वन मंत्री शर्मा बोले- एमपी की तर्ज पर राजस्थान की चंबल नदी क्षेत्र में भी होगा घड़ियाल संरक्षण का कार्य
राजस्थान, मध्य प्रदेश के मॉडल पर चंबल नदी में घड़ियाल संरक्षण को बढ़ावा देगा. वन मंत्री शर्मा ने एक समन्वित संरक्षण अभियान की घोषणा की.

Published : October 28, 2025 at 3:45 PM IST
अलवर: राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि जिस तरह मध्यप्रदेश में चंबल नदी पर वैज्ञानिक पद्धति से घड़ियालों के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य किया जा रहा है, उसी तर्ज पर राजस्थान में भी चंबल नदी के तटीय क्षेत्रों में घड़ियाल संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे. इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक नीति एवं कार्ययोजना तैयार करेगी, जिससे इस लुप्तप्राय प्रजाति का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके.
वन मंत्री शर्मा ने यह बात सोमवार को मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के देवरी स्थित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य घड़ियाल पालन केंद्र का अवलोकन के दौरान कही. इस अवसर पर उन्होंने अभयारण्य में चल रहे घड़ियाल संरक्षण एवं कृत्रिम प्रजनन कार्यक्रमों की जानकारी ली. वन मंत्री संजय शर्मा ने अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि घड़ियाल नदी पारिस्थितिकी का अभिन्न अंग हैं और जलजीव विविधता के संरक्षण में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि राजस्थान में चंबल नदी के तटीय क्षेत्रों में घड़ियाल संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने बताया कि राजस्थान की सीमा से गुजरने वाली चंबल नदी घड़ियालों का प्रमुख प्राकृतिक आवास है, इसलिए राज्य के हिस्से में भी इनके संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों, वन विभाग और विशेषज्ञ संस्थानों की सहभागिता से एक समन्वित संरक्षण अभियान चलाया जाएगा.
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उन्होंने कहा कि घड़ियाल संरक्षण केवल एक पर्यावरणीय कार्य नहीं है, बल्कि यह नदी की स्वच्छता, जैव विविधता और पर्यटन संवर्धन से भी जुड़ा हुआ है. राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य घड़ियाल पालन केंद्र के अवलोकन के दौरान वन अधिकारियों ने वन मंत्री शर्मा को घड़ियालों के कृत्रिम प्रजनन की प्रक्रिया के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य घड़ियाल पालन केंद्र देश का प्रमुख संरक्षण केंद्र है, जहां चंबल नदी के घाटों से एकत्र किए गए घड़ियाल अंडों को सुरक्षित इनक्यूबेटर में रखा जाता है. अंडों से बच्चे निकलने के बाद उनका लगभग तीन वर्ष तक पालन-पोषण किया जाता है. इस अवधि में उनकी सेहत, वृद्धि एवं व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है. इसके बाद जब घड़ियाल पर्याप्त रूप से विकसित हो जाते हैं, तो उन्हें पुनः प्राकृतिक आवास यानी चंबल नदी में छोड़ दिया जाता है, जिससे वे वहां स्वाभाविक रूप से जीवन व्यतीत कर सकें.
अब तक इस केंद्र से हजारों घड़ियालों को सफलतापूर्वक नदी में छोड़ा जा चुका है, जिससे चंबल में इनकी संख्या में सकारात्मक वृद्धि हुई है. वन मंत्री शर्मा ने केंद्र की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि राजस्थान में भी इस मॉडल को अपनाते हुए चंबल नदी क्षेत्र में घड़ियाल संरक्षण एवं पुनर्वास परियोजना को गति दी जाएगी, जिससे आगामी वर्षों में यह नदी घड़ियालों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में जानी जाए.

