मधुमेह का बढ़ता खतरा: छोटे बच्चे भी आ रहे चपेट में, आयुर्वेद में छिपा है समाधान
भरतपुर में डायबिटीज के मरीजों की संख्या में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इसमें 3-4 साल के बच्चे भी शामिल हैं.

Published : November 14, 2025 at 6:33 AM IST
भरतपुर: आधुनिक जीवनशैली की चकाचौंध में फंसे भरतपुरवासी अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं. अनियमित दिनचर्या, फास्ट फूड की लत और व्यायाम की कमी ने मधुमेह (डायबिटीज) को महामारी की शक्ल दे दी है. जिले में डायबिटीज मरीजों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की चौंकाने वाली बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अब यह बीमारी बुजुर्गों या वयस्कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि तीन से चार साल के नन्हे बच्चों में भी शुगर की समस्या सामने आने लगी है. डॉक्टरों का मानना है कि अगर समय रहते जीवनशैली में बदलाव नहीं किया गया, तो यह बीमारी पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी पड़ सकती है.
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सीपी दीक्षित ने इस बढ़ते खतरे पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि मधुमेह अब जीवनशैली से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है. यह कोई लाइलाज रोग नहीं है, बल्कि हमारी गलत आदतों का नतीजा है. दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय दिनचर्या और खानपान में सुधार से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है. डॉ. दीक्षित ने आयुर्वेद के सिद्धांतों पर जोर देते हुए बताया कि प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति में इस बीमारी का स्थायी उपचार और बचाव दोनों मौजूद हैं.
इसे भी पढ़ें- डायबिटीज होने से पहले शरीर में दिखाई देते हैं ये छोटे-छोटे लक्षण
अस्पतालों में उमड़ रही मरीजों की भीड़: भरतपुर के राजकीय आयुर्वेदिक जिला चिकित्सालय, आरबीएम जिला अस्पताल और विभिन्न निजी क्लीनिकों में रोजाना दर्जनों मरीज शुगर टेस्ट और इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. डॉ. दीक्षित के अनुसार, इन मरीजों में हर आयु वर्ग के लोग शामिल हैं. सबसे दुखद है कि तीन-चार साल के छोटे बच्चे भी अब डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं. कई मामलों में बीमारी का पता तब चलता है, जब मरीजों में थकान, बार-बार पेशाब आना, आंखों में धुंधलापन, नसों की कमजोरी या घाव भरने में देरी जैसी जटिलताएं दिखाई देने लगती हैं.
डॉ. दीक्षित ने बताया कि कोविड के बाद लोगों की जीवनशैली और खानपान में आए बदलाव ने इस बढ़ोतरी को बढ़ावा दिया है. लॉकडाउन के दौरान घरों में बंद रहने, जंक फूड की बढ़ती खपत और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने ब्लड शुगर लेवल को अनियंत्रित कर दिया, अब स्थिति यह है कि युवा पीढ़ी भी इसकी शिकार हो रही है, और बच्चे तो मीठी चीजों, कोल्ड ड्रिंक्स और तली-भुनी खाद्य पदार्थों की आदत से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं.
दवाओं से परे का उपचार: आधुनिक मेडिकल साइंस जहां इंसुलिन और दवाओं पर निर्भर है, वहीं आयुर्वेद जीवनशैली सुधार को असली इलाज मानता है. डॉ. दीक्षित ने चिकित्सा शिविरों का हवाला देते हुए कहा कि जिन मरीजों ने आयुर्वेदिक सलाह मानकर खानपान और दिनचर्या में बदलाव किया, उन्होंने बिना किसी दवा के अपने शुगर स्तर को सामान्य रखा. उन्होंने कई सफल उदाहरण साझा किए जहां मरीजों ने केवल प्राकृतिक तरीकों से डायबिटीज को काबू में किया. उन्होंने बताया कि आमलकी (आंवला), हरिद्रा (हल्दी), गिलोय, गुड़मार, नीम, जामुन की गुठली, सदाबहार, मेथी, सौंफ और मिश्री अनाज (मल्टीग्रेन आटा) जैसी चीजें ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में बेहद प्रभावी हैं.
इसे भी पढ़ें- वर्ल्ड डायबिटीज डे : डाइट सबसे प्रभावी दवा, खान-पान में मामूली बदलाव से कंट्रोल होगा शुगर
दिनचर्या सुधार से रोकथाम: डॉ. दीक्षित ने जोर देकर कहा कि मधुमेह की असली दवा हमारी दिनचर्या है. आयुर्वेद के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त में सुबह 4 से 6 बजे के बीच उठकर गुनगुना पानी पिएं. इससे मेटाबॉलिज्म सक्रिय होता है. रोजाना 30-45 मिनट सूर्य नमस्कार, अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका और कपालभाती करें. ये इंसुलिन उत्पादन को संतुलित करते हैं. मौसम के अनुसार फल-सब्जियां खाएं. गर्मियों में ठंडी चीजें, सर्दियों में गर्म. बच्चों को कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट और फास्ट फूड से बचाएं. इसके बजाय फल, दही और घर का खाना दें. बच्चों को खेलकूद के लिए प्रेरित करें. वयस्क रोजाना टहलें या व्यायाम करें.
भरतपुर में डायबिटीज की बढ़ती संख्या एक चेतावनी है. डॉ. दीक्षित ने माता-पिता से विशेष अपील की कि वे बच्चों की आदतों पर नजर रखें. छोटी उम्र में ही सक्रियता और संतुलित आहार सिखाएं, ताकि डायबिटीज जैसी बीमारियां दूर रहें. डॉ. दीक्षित ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन से शिविरों और जागरूकता अभियानों की मांग की. उन्होंने कहा कि अगर लोग आयुर्वेद को अपनाएं, तो न केवल डायबिटीज नियंत्रित होगी, बल्कि हृदय रोग, मोटापा और अन्य जीवनशैली रोगों से भी बचाव होगा.
इसे भी पढ़ें- डायबिटीज के मरीजों के लिए कैसा होना चाहिए डाइट चार्ट? जानें क्या खाएं और क्या न खाएं

