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संघर्ष, साहस और सेवा का अनूठा नाम है चेतन शर्मा, अब तक 5000 दृष्टिबाधितों की राह कर चुके 'रोशन'

विश्व ब्रेल लिपि दिवस पर जानिए चेतन शर्मा की कहानी, जो अपने जैसे दृष्टिबाधितों के लिए उम्मीद बनकर आए हैं...

सामाजिक कार्यकर्ता चेतन शर्मा
सामाजिक कार्यकर्ता चेतन शर्मा (सौजन्य - चेतन शर्मा)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 4, 2026 at 6:33 AM IST

9 Min Read
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जयपुर : चेतन शर्मा जीवन संघर्ष, साहस और सेवा का ऐसा उदाहरण है, जो समाज के हर वर्ग को प्रेरणा देता है. बचपन में ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के कारण उन्होंने अपनी आंखों की दृष्टि खो दी, लेकिन इस शारीरिक बाधा को उन्होंने कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया. जहां अधिकांश लोग ऐसी परिस्थिति में हताश हो जाते हैं, वहीं चेतन शर्मा ने इसे अपनी ताकत बनाकर जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प लिया. उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि यदि आत्मबल और दृढ़ इच्छाशक्ति साथ हो तो दृष्टि का अभाव व्यक्ति की क्षमता को सीमित नहीं कर सकता. चेतन को जब लगा कि उनके जैसे हजारों-लाखों दृष्टिबाधित लोग हैं, जो जागरूकता और थोड़े से सहयोग के आभाव में अंधकार का जीवन जीने को मजबूर हैं तो उन्हें नौकरी छोड़ दी. अब वे इन लोगों के लिए उम्मीद बनकर उभरे हैं. विश्व ब्रेल लिपि दिवस पर पेश है चेतन शर्मा के जीवन और संघर्ष के साथ समाज सेवा पर ये खास रिपोर्ट

बचपन में ही छिन गई दृष्टि : चेतन शर्मा का जीवन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि शारीरिक अक्षमता कभी भी मानसिक और बौद्धिक क्षमता की सीमा नहीं बन सकती. बचपन में ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के कारण उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी. विपरीत परिस्थितियों को स्वीकार करने के बजाय चेतन शर्मा ने उन्हें अपनी ताकत बनाया. उन्होंने शिक्षा, नौकरी और समाज सेवा के क्षेत्र में ऐसी मिसाल कायम की, जो आज हजारों दृष्टिबाधितों के लिए प्रेरणा बन चुकी है. दृष्टिबाधित होने के बावजूद चेतन शर्मा की शैक्षणिक यात्रा असाधारण रही. उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती.

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शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन, पूरे राज्य में बनाई पहचान : दृष्टिबाधित होने के कारण चेतन शर्मा की शैक्षणिक उपलब्धियां असाधारण रही. चेतन शर्मा बताते हैं कि दृष्टिबाधित शिक्षा के प्रचार प्रसार में मीडिया की बड़ी भूमिका रही. उस दौर में अजमेर में दृष्टिबाधित स्कूल खुला ही था. न्यूज पेपर में खबर आई थी कि अब दृष्टिबाधित भी ले सकेंगे शिक्षा, पिताजी ने अखबार की खबर पढ़ कर अजमेर स्कूल में एडमिशन करा दिया. इसके बाद से शिक्षा के जरिए अपने जीवन के अंधियारे को खत्म करने का लक्ष्य बना लिया. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से दसवीं कक्षा की परीक्षा में पूरे राज्य में 90वां स्थान प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि परिश्रम और लगन के सामने कोई बाधा बड़ी नहीं होती. कॉलेज जीवन के दौरान उन्होंने केवल पढ़ाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अनेक शैक्षणिक और बौद्धिक प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी की. विशेष रूप से सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रतियोगिताओं में जीते गए पुरस्कार उनकी बौद्धिक क्षमता को दर्शाते हैं.

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साधारण पद से असाधारण मुकाम तक : शिक्षा के दौरान ही नहीं, बल्कि आगे चलकर भी चेतन शर्मा का प्रतियोगिताओं से गहरा जुड़ाव रहा. चेतन ने बताया कि सामान्य ज्ञान, वाद-विवाद और अन्य बौद्धिक गतिविधियों में भाग लेकर कई पुरस्कार अर्जित किए. यह दौर उनके आत्मविश्वास को और मजबूत करने वाला साबित हुआ, जिसने आगे के जीवन की नींव रखी. चेतन शर्मा ने अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत बैंक में हिंदी स्टेनो-टाइपिस्ट के रूप में की. यह एक प्रारंभिक पद था, लेकिन उनकी मेहनत, अनुशासन और कार्यकुशलता ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ाया. उन्होंने लिखित परीक्षाओं और साक्षात्कारों के माध्यम से चार पदोन्नति प्राप्त की और मुख्य प्रबंधक के पद तक पहुंचे. यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष की जीत थी, बल्कि यह संदेश भी था कि दृष्टिबाधित व्यक्ति भी उच्च जिम्मेदारियों को पूरी दक्षता के साथ निभा सकते हैं.

