उम्र 70 पार, लेकिन जोश बरकरार, चंडीगढ़ के सीनियर साइक्लिस्ट बने फिटनेस की मिसाल, युवाओं को दे रहे खास मैसेज
विश्व साइकिल दिवस पर चंडीगढ़ के 70 वर्ष से अधिक उम्र के साइक्लिस्टों ने फिटनेस, अनुशासन और सक्रियता का संदेश दिया.

Published : June 3, 2026 at 11:37 AM IST
|Updated : June 3, 2026 at 1:45 PM IST
चंडीगढ़: आज विश्व साइकिल दिवस है. विश्व साइकिल दिवस के मौके पर चंडीगढ़ और ट्राइसिटी के कई वरिष्ठ नागरिक यह साबित कर रहे हैं कि फिटनेस की कोई उम्र नहीं होती. जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग आरामदायक जीवनशैली अपनाने लगते हैं, वहीं 70 वर्ष से अधिक आयु के ये साइक्लिस्ट आज भी नियमित रूप से साइकिल चलाकर खुद को फिट रख रहे हैं. उनका उद्देश्य केवल अपनी सेहत बनाए रखना नहीं, बल्कि युवाओं को भी सक्रिय और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है.
फिटनेस का सरल मंत्र: इन वरिष्ठ साइक्लिस्टों का मानना है कि स्वस्थ रहने के लिए महंगे जिम या अत्याधुनिक उपकरणों की जरूरत नहीं होती. नियमित शारीरिक गतिविधि और अनुशासित दिनचर्या ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है. पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और लद्दाख जैसे राज्यों में लंबी दूरी की साइकिल यात्राएं कर चुके ये साइक्लिस्ट समाज को यह संदेश दे रहे हैं कि सक्रिय जीवनशैली ही बेहतर स्वास्थ्य का आधार है.

उमलिंग ला तक पहुंचने वाले सुरजीत सिंह ढींढसा: चंडीगढ़ के 76 वर्षीय सुरजीत सिंह ढींढसा भारतीय नौसेना और मर्चेंट नेवी में सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल रोड उमलिंग ला तक साइकिल चलाकर अपनी अलग पहचान बनाई है. कठिन मौसम, कम ऑक्सीजन और चुनौतीपूर्ण पहाड़ी रास्तों के बावजूद उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल किया. ढींढसा कहते हैं कि, "कोविड के बाद से मैंने साइकिलिंग शुरू की. साइकिलिंग ने मुझे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा है. उम्र चाहे जितनी भी हो, यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो हर चुनौती को पार किया जा सकता है." खास बात तो यह है कि हाल ही में उनको चोट लगी थी, बावजूद वो साइकिलिंग करते रहते हैं. उनका मानना है कि हमेशा एक्टिव रहने वाला ही फीट रहता है.
तनावमुक्त जीवन का आसान तरीका: वहीं, श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज, सेक्टर-26 से रिटायर्ड एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ केमिस्ट्री प्रोफेसर सरबजीत सिंह भट्टी (72) आज भी नियमित रूप से साइकिल चलाते हैं. उनका मानना है कि साइकिलिंग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का प्रभावी माध्यम भी है. भट्टी कहते हैं कि, "साइकिलिंग शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ तनाव को दूर करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने का सबसे आसान तरीका है."
अनुशासन और स्वास्थ्य का संगम: पंजाब मार्कफेड से स्टोरेज एंड प्रिजर्वेशन एक्सपर्ट के पद से सेवानिवृत्त सुनील कोहली (72+) वर्षों से साइक्लिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए हुए हैं. उनका कहना है कि, "रोजाना साइकिल चलाने से शरीर फिट रहता है और जीवन में अनुशासन भी बना रहता है. यह आदत व्यक्ति को लंबे समय तक सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखती है."
युवाओं के लिए प्रेरणा: आज जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, तब चंडीगढ़ के ये वरिष्ठ साइक्लिस्ट समाज को एक सकारात्मक संदेश दे रहे हैं. सुबह के समय शहर की चौड़ी सड़कों और साइक्लिंग ट्रैक पर उनकी मौजूदगी यह साबित करती है कि स्वस्थ रहने के लिए उम्र नहीं, बल्कि संकल्प और निरंतरता जरूरी है. विश्व साइकिल दिवस पर इन साइक्लिस्टों का संदेश स्पष्ट है कि स्वस्थ रहना है तो सक्रिय रहना जरूरी है और साइकिल इसका सबसे सरल व प्रभावी माध्यम है.
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