यमुना जल समझौता: डोटासरा का दावा, 'सरकार ने किया समर्पण, शेखावटी को एक बूंद पानी नहीं मिलेगा'
गोविंद डोटासरा ने कहा कि यमुना जल समझौते में राजस्थान के हितों से समझौता किया गया है.

Published : June 30, 2026 at 4:01 PM IST
बीकानेर: सीमांत क्षेत्र में धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने और बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं के विरोध में सोमवार को जिला कलेक्ट्री के बाहर कांग्रेस ने महापड़ाव और विशाल विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली शामिल हुए. इस दौरान मीडिया से बातचीत में डोटासरा ने कहा कि पहले 1994 वाले समझौते में जहां राज्य को 12 महीने पानी मिलने की व्यवस्था थी, अब केवल चार महीने पानी मिलेगा. हरियाणा को प्राथमिकता दी जाएगी. इस समझौते से शेखावटी को एक बूंद पानी नहीं मिलेगा.
'केवल चार महीने पानी मिलेगा': डोटासरा ने यमुना जल समझौते के बाद मुख्यमंत्री के स्वागत कार्यक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि आखिर किस बात का स्वागत किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान के हितों के साथ समझौता किया गया है और राज्य के अधिकारों का समर्पण कर दिया गया. उन्होंने कहा कि वर्ष 1994 के समझौते को समाप्त कर नई व्यवस्था में राजस्थान के हित प्रभावित हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि पहले जहां राज्य को 12 महीने पानी मिलने की व्यवस्था थी, अब केवल चार महीने पानी मिलेगा, जबकि पहले हरियाणा को प्राथमिकता दी जाएगी. शेखावटी को एक बूंद पानी नहीं मिलेगा.
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'बीजेपी ने अटकाया था समझौता': डोटासरा ने कहा कि यह भी याद रखना चाहिए कि पहले यह समझौता किसके कारण अटका हुआ था. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय केंद्र की सरकार ने इस पर स्वीकृति नहीं दी थी, जबकि अब राजनीतिक लाभ के लिए इसे स्वीकार किया जा रहा है. उन्होंने भाजपा पर केवल इवेंट मैनेजमेंट की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल एमओयू पर हस्ताक्षर करने से जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होता.
'जिस दिन पर्ची निकली, उसी दिन भाग्य फूट गए': मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए डोटासरा ने कहा कि जिस दिन मुख्यमंत्री के नाम की 'पर्ची' निकली, उसी दिन प्रदेश का दुर्भाग्य शुरू हो गया. उन्होंने कहा कि अब जनता उस दिन का इंतजार कर रही है जब नई पर्ची निकलेगी और प्रदेश को नई दिशा मिलेगी. डोटासरा ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय मामलों पर कहाकि ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं और इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर सरकार पर आरोप: डोटासरा ने सीमांत क्षेत्र में धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने के मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में सामाजिक और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग धार्मिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाकर समाज में तनाव पैदा करना चाहते हैं ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके.
'अस्पताल से लेकर जेल तक सुरक्षित नहीं लोग': पीबीएम अस्पताल की अव्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए डोटासरा ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों में मरीजों की मौत हो रही है, जबकि जेलों में हत्या जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार का इकबाल खत्म हो चुका है, कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है और अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं.
'हम राहुल गांधी के बब्बर शेर हैं': सरकार के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपनाने पर डर लगने संबंधी सवाल के जवाब में डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता किसी दबाव में आने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वे राहुल गांधी के नेतृत्व में जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं और आगे भी पूरी मजबूती से लड़ते रहेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को जनहित के मुद्दों पर झुकाने के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी.
महापड़ाव के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सीमांत क्षेत्र में धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच, पीबीएम अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार तथा प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत करने की मांग की. कार्यक्रम में विधायक सुशीला डूडी, देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग, पूर्व मंत्री बीडी कल्ला, गोविंद मेघवाल, पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे.

