ETV Bharat / state

Yearender 2025: सत्ता से बाहर होते ही 'कमजोर' पड़ी AAP, भाजपा सरकार से लड़ती दिखी कांग्रेस, पढ़िए पूरे साल का सियासी माहौल

दिल्ली में मुख्य विपक्षी पार्टी आम आदमी पार्टी से ज्यादा सक्रिय दिखी कांग्रेस, लोकल चुनाव को मजबूती से लड़ा.

कांग्रेस रही आगे, आम आदमी पार्टी पूरे साल दिखी कमजोर
कांग्रेस रही आगे, आम आदमी पार्टी पूरे साल दिखी कमजोर (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Delhi Team

Published : December 27, 2025 at 6:33 AM IST

8 Min Read
Choose ETV Bharat

नई दिल्ली: साल 2025 खत्म होने को है. यह साल भी हर साल की तरह दिल्ली की सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए उतार चढ़ाव वाला रहा है. अगर हम दिल्ली की सत्ता में 11 साल तक रही आम आदमी पार्टी की बात करें तो इस साल आम आदमी पार्टी को सत्ता से बेदखल होना पड़ा. फरवरी 2025 में संपन्न दिल्ली की आठवीं विधानसभा के चुनाव में चौथी बार दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रही आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा. आम आदमी पार्टी को विधानसभा चुनाव में करारी हार के साथ ही 62 से 22 सीटों पर सिमट गई.

इतना ही नहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद नई दिल्ली सीट से विधानसभा चुनाव हार गए. साथ ही पार्टी के नंबर दो नेता मनीष सिसोदिया अपनी पुरानी सीट पटपड़गंज को बदलकर जंगपुरा से चुनाव लड़ने के बावजूद चुनाव हार गए. आप के बड़े नेताओं में तत्कालीन सीएम आतिशी ही अपनी कालका जी सीट से जीतने में सफल रहीं. इसका उन्हें इनाम भी मिला और पार्टी ने उन्हें चार बार जीतने वाले विधायकों के ऊपर वरीयता देते हुए नेता प्रतिपक्ष भी बनाया.

दिल्ली में आप और कांग्रेस की राजनीति (ETV Bharat)

विधानसभा चुनाव में हार के बाद अरविंद केजरीवाल का दिल्ली से मोहभंग होता दिखा और वह पंजाब कूच कर गए. उन्होंने दिल्ली के संगठन में बदलाव करते हुए गोपाल राय की जगह सौरभ भारद्वाज को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष बनाया. उसके बाद से सौरभ भारद्वाज और आतिशी ही दिल्ली में जनता के मुद्दों को लेकर रेखा गुप्ता सरकार को घेरने का काम कर रहे हैं. विधानसभा चुनाव में हार के बाद अरविंद केजरीवाल ने अभी तक सड़क पर उतरकर दिल्ली सरकार के खिलाफ कोई प्रदर्शन नहीं किया है.

केजरीवाल का पंजाब और गुजरात पर फोकस

साल 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद से अरविंद केजरीवाल का पूरा फोकस पंजाब पर हो गया है. साथ ही उन्होंने दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी पंजाब का प्रभारी बनाकर उनको भी वहीं का काम सौंप दिया है. सिसोदिया भी दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद से पंजाब में ही सक्रिय हैं. साथ ही अपने दिल्ली के शिक्षा मॉडल को वहां पर लागू करने और सरकार की शिक्षा के क्षेत्र में काम वाली छवि बनाने में जुटे हुए हैं. गोपाल राय को पार्टी ने दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाकर गुजरात का प्रभारी बना दिया. अब गोपाल राय का फोकस गुजरात पर है. साथ ही अरविंद केजरीवाल भी यह चाहते हैं कि गुजरात में भाजपा सरकार को चुनौती देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात मॉडल की हवा निकाली जाए.

दिल्ली में कांग्रेस की स्थिति
दिल्ली में कांग्रेस की स्थिति (ETV Bharat)

दरअसल, आगामी साल 2027 में पंजाब में विधानसभा चुनाव होना है, इसको देखते हुए इस बात की पूरी संभावना है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया अपना पूरा समय पंजाब में ही दे रहे हैं. पंजाब में फिर से सरकार बनाना आम आदमी पार्टी की पहली प्राथमिकता है, क्योंकि दिल्ली में तो अब 2030 में ही विधानसभा चुनाव होना है.

पंजाब में आम आदमी पार्टी सक्रिय
पंजाब में आम आदमी पार्टी सक्रिय (ETV Bharat)

दिल्ली में आप को निगम में भी गंवानी पड़ी सत्ता

आम आदमी पार्टी को दिल्ली में सरकार गंवाने के बाद एमसीडी की सत्ता से भी हाथ धोना पड़ा. दिल्ली नगर निगम में विधानसभा से 14 सदस्यों के मनोनयन का प्रावधान है. ऐसे में पहले संख्या बल के आधार पर भाजपा का एक विधायक और आप के 13 विधायक निगम में सदस्य थे. जब दिल्ली में सरकार बदली तो सदस्य संख्या के आधार पर आप के तीन और भाजपा के 11 विधायकों का निगम में मनोनयन हुआ. साथ ही आप के चार से ज्यादा पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से आम आदमी पार्टी निगम में अल्पमत में आ गई. इसके बाद वर्ष 2025 के अप्रैल में हुए मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में अपने प्रत्याशी नहीं लड़ाए. इससे भाजपा को निर्विरोध अपना मेयर बनाने का मौका मिला. इस तरह भाजपा दिल्ली में अपनी ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने में कामयाब रही.

