Yearender 2025: बिहार में न्यायिक फैसलों ने बदली तस्वीर, सुर्खियों में रहे पुल की सुरक्षा से लेकर जमीन की रजिस्ट्री तक के फैसले
2025 में बिहार में न्यायिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण फैसले आए. जानें सुप्रीम कोर्ट के जमीन रजिस्ट्री आसान करने से लेकर पटना हाईकोर्ट के अहम फैसले.

Published : December 28, 2025 at 7:09 AM IST
पटना: बिहार में साल 2025 में कानून और न्याय के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण फैसले हुए. सर्वोच्च न्यायालय से लेकर पटना हाईकोर्ट तक ने अहम फैसले सुनाए, जिनका असर आम जनता के जीवन पर पड़ा. इन फैसलों में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, जमीन के रजिस्ट्रेशन को आसान बनाना और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दे शामिल रहे. बीपीएससी छात्रों का मुद्दा और राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर का मुद्दा देश भर में सुर्खियां बनी लेकिन फैसले ने नजीर पेश की.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जमीन की रजिस्ट्री आसान: नवंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार में जमीन के पंजीकरण से जुड़ा एक बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने बिहार सरकार के उस संशोधन को रद्द कर दिया, जिसके तहत जमीन की बिक्री के लिए म्यूटेशन यानी जमाबंदी का प्रमाण अनिवार्य बना दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजीकरण कार्यालय का काम सिर्फ दस्तावेजों की रजिस्ट्री करना है. मालिकाना हक तय करना राजस्व या सिविल अदालत का काम है. इस फैसले से आम लोगों को राहत मिली है और जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया आसान हुई है.
पुलों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में पुलों के ढहने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई. सर्वोच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को पटना हाई कोर्ट स्थानांतरित करते हुए राज्य में निर्माणाधीन और बने हुए सभी पुलों का व्यापक ऑडिट कराने का निर्देश दिया.

बिहार में एक-एककर गिरे कई पुल: यह निर्देश अगवानी-सुल्तानगंज समेत कई पुलों के ध्वस्त होने के बाद आया था. इस फैसले से बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और सरकारी ठेकेदारों की जवाबदेही पर सार्वजनिक बहस शुरू हुई. इसके बाद सरकार के अधिकारी निर्माणाधीन पुल का निरीक्षण करते नजर आए और बाद में पुल गिरने की घटनाएं कम हुई.

चुनावी पारदर्शिता के लिए एसआईआर की मंजूरी: जून 2025 में बिहार में भारत निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण पहल की. बिहार में निर्वाचन आयोग की निगरानी में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर शुरू किया गया. इसका मकसद सूची में मौजूद विसंगतियों और कथित गड़बड़ियों को दूर करना था. यह कदम 2025 के स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले उठाया गया, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित हो सके. विपक्ष सुप्रीम कोर्ट गया लेकिन कोर्ट ने चुनाव आयोग के इस अभियान को गलत नहीं ठहराते हुए उचित बताया. इस अभियान में बिहार के 47 लाख मतदाता के नाम कटे और यह वह मतदाता थे जिनका दो जगह मतदाता सूची में नाम था अथवा जिनकी मृत्यु हो गई थी.

बीपीएससी परीक्षा मामले पर हाईकोर्ट का फैसला: मार्च 2025 में पटना हाईकोर्ट ने बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाया. परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद अदालत ने मामले की जांच की. हाईकोर्ट ने किसी बड़े दोष या सिस्टमैटिक खामी का प्रमाण नहीं पाया. इसके बाद अदालत ने बीपीएससी को तय कार्यक्रम के अनुसार मुख्य परीक्षा कराने की अनुमति दे दी. यह फैसला हजारों युवा उम्मीदवारों के भविष्य के लिए अहम साबित हुआ.
समाज के विभिन्न वर्गों के लिए अहम फैसले: 2025 में बिहार की अदालतों ने समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े मामलों में भी अहम फैसले सुनाए. अदालतों ने किशोर न्याय के मामलों में दंड के बजाय पुनर्वास पर जोर दिया. यह दृष्टिकोण किशोर न्याय अधिनियम के अनुरूप था. मेडिकल शिक्षा में सीट आवंटन को लेकर उठे विवादों में अदालतों ने मेरिट आधारित दाखिले और पारदर्शिता को बरकरार रखा. वहीं पटना हाईकोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर पेंशन और देखभाल सुविधाओं का पक्ष लिया. अदालत ने राज्य सरकार को वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन करने का निर्देश दिया.
राष्ट्रहित में न्याय सर्वोच्च प्राथमिकता: पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता ऋषिकेश नारायण सिन्हा ने कहा कि साल 2025 बिहार के कानूनी और न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण साल के रूप में दर्ज होगा. सर्वोच्च न्यायालय हो या उच्च न्यायालय, न्यायालय के फैसलों ने न्याय की अवधारणा को मजबूत करते हुए व्यक्ति और संस्थाओं की जिम्मेदारियां तय की. फैसलों ने बताया कि राष्ट्र हित सर्वोच्च है और न्यायप्रिय व्यवस्था सर्वोपरि है.
"कोर्ट के फैसले ने हर बार इस बात को मजबूत किया कि कानून किसी व्यक्ति या संस्था से ऊपर है और सबके लिए समान है, व्यक्ति अथवा संस्थान की गरिमा को बचाए रखने की अपनी भूमिका को हर स्तर पर न्यायालय ने जिम्मेदारी पूर्वक अदा की है."-ऋषिकेश नारायण सिन्हा, अधिवक्ता, पटना हाईकोर्ट
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