भागलपुर की महिलाओं की अनूठी पहल, फूलों और सब्जियों से बनायीं प्राकृतिक गुलाल
भागलपुर की महिलाओं ने सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक होली मनाने की पहल की है. महिलाएं फूलों और सब्जियों से प्राकृतिक गुलाल तैयार कर रही हैं.

Published : March 3, 2026 at 4:53 PM IST
रिपोर्टर: अंजनी कुमार कश्यप
भागलपुर: देशभर मे कल होली का त्योहर मनाया जाएगा. जिसे लेकर बाजार भी रंग-बिरंगे रंगों से सज चुके हैं, लेकिन बाजार में बिकने वाले केमिकल युक्त रंगों ने इस त्योहार की रंगत को थोड़ा डरावना कर दिया है. केमिकल वाले रंगों से होने वाली एलर्जी और त्वचा रोगों के डर से कई लोग होली खेलने से कतराने लगे हैं.
इस समस्या को देखते हुए बिहार के भागलपुर की महिलाओं ने केमिकल वाले रंगों को करारा जवाब देते हुए गेंदे के फूलों और चुकंदर से 'सुरक्षित गुलाल' तैयार किया है. जो न सिर्फ त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बना रहा है.
भागलपुर की महिलाओं की अनूठी पहल : उद्यमी महिला प्रिया सोनी के नेतृत्व में, महिलाओं की एक टीम इस बार होली को सुरक्षित और सेहतमंद बनाने के मिशन में जुट गई हैं. इन महिलाओं ने प्रकृति को ही अपना रंगरेज बना लिया है. पलाश और गेंदा के मनमोहक फूलों के साथ-साथ चुकंदर, हल्दी और पालक जैसी सब्जियों का इस्तेमाल कर शुद्ध प्राकृतिक गुलाल तैयार किया जा रहा है. इन रंगों की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इनमें 1 प्रतिशत भी केमिकल नहीं है. ये रंग आपकी त्वचा और आंखों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि इनका स्पर्श फूलों जैसा मुलायम है.

''बाजार में बिकने वाले सस्ते और चमकीले रंग कई बार स्किन इन्फेक्शन और एलर्जी का कारण बनते हैं. ऐसे में हम पलाश, गेंदा, चुकंदर, पालक और हल्दी का इस्तेमाल कर रहे हैं. ये पूरी तरह केमिकल फ्री हैं. लोग अब जागरूक हो रहे हैं, प्राकृतिक गुलाल की मांग बढ़ रही है. सबसे अच्छी बात ये है कि इससे महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है.''- प्रिया सोनी, उद्यमी महिला

महिलाओं को मिल रहा रोजगार : प्रिया सोनी और उनकी टीम की यह पहल सिर्फ होली को सुरक्षित ही नहीं बना रही है, बल्कि यह महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक नया और मजबूत जरिया भी बन गई है. बाजार में अब इन प्राकृतिक रंगों की भारी डिमांड है, जिससे इन महिलाओं को आर्थिक आजादी मिल रही है. यह कहना गलत नहीं होगा कि भागलपुर में इस बार की होली सिर्फ रंगों की नहीं, बल्कि सेहत, जागरूकता और महिला सशक्तिकरण की भी होगी.

समूह बनाकर रंग तैयार कर रही महिलाएं : महिलाएं समूह बनाकर रंग तैयार कर रही हैं और स्थानीय स्तर पर इसकी बिक्री भी शुरू हो गई है. धीरे-धीरे प्राकृतिक गुलाल की मांग बढ़ रही है और लोग केमिकल रंगों से दूरी बना रहे हैं. प्राकृतिक रंगों की यह पहल भागलपुर में जागरूकता का नया संदेश दे रही है. कहा जा सकता है कि इस बार जिले में होली सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि सेहत और स्वावलंबन का भी उत्सव बनेगी.

किन चीजों से तैयार हो रहा हर्बल गुलाल? : अरोमाथेरेपी वाले हर्बल गुलाल को तैयार करने में गुलाब, लैवेंडर, चंदन और केवड़ा जैसे फूलों के प्राकृतिक सुगंध का इस्तेमाल किया गया है. केमिकल फ्री इस गुलाल को खासकर बच्चों और बुजुर्गों की त्वचा को धान में रखते हुए बनाया गया है. प्रिया सोनी ने बताया कि इस होली में अरोमाथेरेपी वाले गुलाल को लगाने से आपको सुकून और ताजगी का अनुभव होगा. वहीं अगर गलती से यह आपके मुंह के अंदर भी चला गया तो उससे कोई नुकसान नहीं होगा.
स्किन पर लगे रंग को छुड़ाते समय किस तरह की गलतियां नहीं करनी चाहिए? : चेहरे का रंग छुड़ाते समय स्किन को जोर से न रगड़ें. इससे जलन और रैशेज हो सकते हैं. हार्श साबुन, डिटर्जेंट या केमिकल वाले प्रोडक्ट बिल्कुल न लगाएं. अगर स्किन पर रेडनेस, खुजली या सूजन दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. साथ ही कुछ बातों का खास ख्याल रखें, नीचे दिए ग्राफिक में देखिए-

भागलपुर की इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि अगर प्रकृति के साथ मिलकर त्योहार मनाया जाए, तो उसकी मिठास और खुशियां दोगुनी हो जाती हैं. इनके द्वारा तैयार किया गया यह हर्बल गुलाल ना सिर्फ आपकी त्वचा की हिफाजत करेगा, बल्कि इन महिलाओं के घरों में भी आर्थिक खुशहाली के रंग भरेगा.
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