आप प्रदेश प्रवक्ता नितेश चौरसिया का बयान
आप प्रदेश प्रवक्ता नितेश चौरसिया का बयान (ETV Bharat)

एमसीडी उपचुनाव में भी सक्रिय नहीं दिखे केजरीवाल

नवंबर में संपन्न 12 वार्ड के निगम उपचुनाव में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया भी नजर नहीं आए. दोनों नेता पंजाब में अलग-अलग कार्यक्रमों में व्यस्त रहे. इनमें मुख्य कार्यक्रम आनंदपुर साहिब में गुरू तेगबहादुर के शहीदी दिवस का रहा. यहां तक कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से भी दिल्ली निगम उपचुनाव से संबंधित किसी भी तरह के पोस्ट को भी शेयर नहीं किया. पूरी तरह से निगम उपचुनाव से दूरी बनाकर रखी. जबकि अन्य नेता आतिशी, संजय सिंह और गोपाल राय चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में सक्रिय हुए. वहीं, प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज अकेले ही कुछ विधायकों के साथ उपचुनाव का मोर्चा संभालते रहे. उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को सीटों के आंकड़े के हिसाब से न कोई फायदा हुआ न कोई नुकसान हुआ. उसके पास तीन सीटें थीं और फिर वह तीन सीटें जीतने में सफल रही.

दिल्ली में कांग्रेस सक्रिय
दिल्ली में कांग्रेस सक्रिय (ETV Bharat)

विधानसभा चुनाव में हार के बाद सक्रिय दिखी कांग्रेस

दिल्ली के विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस की सक्रियता कम नहीं हुई. बल्कि कांग्रेस और ज्यादा सक्रिय दिखी. कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के बाद अपने संगठन को मजबूत करने के लिए संगठन सृजन अभियान शुरु किया. इसके साथ ही जिला स्तर पर अपने सभी जिलों के कार्यकर्ताओं को पार्टी को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षित किया. साथ ही 250 से ज्यादा ब्लॉक अध्यक्षों को नियुक्त किया. इसके बाद कई जिलों में नए जिला अध्यक्ष भी बनाए. वहीं, दिल्ली की भाजपा सरकार के खिलाफ अलग-अलग मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया. इनमें प्रमुख रूप से फ्री गैस सिलिंडर, वायु प्रदूषण, दिल्ली में बसों की कमी और अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन शामिल रहे.

कांग्रेस नेता नरेंद्र नाथ का बयान
कांग्रेस नेता नरेंद्र नाथ का बयान (ETV Bharat)

एमसीडी उपचुनाव में कांग्रेस ने दर्ज कराई मजबूत उपस्थिति

नवंबर में संपन्न 12 वार्ड के निगम उपचुनाव में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने पूरी सक्रियता दिखाते हुए सभी वार्ड में अपने प्रत्याशी उतारे. साथ ही मतदान से एक सप्ताह पहले लगातार विरोध प्रदर्शन और प्रेस कांफ्रेंस कर रेखा गुप्ता सरकार को कटघरे में खड़ा किया. इसका नतीजा यह हुआ कि 12 में से एक संगम विहार वार्ड में कांग्रेस जीतने में सफल रही. जबकि इससे पहले इन उपचुनाव वाले 12 वार्ड में से कांग्रेस के पास एक भी सीट नहीं थी. इसके साथ ही कांग्रेस ने चांदनी महल वार्ड में भी अच्छा चुनाव लड़ा और करीब 6600 वोट हासिल किए. पूरे उपचुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत करीब 8 प्रतिशत बढ़ा. जबकि आम आदमी पार्टी और भाजपा का वोट प्रतिशत कम हुआ.

वोट चोर गद्दी छोड़ रैली से कांग्रेस ने दिया सरकार को बड़ा संदेश

दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस ने 14 दिसंबर को वोट चोर गद्दी छोड़ रैली का आयोजन किया. इस रैली से कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मजबूती से लड़ने का संदेश दिया है. इसमें भी दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही. रामलीला मैदान में अच्छी खासी भीड़ जुटाने में दिल्ली और पड़ोसी राज्य हरियाणा ने बड़ी भूमिका निभाई. इस रैली की तैयारियों में भी दिल्ली कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंकी थी. इससे भी कांग्रेस को अपने संगठन को एकजुट करने का मौका मिला, क्योंकि केंद्रीय नेतृत्व के आव्हान पर आयोजित रैली में दिल्ली के सभी नेता पूरे मनोयोग से जुटे.

ये भी पढ़े: