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विश्व हिंदी दिवस स्पेशल: जयपुर से विदेशी दिलों तक हिंदी का सफर, पंकज खंडेलवाल बने हिंदी के 'दूत'

जयपुर के फ्रेंच टीचर पंकज खंडेलवाल पिछले 13 सालों से विदेशियों को हिंदी सिखा रहे हैं. 10 से ज्यादा देशों में उनके स्टूडेंट हैं.

WORLD HINDI DAY 2026
विदेशियों को हिंदी पढ़ाते हुए पंकज खंडेलवाल (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 10, 2026 at 6:35 AM IST

6 Min Read
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जयपुर: विश्व हिंदी दिवस के मौके पर जब हम हिंदी की वैश्विक पहुंच और उसके बढ़ते प्रभाव की बात करते हैं, तो जयपुर से एक ऐसी दिल छूने वाली कहानी सामने आती है जो बताती है कि भाषा सिर्फ बोलने-समझने का जरिया नहीं, बल्कि संस्कृति और दिलों को जोड़ने का मजबूत सेतु भी है. जयपुर के फ्रेंच भाषा शिक्षक पंकज खंडेलवाल ने हिंदी को विदेशियों तक पहुंचाने का जो जुनून दिखाया, वो सच में विश्व हिंदी दिवस की भावना को साकार करता है. फ्रांस से जापान, जर्मनी से लैटिन अमेरिका तक, उनकी ये यात्रा साबित करती है कि आज हिंदी सिर्फ भारत की नहीं, पूरी दुनिया की हो रही है.

250 से ज्यादा विदेशी छात्रों को सिखाई हिंदी: पंकज खंडेलवाल मूल रूप से फ्रेंच भाषा के टीचर हैं, लेकिन हिंदी सिखाना उनके लिए एक पैशन बन गया. सब कुछ शुरू हुआ एक सवाल से, जब हम विदेशी भाषाएं सीख सकते हैं, तो विदेशी हमारी भाषा क्यों नहीं सीख सकते? इसी सोच ने उन्हें हिंदी का शिक्षक बना दिया. पिछले 13 सालों में उन्होंने 250 से ज्यादा विदेशी छात्रों को हिंदी सिखाई है. ये सफर सिर्फ पढ़ाने का नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने का भी है.

जयपुर के शिक्षक पकंज विदेशी लोगों को हिंदी सिखा रहे हैं (ETV Bharat Jaipur)

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सबसे पहले डॉक्टर को सिखाई हिंदी: पंकज बताते हैं कि फ्रेंच सीखते वक्त उन्होंने देखा कि विदेशी अपनी भाषा पर कितना गर्व महसूस करते हैं. इससे उनके मन में हिंदी के लिए कुछ करने का विचार आया. शुरुआत हुई यूनेस्को से जुड़े एक डॉक्टर से, जो हिंदी सीखना चाहते थे. पंकज ने बिना फीस लिए उन्हें पढ़ाना शुरू किया. उनका मकसद पैसा नहीं, अनुभव कमाना था. डॉक्टर ने जिद की तो सिर्फ प्रतीकात्मक के तौर पर 100 रुपये लिए. यहीं से उनका हिंदी सिखाने का सफर शुरू हुआ और आज 10 से ज्यादा देशों के लोग उनसे जुड़े हैं. पंकज कहते हैं, "फ्रेंच ने ही मुझे अपनी हिंदी से सच्चा प्यार करना सिखाया."

फ्रांस से जापान तक फैला हिंदी का जादू: शुरू में पंकज ने फ्रांस से पढ़ाना शुरू किया, क्योंकि वहां उनकी अच्छी जान-पहचान थी. धीरे-धीरे उनके छात्र फ्रांस जापान, स्पेन, कोलंबिया, पेरू, यूके, जर्मनी और अर्जेंटीना जैसे देशों तक फैल गए. उनका मानना है कि पिछले कुछ सालों में विदेशियों का हिंदी के प्रति नजरिया पूरी तरह बदल गया है. पहले इसे कमतर समझा जाता था, लेकिन अब विदेशी इसे सीखकर गर्व महसूस करते हैं.

