विश्व एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस दिवस: युवाओं में बढ़ रहा है रीढ़ की हड्डी का ये गंभीर खतरा, जानें लक्षण और बचाव के उपाय
हर साल मई का पहला शनिवार दुनिया भर में 'विश्व एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस दिवस' के रूप में मनाया जाता है.

Published : May 2, 2026 at 10:45 AM IST
जयपुर : मई के पहले शनिवार को 'विश्व एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस दिवस' पर वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजीत बागड़ा ने युवाओं को रीढ़ की हड्डी की इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी है. हर साल मई के पहले शनिवार को विश्व एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस गंभीर रीढ़ संबंधी बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है. एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस एक लम्बे समय तक सूजन वाली बीमारी है, जो रीढ़ और कूल्हों के जोड़ों को प्रभावित करती है. समय के साथ यह बीमारी रीढ़ की हड्डियों को आपस में जोड़ सकती है, जिससे शरीर का लचीलापन कम हो जाता है और व्यक्ति झुकने लगता है.
वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजीत बागड़ा के अनुसार, एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस (AS) केवल साधारण कमर दर्द नहीं है, बल्कि यह एक ऑटोइम्यून स्थिति है जो रीढ़ और कूल्हों के जोड़ों को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती है. डॉक्टर अजीत बागड़ा का कहना है कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द, सुबह के समय जकड़न और लंबे समय तक बैठने के बाद परेशानी बढ़ना शामिल है. अक्सर लोग इन लक्षणों को सामान्य कमर दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले सकती है. डॉ. बागड़ा का कहना है कि युवा अवस्था में लोग इस बीमारी की चपेट में आते है लेकिन सामान्य कमर दर्द समझ का नज़रअंदाज कर देते है.
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युवाओं और पुरुषों को अधिक खतरा : डॉ. बागड़ा बताते हैं कि इस बीमारी की सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह मुख्य रूप से युवाओं को अपनी चपेट में लेती है. आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह समस्या अधिक देखी जाती है. अक्सर युवा कमर दर्द को जिम की थकान या ऑफिस में ज्यादा बैठने का कारण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में रीढ़ की हड्डियों के आपस में जुड़ने (फ्यूजन) का कारण बन जाता है. इससे शरीर का लचीलापन खत्म हो जाता है और व्यक्ति आगे की ओर झुकने लगता है.

बीमारी के प्रमुख लक्षण : डॉ. बागड़ा का कहना है कि यदि समय पर बीमारी के लक्षणों को पहचाना लिया जाए तो इस बीमारी को समय रहते रोका जा सकता है. यदि कमर दर्द तीन महीने से अधिक समय तक बना रहे, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए. समय पर जांच और सही इलाज से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है. इलाज में दवाओं के साथ-साथ नियमित व्यायाम और फिजियोथेरेपी की अहम भूमिका होती है.

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क्या यह लाइलाज है? : डॉ. बागड़ा के अनुसार, यह सच है कि इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज (Cure) नहीं है, लेकिन इसे पूरी तरह 'नियंत्रित' किया जा सकता है. केवल पेन किलर लेना इसका समाधान नहीं है. आधुनिक चिकित्सा में अब बायोलॉजिकल थेरेपी उपलब्ध है, जो बीमारी के बढ़ते प्रभाव को रोक सकती है. सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह और जीवनशैली में बदलाव से मरीज एक सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकता है. डॉ. बागड़ा का कहना है कि जागरूकता, सही जीवनशैली और समय पर उपचार से एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस के मरीज भी सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं.


