण की राजनीति हावी रही.''- कौशलेंद्र प्रियदर्शी, वरिष्ठ पत्रकार
महागठबंधन की हार : 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा. महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गई. वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रो नवल किशोर चौधरी का कहना है कि महागठबंधन के हार के लिए आंतरिक कलह, स्पष्ट रणनीति की कमी और NDA के नैरेटिव का जवाब न दे पाना मुख्य कारण रहा. कभी सबसे बड़ी पार्टी रही राजद (RJD) सिर्फ 25 सीटों पर सिमट गई और मुश्किल से नेता प्रतिपक्ष की भूमिका बचा पाई.

''2020 के चुनाव में जो आरजेडी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी वह इस बार किसी तरीके से विपक्ष की पार्टी बनने में कामयाब रही. पूरा महागठबंधन मात्र 35 सीटों पर सिमट कर रहा गया. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बिहार में अपनी ताकत का एहसास करते हुए फिर से 5 सीट पर जीत हासिल की. ओवैसी की पार्टी की जीत ने साबित कर दिया कि सीमांचल में अल्पसंख्यक समुदाय के वोटों का झुकाव और ओवैसी की तरफ हो चुका है.'' - प्रो नवल किशोर चौधरी, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक
हार पर राजद का तर्क : बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की हार पर चितरंजन गगन का मानना है कि चुनाव में उनके गठबंधन की हार हुई है, लेकिन उन लोगों के राजनीतिक दल को तो छोड़िए, आम लोग भी इस हार को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर केवल विपक्षी दल ही नहीं आम लोग भी सवाल खड़ा कर रहे हैं.
''चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया गया. चुनाव के दिन मतदाताओं के खाते में 10000 रुपए भेजे गए. इसी तरीके की योजना पर अन्य राज्यों में निर्वाचन आयोग ने रोक लगा दिया था. जो योजना अन्य राज्यों में पहले से चल रही थी उसी पर रोक लगा दिया गया. लेकिन बिहार में खुलेआम मतदाताओं के बीच पैसे बांटे गए. विपक्ष के द्वारा जो भी शिकायत निर्वाचन आयोग को किया गया किसी भी शिकायत का जवाब आयोग ने आज तक नहीं दिया है.''- चितरंजन गगन, प्रवक्ता, आरजेडी
PK की जन सुराज पार्टी का प्रभाव : 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज ने बिहार की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया. 243 सीट वाली विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने 238 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी कोई सीट जीत नहीं पाई, लेकिन 238 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए करीब 35 सीटों पर वोट काटकर चुनावी नतीजों को प्रभावित किया.
''JSP की मौजूदगी से कई सीटों पर जीत-हार का अंतर बदला, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से कई सीटों पर NDA को तो कई सीटों पर महागठबंधन को लाभ पहुंचाया. विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में एक तीसरे विकल्प के रूप में अपनी सशक्त दावेदारी पेश की है. अब देखना होगा कि जिस तरीके की राजनीति प्रशांत किशोर करते आए हैं वह बिहार की राजनीति में कितने दिनों तक इस रूप से संघर्ष कर सकते हैं.''- सुनील पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार
लालू परिवार से जुड़े विवाद : 2025 में लालू प्रसाद यादव का परिवार कई राजनीतिक और निजी विवादों के केंद्र में रहा, जिससे बिहार की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार की आंतरिक दरारें उजागर हुईं. 2025 में लालू यादव के परिवार में सबसे बड़ा मामला उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को लेकर उठा. अनुष्का यादव के साथ अपने संबंधों को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया जिसके कारण लालू प्रसाद ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप को परिवार और पार्टी से निकलने का फैसला किया.
तेजप्रताप की तेजस्वी को चुनौती : परिवार और पार्टी से निकलने के बाद तेज प्रताप यादव ने अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल का गठन किया और महुआ विधानसभा क्षेत्र से वह अपनी पार्टी के बैनर तने चुनाव लड़े. उन्होंने महुआ से चुनाव लड़ा और राघोपुर में तेजस्वी को चुनौती दी. दोनों भाइयों के बीच टकराव खुली राजनीतिक लड़ाई में बदल गया. हालांकि तेज प्रताप यादव की विधानसभा चुनाव में हार हुई.
बेटी का खुला विरोध : वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय का कहना है कि 2025 में बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार लालू प्रसाद का परिवार राजनीतिक रूप से बिखर गया. तेजस्वी यादव, लालू यादव के छोटे बेटे, 2025 चुनाव में INDIA गठबंधन का चेहरा बने. राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद के बाद सबसे ज्यादा तेजस्वी यादव की पार्टी में चली. लालू प्रसाद की बड़ी बेटी मीसा भारती भले ही लोकसभा की सदस्य हैं लेकिन पार्टी में उनकी भी बहुत ज्यादा नहीं चल रही है. विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें पार्टी के भीतर आलोचना का सामना करना पड़ा.
''मीसा भारती की पार्टी में नहीं चल रही है. इधर बहन रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी पर विश्वासघात और कुप्रबंधन के आरोप लगाए. स्थिति तो ऐसी हो गई की रोहिणी आचार्य को इस विरोध के कारण अपने पिता का घर छोड़ कर जाना पड़ा. जिस तरीके से उन्होंने रोते हुए मीडिया के सामने बातें रखी उससे परिवार के अंदर राजनीतिक लड़ाई सामने आ गई.''- सुनील पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार

रोहिणी आचार्य की बगावत: वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय का कहना है कि रोहिणी आचार्य, जिन्होंने किडनी दान देकर सुर्खियां बटोरी थीं, चुनावी हार के बाद राजनीति छोड़ दीं और परिवार से रिश्ते तोड़ लिए. उन्होंने संजय यादव और रमीज समेत पार्टी नेताओं पर दबाव डालने का आरोप लगाया. यह प्रकरण राजद की आंतरिक संकट का ज्वलंत उदाहरण बना.
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