पिछोला झील ने बढ़ाया उदयपुर का मान, जब सूख गई तो खेला क्रिकेट, आज पेयजल व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्रोत
विश्व झील दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक पिछोला झील के इतिहास और महत्व के बारे में जानिए. कपिल पारीक की रिपोर्ट...

Published : August 27, 2026 at 10:44 AM IST
उदयपुर : झीलों की नगरी उदयपुर की पहचान सिर्फ उसके महलों और अरावली की पहाड़ियों से नहीं, बल्कि झीलों से भी है. झीलों ने ही सदियों से शहर के जीवन को आकार दिया है. इनमें पिछोला झील का स्थान सबसे खास है. अरावली की पहाड़ियों के बीच फैली यह झील आज देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है.
14वीं सदी में पड़ा झील की नींव का आधार : इतिहासकार चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि पिछोला झील का इतिहास करीब सात शताब्दी पुराना है. वर्ष 1362 में पिच्छू बंजारा नामक स्थानीय व्यक्ति ने बांध बनाकर इस जलाशय की शुरुआत की थी. माना जाता है कि झील का नाम इसके समीप स्थित पिछोली गांव के नाम पर पड़ा. इसका उद्देश्य पानी का संग्रह और आसपास के क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करना था. राणा लाखा तब मेवाड़ पर शासन करते थे.
पेयजल व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्रोत : उन्होंने बताया कि पिछोला का मूल स्वरूप 14वीं सदी में अस्तित्व में आया, लेकिन इसका वर्तमान स्वरूप कई शताब्दियों के विकास का परिणाम है. पूर्व महाराजा उदयसिंह द्वितीय ने झील को विस्तार दिया और इसी जलाशय के किनारे उदयपुर शहर को विकसित किया. पिछोला आज भी उदयपुर की पेयजल व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्रोत है. इस तरह पिछोला झील उदयपुर शहर की स्थापना और विकास की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई.

झील के बीच बसा राजसी संसार : इस खूबसूरत पिछोला झील के बीच स्थित जगनिवास और जगमंदिर इसकी खूबसूरती और ऐतिहासिक विरासत को खास बनाते हैं. जगनिवास में ताज लेक पैलेस होटल संचालित है, जबकि दूसरे द्वीप पर जगमंदिर पैलेस स्थित है. झील के पूर्वी किनारे पर सिटी पैलेस का विशाल परिसर है, जिसमें शिव निवास पैलेस और ताज फतेह प्रकाश पैलेस शामिल हैं. इसके अलावा झील के आसपास द लीला पैलेस उदयपुर समेत कई लग्जरी होटल और रिसॉर्ट हैं.
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पिछोला झील पर बोट संचालक दिलीप ने बताया कि प्रशासन को शाम तक बोटिंग का टाइम बढ़ाना चाहिए, क्योंकि देश दुनिया से पर्यटक उदयपुर की पिछोला झील को देखने आते हैं. इस झील ने अपनी ओर अनगिनत पर्यटकों को खींचा है. होटल एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि पिछोला झील पर्यटकों के साथ ही यहां के पर्यटन को भी बढ़ावा देती है. इस झील ने देश दुनिया में उदयपुर को विशेष पहचान दिलाई है.

डेस्टिनेशन वेडिंग ने बदली उदयपुर की पहचान : पर्यटन विभाग की संयुक्त निदेशक सुमिता सरोच ने बताया कि समय के साथ पिछोला सिर्फ ऐतिहासिक धरोहर नहीं रहा, बल्कि उदयपुर की डेस्टिनेशन वेडिंग इंडस्ट्री का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया. झील, महल, अरावली की पहाड़ियां और राजसी होटल शादी समारोहों के लिए ऐसा दृश्य तैयार करते हैं, जिसकी वजह से उदयपुर देश-विदेश में रॉयल वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर स्थापित हुआ. पिछोला झील के आसपास और ऐसे लग्जरी रिसॉर्ट भी इस वेडिंग इकोनॉमी का हिस्सा हैं.

अरावली की गोद में पर्यटकों की पहली पसंद : उन्होंने बताया कि पिछोला की सबसे बड़ी खासियत इसका प्राकृतिक और ऐतिहासिक मेल है. एक तरफ अरावली की पहाड़ियां, दूसरी तरफ महल और हवेलियां और बीच में शांत जलाशय. झील में महलों का प्रतिबिंब पर्यटकों के लिए खास अनुभव बनाता है. अब हर साल लाखों की संख्या में टूरिस्ट इस झील में बोटिंग करने के लिए आते हैं. इतना ही नहीं देश दुनिया के लोग डेस्टिनेशन वेडिंग और अन्य समारोह के लिए इस झील किनारे स्थित होटल को चुनते हैं.

जब सूख गई थी पूरी झील, खेला गया क्रिकेट : पिछोला ने पानी की कमी का दौर भी देखा है. 2005 के आसपास कम बारिश के कारण झील पूरी तरह सूखने की स्थिति में पहुंच गई थी. जिस पिछोला को आज पानी से लबालब देखकर पर्यटक रोमांचित होते हैं, कभी उसका तल लोगों के लिए मैदान बन गया था और वहां लोग क्रिकेट खेलते थे. आज तस्वीर बदल चुकी है. पिछोला से पानी पंप कर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए उदयपुर के पुराने शहर के 17 वार्डों को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है.

प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पिछोला : पिछोला सिर्फ पर्यटन और इतिहास का विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण है. कई प्रतियोगिता परीक्षा में पूछा गया कि पिछोला का निर्माण किसने करवाया था? हिंदी साहित्य में पिछोला का महत्व जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध रचना पेशोला की प्रतिध्वनि से और बढ़ जाता है. कविता में पिछोला के शांत जल में दिखाई देने वाले मेवाड़ के अतीत और महाराणा प्रताप के गौरव को आधार बनाया गया है. कविता का केंद्र केवल झील का प्राकृतिक सौंदर्य नहीं, बल्कि मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास और उसे फिर से जीवित करने की प्रेरणा है.



