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100 रु की मजदूरी से 80 लाख का टर्नओवर, महिलाओं के लिए प्रेरणा है मीनाक्षी की कहानी

संकोच से आत्मविश्वास तक, गुना की एक महिला ने बदली समाज की सोच, 18 महीने में 80 लाख का टर्नओवर

Meenakshi farakte story
18 महीने में 80 लाख का टर्नओवर (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : March 2, 2026 at 9:29 PM IST

3 Min Read
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रिपोर्ट : विश्वास चतुर्वेदी

भोपाल : गुना जिले के बमोरी विकासखंड में रहने वाली मीनाक्षी फराकटे ने कभी सोचा भी नहीं था कि 100 रु से मजदूरी का सफर कभी उन्हें 80 लाख के टर्नओवर तक पहुंचा देगा. आज 100 महिलाओं की टीम का नेतृत्व करने वाली मीनाक्षी ने अपने जीवन की शुरुआत 100 रु प्रतिदिन की मजदूरी से की थी, उस समय उनके पति की कृषि आय करीब 50 हजार रु सालाना थी और चार सदस्यों के परिवार का भरण पोषण भी मुश्किल से हो पाता था.

स्वयं सहायता समूह से मिली नई दिशा

मीनाक्षी ने बताया कि साल 2006 में मध्याह्न भोजन योजना में रसोइया का कार्य मिलने से उनकी मासिक आय 1,500 रुपये हुई. यही वह मोड़ था, जहां से आत्मनिर्भरता की राह खुली. मीनाक्षी के अनुसार स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर उन्होंने गाय खरीदी और दूध विक्रय शुरू किया. इसके बाद डे-NRLM मिशन के अंतर्गत वस्त्र निर्माण इकाई में दर्जी के रूप में काम किया और मेहनत के दम पर सुपरवाइजर बनीं. अब तक उनका वेतन करीब 9 हजार रु हो गया था.

महिलाओं के लिए प्रेरणा है मीनाक्षी की कहानी (Etv Bharat)

महिला होने के कारण लोगों को नहीं था भरोसा

मीनाक्षी ने बताया, '' साल 2024 में उन्नत एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट में सेंटर मैनेजर बनने का अवसर मिला. शुरुआत में संकोच और आत्म-संदेह था. महिला उद्यमी होने के कारण सामाजिक पूर्वाग्रहों का सामना भी करना पड़ा. लेकिन व्यवसायिक प्रशिक्षण और अपने दृढ़ संकल्प से चुनौतियों को अवसर में बदल दिया. आज मैं 100 महिलाओं के समूह के साथ मिलकर तुअर दाल, चना दाल, बेसन, हल्दी, मिर्ची और धनिया जैसे छह उत्पादों का उत्पादन और मार्केटिंग कर रही हूं.''

18 महीने में 80 लाख का टर्नओवर

मीनाक्षी बताती हैं, '' 18 महीने में यूनिट का टर्नओवर 80 लाख रु पहुंच चुका है. समूह की महिलाएं घर-घर जाकर बिक्री करती हैं, सरकारी योजनाओं जैसे मध्याह्न भोजन और सांझा चूल्हा में सप्लाई करती हैं और स्थानीय वेंडर्स और होटलों को उत्पाद उपलब्ध कराती हैं. शुरुआत में वेंडर्स का सवाल होता था कि महिला होकर बिक्री कैसे करेंगी, लेकिन लगातार प्रयासों से आज 100 से अधिक दुकानदार स्वयं आर्डर देते हैं.''

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5 हजार से 25 हजार तक बढ़ी आय

मीनाक्षी ने बताया कि पहले जहां उनकी आय 5,000 रुपये थी, वहीं अब वे 25,000 रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं. उनका कहना है, '' बड़े मॉल शहरों में हो सकते हैं, लेकिन गांव में भरोसा और गुणवत्ता ही असली ताकत है.'' मीनाक्षी के अनुसार एक समय उनको परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल था, लेकिन आज स्व सहायता समूह के कारण उनका परिवार आर्थिक रुप से भी आत्मनिर्भर बना है.