विश्व हिंदी दिवस 2026
पंकज खंडेलवाल 13 सालों से विदेशियों को हिंदी सिखा रहे हैं (ETV Bharat GFX)

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जयपुर की बड़ी भूमिका: पंकज कहते हैं कि विदेशियों के हिंदी सीखने की ललक में जयपुर की बड़ी भूमिका है. यहां टेक्सटाइल और ज्वेलरी का कारोबार करने के लिए कई देशों के लोग आते हैं. कई विदेशियों की शादी भी जयपुर में हुई है और ससुराल वालों से बात करने के लिए हिंदी जरूरी हो गई. इसके अलावा टूरिज्म भी विदेशियों के हिंदी सीखने का बड़ा कारण है. पंकज कहते हैं, "थोड़ी-सी स्थानीय भाषा आ जाए तो देश घूमना और रहना कितना आसान हो जाता है."'

कोरोना के बाद ऑनलाइन पहुंची हिंदी: पंकज ने बताया कि पहले वो सिर्फ ऑफलाइन क्लास लेते थे, लेकिन कोरोना ने सब बदल दिया, अब वे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से विदेशियों को हिंदी पढ़ाते हैं. कुछ छात्र उनके घर भी आकर सीखते हैं, तो कई अपने देश से जुड़ते हैं. एक छात्रा मेक्सिको से थीं, जहां 12-13 घंटे का टाइम डिफरेंस था. फिर भी टाइम निकालकर क्लास हुई. पंकज मुस्कुराते हुए कहते हैं, "अपनी भाषा के लिए जज्बा हो तो थकान कहां होती है."

विश्व हिंदी दिवस 2026
कोलंबिया की वेरोनिका और इटली की मायला जयपुर में ही रहती हैं (ETV Bharat Jaipur)

बॉलीवुड ने बनाया सीखना मजेदार: पंकज का कहना है कि उनका हिंदी सिखाने का तरीका अनोखा है. वे जीरो से शुरू करते हैं, जैसे बच्चे सीखते हैं, वर्णमाला से शब्दों तक. पंकज ने बताया कि वो हिंदी सिखाने के लिए क्लास में बॉलीवुड का तड़का भी लगाते हैं. फिल्मों के गाने, पॉपुलर डायलॉग्स का इस्तेमाल करते हैं, जिससे विदेशियों के लिए हिंदी सीखना और मजेदार हो जाता है.

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पंकज के विदेशी छात्र: उनकी छात्राओं की कहानियां दिल जीत लेती हैं. कोलंबिया की वेरोनिका भारतीय पति के साथ जयपुर में रहती हैं. वे कहती हैं, "भारत में रहने के लिए हिंदी जरूरी है. परिवार से बात हो या रोज की जिंदगी. हिंदी मुश्किल है, इंगलिश और स्पेनिश से अलग, लेकिन अच्छी लगती है, अब तो मेरे मुंह से खुद-ब-खुद 'ठीक है' निकल जाता है." उन्हें 'दिल धड़कने दो' और '3 इडियट्स' जैसी फिल्में पसंद हैं. इटली की फिजियोथेरेपिस्ट मायला पिछले पांच साल से जयपुर में रह रही हैं. उनका यहां क्लीनिक है, जहां ज्यादातर मरीज हिंदी बोलते हैं. डिलीवरी बॉय, मेड, वेंडर्स से बात के लिए हिंदी सीखी, अब वे बॉलीवुड गाने भी गुनगुनाती हैं.

विश्व हिंदी दिवस
कई विदेशी पंकज से हिंदी सीखने आते हैं (ETV Bharat Jaipur)

विदेशी जुबान पर 'नमस्ते' और 'ठीक है' की मिठास: पंकज का कहना है कि जब कोई विदेशी सहजता से 'नमस्ते' कहता है या 'ठीक है' बोलता है, तो लगता है हिंदी सिर्फ सीखी नहीं, दिल में उतर गई है. पंकज खंडेलवाल का ये सफर बताता है कि हिंदी अब विदेशी दिलों में नया घर बना रही है. विश्व हिंदी दिवस पर ऐसी कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि हमारी भाषा कितनी समृद्ध और आकर्षक है.

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