हरियाणा में राजा जरासंध के किले पर चप्पलें और पत्थर मारती हैं महिलाएं, जानिए क्या है इतिहास
राजा जरासंध एक क्रूर शासक था. उसके क्रूरता की कई कहानिंया हैं. इसी में से एक चप्पलें और पत्थर मारने की कहानी है.

Published : November 7, 2025 at 1:49 PM IST
यमुनानगरः हरियाणा के यमुनानगर के पास कपाल मोचन मेले में राजा जरासंध से संबंधित एक प्राचीन किले का टीला है, जिसे लोग मिट्टी में तब्दील हुई महल की निशानी मानते हैं. यहां एक अनोखी परंपरा है. यहां के लोग श्राप के कारण इस टीले पर जूते और पत्थर बरसाते हैं, जो राजा जरासंध के अत्याचारों का प्रतीक माना जाता है.
नवविवाहिता ने दिया था जरासंध को श्रापः यह स्थान कपाल मोचन से लगभग 5 किलोमीटर दूर संधाए गांव में स्थित है. इस परंपरा का कारण यह है कि स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, राजा जरासंध एक क्रूर शासक था और वह नवविवाहित दुल्हनों की पालकी लूट लेता था और दुल्हन को एक रात के लिए अपने पास रखता था. एक बार, एक नवविवाहिता ने उससे बचने के लिए तालाब में कूदने से पहले उसे श्राप दिया था कि उसका किला मिट्टी में मिल जाएगा और उस पर जूते और पत्थर बरसाए जाएंगे. इस टीले के कारण ही गांव का नाम संधाय पड़ा है.
जरासंध को दिया था विनाश का श्रापः पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक द्वापर युग में जरासंध नामक राजा हुआ करता था जो नवविवाहिता की पालकी को लूटने का काम करता था और उनके साथ क्रूरता करता था. उसने जब नवविवाहिता की डोली कब्जे में ली तो उस नवविवाहिता ने उससे स्नान करने की अनुमति मांगी. जब वो स्नान करने के लिए नदी में उतरी तो जरासंध को विनाश का श्राप दे दिया और खुद के प्राण त्याग दिए, जिसे आज भी सती के रूप में पूजा जाता है. कहा जाता है कि उसके बाद जरासंध का विनाश शुरू हो गया और उसका किला टीले में तब्दील हो गया.
कई श्रद्धालु हर साल यहां आते हैं चप्पल मारनेः कुछ श्रद्धालु तो इस बात से अनजान है कि इसके पीछे की वजह क्या है वह केवल देखा देखी में ही यहां चप्पलें और पत्थर मारते हैं. लेकिन कुछ बुजुर्गों ने इसका पूरा इतिहास बताया. पंजाब से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि "वह कपालमोचन तीर्थ पर मौजूद तीनों सरोवरों में स्नान के साथ-साथ इस जगह पर पत्थर मारने हर साल जरुर आते हैं." बता दें कि सदियों से विलुप्त सरस्वती नदी जरासंध के किले के पास ही बहती थी. माना जाता है कि वह पवित्र नवविवाहिता उसी नदी में सती हुई थी.