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दो साल की उम्र में गई थी आंखों की रोशनी (ETV Bharat Jaipur)

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समाज के लिए समर्पण: समय से पहले सेवानिवृत्ति : वर्ष 2019 में चेतन शर्मा ने एक ऐसा निर्णय लिया, जो उनके जीवन की दिशा ही बदल गया. उन्होंने बैंक से 9 वर्ष पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली. चेतन बताते हैं कि उद्देश्य स्पष्ट था कि जिन कठिनाइयों का सामना उन्हें जीवन में करना पड़ा, वह भविष्य में किसी और दृष्टिबाधित को न करना पड़े. पैसे कमाने का कोई अंत नहीं है. ऐसे कई मेरे दृष्टिबाधित भाइयों को देखता था, जिन्हें जागरूकता के साथ थोड़े से सहयोग की जरूरत थी. चीफ मैनेजर के पद की नौकरी छोड़ उन्होंने 'उद्धव विजन फाउंडेशन' की स्थापना की. यह संस्था आज दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए आशा की किरण बन चुकी है. अब तक 5000 से दृष्टिबाधितों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जा चुका है. चेतन बताते हैं कि संस्था में प्रमुख रूप से ब्रेल लिपि के माध्यम से शिक्षा, रोजगार उन्मुख प्रशिक्षण, स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल लिटरेसी, कंप्यूटर प्रशिक्षण दी जाती है. इसके लिए किसी को भी किस तरह का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं देना पड़ता. यहां पर सब कुछ बिलकुल निःशुल्क है.

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उद्धव विजन फाउंडेशन में ये व्यवस्थाएं (ETV Bharat GFX)

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केबीसी में भी दिखाई प्रतिभा : चेतन शर्मा की प्रतिभा का एक रोचक उदाहरण तब देखने को मिला, जब वे प्रसिद्ध टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में फोन-ए-फ्रेंड के रूप में शामिल हुए. उन्होंने बिना विकल्प सुने ही सही उत्तर देकर अपने साथी की मदद की, जिससे दर्शक और आयोजक दोनों प्रभावित हुए. चेतन शर्मा केवल वक्ता और प्रशिक्षक ही नहीं, बल्कि लेखक भी हैं. उन्होंने दृष्टिबाधितों के लिए कंप्यूटर प्रयोग पर एक पुस्तक लिखी. यह पुस्तक डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसके लिए वर्ष 2016 में राजस्थान सरकार की ओर से उन्हें दिव्यांगजनों के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

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ब्रेल लिपि बनी ब्रह्मास्त्र : दृष्टिबाधित चेतन शर्मा के लिए ब्रेल लिपि किसी ब्रह्मास्त्र से कम नहीं साबित हुई. दृष्टि न होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई और आत्मनिर्भरता के रास्ते में कभी हार नहीं मानी. ब्रेल के माध्यम से उन्होंने अक्षरों, शब्दों और ज्ञान की दुनिया को समझा और अपनी मेहनत से आगे बढ़ते गए. शुरुआती चुनौतियों के बाद ब्रेल ने उन्हें सीखने की आजादी दी और आत्मविश्वास बढ़ाया. आज चेतन शर्मा जिस मुकाम पर हैं, वह उनकी लगन, निरंतर अभ्यास और ब्रेल लिपि के सही उपयोग का परिणाम है. चेतन शर्मा बताते हैं कि दुनिया खूबसूरत है, लेकिन इसे देखने और समझने का मौका हर किसी को नहीं मिलता. देश दुनिया में लाखों लोग है जो देख नहीं सकते.

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संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व भर में 39 मिलियन लोग देख नहीं सकते. आज से 200 साल से भी पहले इन्ही लोगों के अंधेरे जीवन में उजियारा भरा था लुई ब्रेल ने. लुई ब्रेल ने ब्रेल लिपि का आविष्कार किया था. लुई की ब्रेल लिपि आज लाखों दृष्टिबाधितों को दुनिया देखने के साथ अपनी सफलता को हासिल करने का माध्यम बन रही है. ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है. चेतन बताते हैं कि इस दिवस को मनाने का उद्देश्य ब्रेल के महत्व के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाना, दृष्टिबाधित लोगों को प्रोत्साहित करने के साथ उनके अधिकार प्रदान करना और साथ ही ब्रेल लिपि को बढ़ावा देना है. आधुनिकता के साथ अब ब्रेल लिपि के साथ कई और भी तकनीकी के माध्यम आ गए हैं, जो दृष्टिबाधितों के काम आ रहे हैं. इसमें ऑडियो सिस्टम, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर जैसे माध्यम हैं.

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ब्रेल दिवस का इतिहास : चेतन शर्मा बताते हैं कि 'ब्रेल' शब्द का नाम लुई ब्रेल के नाम पर रखा गया था. लुई ब्रेल एक फ्रांसीसी व्यक्ति थे, जिनकी एक हादसे में बचपन में ही आंखों की रोशनी चली गई थी. लुई का जन्म 4 जनवरी 1809 को फ्रांस के कूपवरे में हुआ था. लुई ने महज 15 वर्ष की आयु में इस लिपि का आविष्कार किया. इस लिपि को एक विशेष प्रकार के उभरे हुए कागज पर लिखा जाता है और इसमें उभरे हुए बिंदुओं के माध्यम से उंगलियां से छूकर पढ़ा जा सकता है. ब्रेल में उभरे हुए बिंदुओं को 'सेल' के नाम से जाना जाता है. ब्रेल ने अपना काम पूरा किया, छह डॉट्स वाले कोशिकाओं पर आधारित एक कोड विकसित किया, जिससे एक उंगलियों के लिए पूरे सेल यूनिट को एक स्पर्श के साथ महसूस करना संभव हो गया. एक सेल से अगले तक तेजी से आगे बढ़ गया. 1852 में उनका निधन हो गया, लेकिन लुई की बनाई हुई ब्रेल लिपि आज दृष्टिबाधितों के लिए वरदान बन गई है, आज वो कुछ भी कर पाए हैं उसके पीछे ब्रेल शिक्षा का सबसे बड़ा योगदान है.