अलवर में सुरक्षित नहीं महिलाएं! हर साल बढ़ रहे अत्याचार, पॉक्सो प्रकरणों में भी कमी नहीं
अलवर में महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है. देखिए आंकड़े...

Published : February 26, 2026 at 1:37 PM IST
अलवर : महिला अत्याचार के मामले में अलवर जिले की हालत चिंताजनक है. कारण है कि पिछले 6 साल में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में दुष्कर्म, पॉक्सो सहित अन्य महिला अत्याचार के 11 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं. पुलिस में दर्ज होने वाले आपराधिक प्रकरणों में महिला अत्याचार के मामलों में हर साल बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, महिला अत्याचार के करीब आधे मामले पुलिस जांच में झूठे निकलना कुछ राहत देने वाला जरूर है. पुलिस की ओर से महिला अत्याचार के मामलों की जांच के बाद एफआर लगाने की कार्रवाई की गई है, लेकिन दुष्कर्म व पॉक्सो के दर्ज होने वाले मामलों में ज्यादा कमी नहीं आ पाना चिंता का बड़ा कारण है.
अलवर एनसीआर का प्रमुख जिला है और हरियाणा से सटा हुआ है. इसके अलावा मेवात भी अलवर जिले का हिस्सा है. इस कारण अलवर जिले में अपराध का ग्राफ अन्य जिलों से ऊंचा ही रहा है. इसी तरह महिला अत्याचार के मामलों में अलवर जिला प्रदेश में आगे रहा है. अलवर जिले में वर्ष 2020 से 25 तक महिला अत्याचार के 11,338 मामले दर्ज हुए हैं. वहीं, दुष्कर्म के 1100 से ज्यादा मामले पुलिस थानों में दर्ज हुए हैं. इसके अलावा पॉक्सो के 475 मामले दर्ज हुए हैं. जिले के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज महिलाओं पर अत्याचार के दर्ज मामलों की संख्या भयावह हालत को बयां करती है.
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पुलिस जांच में आधे मामलों में लग रही एफआर : जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज महिला अत्याचार, दुष्कर्म व पॉक्सो के मामलों की पुलिस की ओर से की जा रही जांच में करीब आधे मामले झूठे पाए गए हैं. वर्ष 2020 से 2025 के बीच जिले में महिलाओं पर होने वाले विभिन्न अपराधों में दर्ज 11 हजार से ज्यादा मामलों में से करीब 5627 मामलों में पुलिस ने एफआर लगाई है. कारण है कि इन मामलों की पुलिस की ओर से जांच की गई, जिनमें ये मामले झूठे पाए गए, लेकिन अलवर जिले में हर साल महिला अत्याचार के औसतन दो हजार मामले दर्ज होना भयावह स्थिति को दर्शाते हैं. वहीं, हर साल करीब एक हजार मामले झूठे निकलना राहत की बात है.

महिला अत्याचार के मामले सबसे ज्यादा : अलवर जिले में महिलाओं पर होने वाले अपराध में सबसे ज्यादा महिला अत्याचार के मामले दर्ज हो रहे हैं. पुराने संयुक्त अलवर जिले में हर साल औसतन दो हजार महिला अत्याचार के मामले दर्ज हुए, वहीं नया अलवर जिला बनने के बाद यहां हर साल महिला अपराध की संख्या औसतन डेढ़ हजार को पार कर रही है. जिले में दूसरे पायदान पर दुष्कर्म के औसतन हर साल 200 मामले दर्ज हो रहे हैं. वहीं, हर साल पॉक्सो के 50 से ज्यादा मामले दर्ज हो रहे हैं.
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आपसी रंजिश में कानून का दुरुपयोग भी : अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शरण कांबले ने बताया कि अलवर जिले में महिलाओं के खिलाफ हर साल दर्ज होने वाले मामलों की संख्या बढ़ने का एक कारण आपसी रंजिश में महिला अत्याचार के झूठे मामलों का सहारा लेने की प्रवृति होना भी है. आपसी रंजिश में लोग एक-दूसरे को फंसाने के लिए महिला अत्याचार को एक शस्त्र के रूप में उपयोग में करते हैं. यही कारण है कि पुलिस की जांच में इनमें से करीब आधे मामले झूठे निकलते हैं और पुलिस को इनमें एफआर लगानी पड़ती है.

महिला अत्याचार मामलों की जांच में पुलिस संवेदनशील : अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शरण कांबले ने बताया कि अलवर जिले में पुलिस महिला अत्याचार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर संवेदनशील है. पुलिस महिलाओं पर होने वाले मामलों को प्राथमिकता से दर्ज कर गहनता से जांच करती है. इसी कारण पुलिस जांच में महिला अत्याचार, दुष्कर्म व पॉक्सो के करीब आधे मामले झूठे पाए गए हैं, जिससे उन मामलों में एफआर लगाई गई है.


