ग्रामोत्थान परियोजना से बदली ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी, बेकरी उद्यम से कर रहीं आर्थिकी मजबूत
टिहरी गढ़वाल की महिलाएं ग्रामोत्थान परियोजना से बेकरी के काम से पैसे कमा रही हैं. साथ ही परिवार को आर्थिक मजबूत भी कर रही हैं.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 20, 2026 at 5:59 PM IST
टिहरी गढ़वाल: विकासखंड थौलधार के ग्राम भैंस कोटि की महिलाओं ने मेहनत, समूह की एकजुटता और सरकारी सहयोग के दम पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है. कभी घर-गृहस्थी, खेती और पशुपालन तक सीमित रहने वाली सात महिलाएं आज बेकरी उद्यम चला रही हैं और हर महीने हजारों रुपए की आमदनी कर रही हैं. ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से शुरू हुआ यह उद्यम अब न सिर्फ इन महिलाओं के परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहा है.
यह कहानी है टिहरी गढ़वाल के थौलधार विकासखंड के ग्राम भैंस कोटि की. यहां राजेश्वरी सकलानी, गीता भट्ट, आशा देवी, रजनी, अनीता, विशिला देवी और शकुंतला देवी ने मिलकर अपने लिए रोजगार का नया रास्ता तैयार किया है. ये सभी महिलाएं दिव्य ग्राम संगठन से जुड़ी हैं, जिसके अंतर्गत शिवालय स्वयं सहायता समूह, संतोषी समूह और लक्ष्मी समूह संचालित किए जा रहे हैं.
जनवरी 2026 में इन महिलाओं ने ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से बेकरी उद्यम की शुरुआत की. उद्यम सर्वेक्षण के दौरान दिव्य ग्राम संगठन का चयन किया गया. इसके बाद परियोजना टीम ने भौतिक सत्यापन किया और महिलाओं को बेकरी व्यवसाय स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई. इस पूरे उद्यम को खड़ा करने में कुल 10 लाख रुपए की लागत आई. इसमें ग्रामोत्थान परियोजना की ओर से 6 लाख रुपए की सहायता राशि दी गई, जबकि 3 लाख रुपए का बैंक ऋण लिया गया और 1 लाख रुपए महिलाओं ने अपने स्तर से अंशदान के रूप में जुटाए. इसी आर्थिक सहयोग से बेकरी की मशीनें, उपकरण और अन्य जरूरी संसाधन खरीदे गए.
बेकरी शुरू होने के बाद महिलाओं ने सिर्फ पारंपरिक उत्पादों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि स्थानीय पसंद और पहाड़ी उत्पादों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तरह के खाद्य उत्पाद तैयार करने शुरू किए. इनमें मंडुवा बिस्किट, आटा बिस्किट, मशरूम बिस्किट, फैन, बन, ब्रेड और केक प्रमुख हैं.
इन उत्पादों की मांग अब भैंसकोटी गांव तक सीमित नहीं है. थौलधार, कमांद, कांडीखाल और टिहरी के बाजारों में भी मांग के अनुसार, इन उत्पादों की बिक्री की जा रही है. स्थानीय बाजार में तैयार होने वाले इन उत्पादों को ग्राहकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है, जिससे महिलाओं का उत्साह भी बढ़ा है.
सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इस छोटे से ग्रामीण उद्यम से महिलाओं को हर महीने करीब 50 से 60 हजार रुपए की आय हो रही है. इसमें लगभग 30 से 40 हजार रुपए तक का शुद्ध लाभ बताया गया है. यानी जिस काम को कभी केवल घरेलू जिम्मेदारी समझा जाता था, उसी क्षेत्र की महिलाएं अब व्यवसाय चलाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं.
पहले हमारा जीवन घर के काम, खेती और पशुपालन तक ही सीमित था. ग्रामोत्थान परियोजना से सहयोग मिला तो हमने बेकरी का काम शुरू किया. आज हम खुद उत्पाद तैयार करते हैं, बाजार की मांग देखते हैं और बिक्री भी करते हैं. इससे हमें आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिला है'.
-राजेश्वरी सकलानी, उद्यमी महिला-
भैंसकोटी की महिलाओं का कहना है कि, इस उद्यम ने उनके भीतर आत्मविश्वास भी पैदा किया है. अब वे केवल परिवार की आय पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि खुद व्यवसाय का संचालन कर रही हैं. उत्पादन से लेकर बाजार तक की प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भूमिका है.
महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिला प्रशासन और ग्रामोत्थान परियोजना की टीम का आभार जताया है. उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं से मिला सहयोग अगर सही मार्गदर्शन और मेहनत के साथ जोड़ा जाए तो गांव में रहते हुए भी रोजगार के बेहतर अवसर पैदा किए जा सकते हैं.
ग्रामोत्थान परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय संसाधनों और उनकी क्षमता के अनुरूप स्वरोजगार से जोड़ना है. भैंसकोटी की महिलाओं का यह उद्यम इसी दिशा में एक अच्छा उदाहरण है.
-ज्योति, प्रभारी परियोजना निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण-
परियोजना अधिकारियों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे और स्वयं सहायता समूहों को चिह्नित किया जा रहा है, जिन्हें स्थानीय संसाधनों और उनकी रुचि के आधार पर उद्यम से जोड़ा जा सके. इसके लिए उद्यम स्थापना, वित्तीय सहयोग, प्रशिक्षण और आजीविका संवर्धन से संबंधित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है.
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