बिहार में गंगा के रौद्र रूप से सहमे लोग, महिलाओं ने गीत गाकर मांगी रहम की गुहार
राघोपुर के नरकटिया बांध पर बैठकर गंगा मैया से गांव बचाने की प्रार्थना, कटाव से कई घर नदी में समाए. भागलपुर से अमरजीत की रिपोर्ट.

Published : September 2, 2026 at 2:09 PM IST
भागलपुर : बिहार के भागलपुर में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज कटाव ने दियारा क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोगों की चिंता बढ़ा दी है. नवगछिया अनुमंडल के राघोपुर इलाके में गंगा का रौद्र रूप देख ग्रामीण सहमे हुए हैं. इस बीच नरकटिया बांध पर बाढ़ पीड़ित महिलाओं ने अनोखे तरीके से गंगा मैया से गांव और परिवारों को बचाने की गुहार लगाई.
महिलाएं कर रही प्रार्थनाएं
महिलाएं बांध पर एक साथ बैठकर पारंपरिक गीत गाती नजर आईं. उनका कहना था कि गंगा उनके लिए सिर्फ नदी नहीं, बल्कि मां हैं और संकट की इस घड़ी में वे अपनी आस्था के सहारे मां से रहम की प्रार्थना कर रही हैं. प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को घर खाली करने के लिए भी कहा गया है.
'हे मैया.. तोरा प्रणाम'
वीडियो में महिलाएं एक साथ बैठकर 'हे मैया, हे गंगा मैया, तोरा प्रणाम' जैसे पारंपरिक गीत गाते हुए गंगा मैया को मनाती दिखाई दे रही हैं. महिलाओं की प्रार्थना में एक तरफ धार्मिक आस्था नजर आई, तो दूसरी तरफ बाढ़ और कटाव से पैदा हुआ डर और बेबसी भी साफ दिखाई दी.
आशियाना बचाने की चुनौती
दरअसल, राघोपुर के नरकटिया बांध पर इन दिनों गंगा का तेज बहाव लगातार कटाव कर रहा है. नदी की धारा बांध के किनारे की जमीन को तेजी से काट रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार, कटाव की वजह से कई घर पहले ही नदी में समा चुके हैं. अब बांध के आसपास रहने वाले हजारों परिवारों के सामने अपना आशियाना बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है.

''गंगा का पानी लगातार बढ़ रहा है और कटाव से लोगों के सामने रहने का संकट पैदा हो गया है. वर्षों से जिस जगह घर बनाकर रह रहे थे, अब वही जमीन नदी की धारा में कट रही है. गंगा मैया से प्रार्थना करते हुए कहा कि नदी शांत हो जाए और लोगों के घर-परिवार सुरक्षित रहें.''- संगीता देवी, बाढ़ पीड़िता
''गंगा का कटाव देखकर पूरा गांव डरा हुआ है. महिलाओं ने गंगा मैया से प्रार्थना इसलिए की है, क्योंकि हमारे लिए गंगा मां के समान हैं. अगर कटाव इसी तरह जारी रहा तो बड़ी संख्या में परिवारों को अपना घर छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ेगा. बच्चों और परिवार के साथ कहां जाएंगे, इसकी चिंता हर किसी को सता रही है.''- सोनम देवी, बाढ़ पीड़िता

पहले से जुड़ी है आस्था
दरअसल, पुरानी पीढ़ियों से गंगा के प्रति लोगों में गहरी आस्था रही है. ग्रामीण प्रकृति की ताकत को समझते थे और संकट के समय पूजा-पाठ और प्रार्थना के जरिए उससे शांति की कामना करते थे. आज भी बाढ़ और कटाव के संकट में वही परंपरा लोगों को मानसिक सहारा दे रही है.
लगातार हो रही निगरानी
इधर, प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें कटाव निरोधक कार्य में जुटी हैं. बांध को बचाने के लिए आवश्यक संसाधन और मशीनरी लगाई गई है. विभागीय टीमें संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी कर रही हैं और सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं.

भागलपुर के शंकरपुर इलाके में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज कटाव ने परेशानी बढ़ा दी है. रेलवे लाइन के समीप स्थित करीब सौ वर्ष पुराने चैती दुर्गा मंदिर और बजरंगबली मंदिर गंगा की तेज धारा में समा चुके हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले कई दिनों से जमीन लगातार नदी की ओर खिसक रही थी और कटाव की रफ्तार बढ़ती जा रही थी. फिलहाल राघोपुर के नरकटिया बांध पर गंगा का रौद्र रूप ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है.
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