उत्तराखंड में होलिका दहन की तैयारी, महिलाएं कर रहीं पूजा अर्चना, जानें क्या है शुभ मुहूर्त
हरिद्वार के लक्सर में महिलाएं कर रहीं दहन से पहले होली की पूजा. बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है होलिका दहन.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : March 2, 2026 at 1:59 PM IST
लक्सर: देशभर के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड के कोने-कोने में आज होली की धूम मची है. ज्यादातर महिलाएं सज संवरकर बच्चों के साथ होलिका पूजन कर रही हैं. पारंपरिक रीति रिवाज के अनुसार पूजन के बाद होलिका दहन किया जाता है. मान्यता है कि होली से पहले होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. होलिका दहन के दौरान भक्त प्रह्लाद की जय, होलिका माता की जय और नरसिंह भगवान की जय के उद्घोष कर लोग एक दूसरे को होली की बधाई देते हैं.
हरिद्वार के लक्सर के मुख्य बाजार में भी सालों से होली पूजन का विशेष प्रबंध किया जाता रहा है. यहां नगर के सभी लोग पूजन करने के लिए आते हैं. क्षेत्र में होलिका पूजन का विशेष महत्व है. होलिका पूजन के अंतर्गत समाजिक संगठन लकड़ी इकट्ठी करके मोहल्लों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाते हैं. यहां सभी महिलाएं विधि-विधान से होलिका पूजन करती हैं. होली पूजन के बाद निर्धारित समय पर होलिका दहन किया जाता है.
शास्त्रों के अनुसार, मान्यता है कि पुत्र प्रह्लाद की भक्ति से परेशान होकर पिता हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से प्रह्लाद को मारने के लिए कहा था. कहा जाता है कि होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसको आग जला नहीं सकती. इसी वरदान के कारण होलिका भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर लकड़ियों के ढेर पर बैठ गईं. लेकिन भक्त प्रह्लाद का श्रीहरि में अटूट विश्वास था. इसलिए प्रह्लाद को आंच तक नहीं आई और होलिका जलकर राख हो गईं. इसी होलिका की राख से प्रह्लाद ने पहली होली खेली थी.

वहीं, होलिका पूजन करने आई महिलाओं ने कहा कि, होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है. इसीलिए सभी महिलाएं होली पूजन करती हैं. अपने परिवार में अपने बच्चों की दीर्घायु के लिए होलिका मैया से प्रार्थना करती हैं. होली का पर्व एक-दूसरे की गलतियों को भुलाकर आपसी भाईचारे और प्रेम सौहार्द का पर्व है.

वहीं इस बार होली पर ग्रहण होने के कारण लक्सर के श्रीराम मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित दिनेश व्यास ने बताया कि होकी का शुभ मुहूर्त आज 2 मार्च को है. 2 मार्च को होली पूजन होगा. क्योंकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण है और जिसका सूतक 9 घंटे पहले लगता है. ग्रहण का समय 3 मार्च में दोपहर बाद 3.15 से शाम 6: 47 बजे तक रहेगा. जिसके कारण होली का पूजन 2 मार्च में किया जाएगा और होली का दहन 3 मार्च को ग्रहण समाप्ति के बाद होगा और आप चाहे तो 3 मार्च को शाम के ग्रहण के बाद होली पूजन भी कर सकते हैं और 4 मार्च में रंग भरी होली मनाई जाएगी.

नोट: होलिका दहन को लेकर ज्योतिषीय गणना के अनुसार कई ज्योतिषियों के अपने-अपने मत हैं. ये होलिका दहन से संबंधित जानकारी भी लक्सर के पंडित दिनेश व्यास द्वारा अपनी ज्योतिषीय गणना अनुसार दी गई है.
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