बिहार में विश्व का सबसे विशाल सहस्त्रलिंगम शिवलिंग, जानें कब और कहां होगी स्थापना
विश्व का सबसे बड़ा 33 फीट ऊंचा, 210 टन वजनी सहस्त्रलिंगम शिवलिंग बिहार पहुंच चुका है. जानें कब विराट रामायण मंदिर में स्थापना होगी.

Published : January 5, 2026 at 11:26 AM IST
पटना: विश्व का सबसे बड़ा सहस्त्रलिंगम शिवलिंग बिहार पहुंच चुका है और इसे लेकर राज्यभर में उत्साह का माहौल है. गोपालगंज से शुरू हुई इसकी यात्रा खजुरिया और हुसैनी होते हुए पूर्वी चंपारण के केसरिया प्रखंड स्थित कैथवलिया पहुंचेगी. 17 जनवरी को विराट रामायण मंदिर परिसर में इसकी भव्य स्थापना प्रस्तावित है. इस आयोजन को लेकर धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि इसे न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है.
विशेष तिथि का धार्मिक महत्व: शिवलिंग की स्थापना के लिए 17 जनवरी की तिथि धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी गई है. इस दिन माघ कृष्ण चतुर्दशी तिथि पड़ रही है, जिसे शिवलिंग की उत्पत्ति से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव की लिंग रूप में पूजा की शुरुआत हुई थी. यही कारण है कि इस तिथि का महत्व शिवरात्रि के समान माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों और ईशान संहिता के अनुसार इस शुभ दिन को स्थापना के लिए चुना गया है.
पांच तीर्थों के जल से होगा अभिषेक: शिवलिंग की स्थापना को और भी दिव्य बनाने के लिए पांच प्रमुख तीर्थ स्थलों से पवित्र जल मंगाया जा रहा है. इसमें कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज और सोनपुर शामिल हैं. इन सभी स्थलों के जल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाएगा. स्थापना के दिन हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की भी योजना है, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक और उत्सवमय हो जाएगा.
सहस्त्रलिंगम का अद्वितीय स्वरूप: महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के अनुसार यह शिवलिंग सहस्त्रलिंगम स्वरूप का है. उनका कहना है कि इस एक शिवलिंग पर जल अर्पित करने से 108 शिवलिंगों पर जल चढ़ाने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. 33 फीट ऊंचे इस शिवलिंग को तैयार करने में करीब 10 वर्ष का समय लगा है.

मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा की योजना: 17 जनवरी को शिवलिंग की स्थापना तो होगी, लेकिन इसकी प्राण प्रतिष्ठा मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद ही की जाएगी. फिलहाल शिवलिंग की पूजा की जाएगी. इसका कुल वजन लगभग 210 मेट्रिक टन है और 45 दिनों की लंबी यात्रा के बाद यह बिहार पहुंचा है.
"शिवलिंग की स्थापना के बाद मंदिर से जुड़े चार प्रमुख कार्य शेष रहेंगे. इनमें सिविल कंस्ट्रक्शन, शिखर निर्माण, पेंटिंग और स्टोन क्लैडिंग शामिल हैं. सभी देवी देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा के साथ मंदिर को 2030 तक श्रद्धालुओं के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है."-सायण कुणाल, सचिव, महावीर स्थान न्यास समिति

नंदी और मुख्य प्रतिमा का विशेष निर्माण: सायण कुणाल ने बताया कि शिवलिंग स्थापना के बाद नंदी महाराज की प्रतिमा का निर्माण किया जाएगा. यह प्रतिमा भी ब्लैक ग्रेनाइट स्टोन से तैयार होगी. इसके साथ ही अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की मूर्ति बनाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज से संपर्क किया गया है. मंदिर में मुख्य देवी देवताओं की प्रतिमा उन्हीं से बनवाने की योजना पर विचार चल रहा है, जिससे मंदिर की भव्यता और कलात्मकता और बढ़ेगी.

गोपालगंज में भव्य स्वागत की तैयारी: शिवलिंग के बिहार आगमन पर गोपालगंज में भव्य स्वागत की तैयारी की गई. बैंड बाजा और पूजा अर्चना के साथ श्रद्धालुओं इसका अभिनंदन किया. एक दिन के विश्राम के बाद 5 जनवरी को शिवलिंग गोपालगंज के बलथरी के लिए रवाना होगा. सुबह 11 बजे बलथरी में भव्य स्वागत होगा, जिसके लिए विशेष प्रवेश द्वार भी तैयार किया गया है. इसके बाद चैनपट्टी में भी बड़ी संख्या में भक्त स्वागत कार्यक्रम में शामिल होंगे.

वेद मंत्रों और यज्ञ के साथ स्थापना: स्थापना के दिन भव्य यज्ञ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें चारों वेदों के विद्वान आमंत्रित किए गए हैं. पंडित भावनाथ झा के अनुसार सुबह 8:30 बजे से पूजा शुरू होगी और दोपहर 1:00 बजे तक शिवलिंग की स्थापना पूरी कर ली जाएगी, क्योंकि ढलते सूर्य में मूर्ति स्थापना को वर्जित माना जाता है. पूजा के बाद भोजन प्रसाद का आयोजन भी होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लगभग 1000 वर्षों बाद सहस्त्रलिंगम शिवलिंग की स्थापना हो रही है, जिससे यह आयोजन बिहार के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण बन गया है.
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