पलामू के नक्सल इलाके की महिलाएं हाइटेक तरीके से कर रही मुर्गी पालन, अंडे के कारोबार से हर महीने हो रही इतनी कमाई
पलामू में हाइटेक तरीके से मुर्गी पालन और अंडा का कारोबार कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं.

Published : April 24, 2026 at 4:10 PM IST
पलामूः जिले के ग्रामीण इलाकों में हाइटेक तरीके से मुर्गी का पालन हो रहा है. अंडे का कारोबार कर महिलाएं सशक्त हो रही हैं और अपना परिवार चला रही हैं. कई महिलाएं मुर्गी पालन और अंडे के कारोबार से हर महीने 10 से 15 हजार की कमाई कर रही हैं.
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी ने पलामू में 19 इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर को तैयार किया है. इसी क्लस्टर से महिलाएं जुड़ी हुईं हैं. मुर्गी पालन के लिए कुल 38 यूनिट बनाए गए हैं. जेएसएलपीएस की ओर से एक-एक यूनिट की स्थापना के लिए महिलाओं को 1.8 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है. पलामू के नक्सल प्रभावित क्षेत्र मनातू समेत कई इलाकों में महिलाएं मुर्गी का पालन कर रही हैं और उससे निकलने वाले अंडे को स्थानीय बाजार में बेच रही हैं. अंडे के कारोबार से जुड़ने वाली अधिकतर महिलाएं नक्सल इलाके की हैं.
हाईटेक तरीके से मुर्गी का पालन, दी गई थी ट्रेनिंग
मुर्गी पालन के लिए एक स्पेशल शेड तैयार किया गया है. जिसे लेयर बर्ड यूनिट नाम दिया गया है. लेयर बर्ड यूनिट में 100 के करीब मुर्गियां रखी जा सकती हैं. जो प्रतिदिन एक अंडे का उत्पादन करती हैं. मुर्गी के रख-रखाव और अंडे के उत्पादन के लिए वैज्ञानिक तरीका अपनाया गया है. मुर्गियों के लिए स्पेशल डायट तैयार किया गया है. उन्हें समय-समय पर वैक्सीन भी दी जाती है. एक मुर्गी से करीब दो वर्षों तक अंडे देती है. पलामू के मनातू का इलाका लेयर बोर्ड यूनिट और हाईटेक तरीके से मुर्गी पालन के लिए चर्चित हुआ है. यूनिट लगाने के लिए महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई थी और सभी को बोकारो के इलाके का भ्रमण करवाया गया था.

इस संबंध में जेएसएलपीएस की बीपीएम कुमारी नम्रता बताती हैं कि “महिलाएं 2017 से ही जुड़ी हुई हैं. इन्हें मुर्गी पालन से जोड़ा गया है. पूरी तरह से साइंटिफिक तरीके से अंडे का उत्पादन किया जाता है.”
केस स्टडी
2023 में पलामू के मनातू थाना क्षेत्र में भाजपा एसटी मोर्चा के अध्यक्ष प्रमोद सिंह की हत्या हुई थी. प्रमोद सिंह की पत्नी बैजंती देवी लेयर बर्ड यूनिट के माध्यम स मुर्गी का पालन कर रही हैं और अंडे के कारोबार से जुड़ी हैं. हर महीने बैजंती देवी को 10 से 15 हजार रुपये की आमदनी हो रही है. बैजंती बताती हैं कि उनकी जैसी कई महिलाएं मुर्गी पालन से जुड़ी हुई हैं, जो लेयर बर्ड यूनिट के माध्यम से अंडे का उत्पादन कर रही हैं. अंडे को स्थानीय बाजार में ही खपाया जा रहा है. जेएसएलपीएस के माध्यम से उन्हें सहायता मिली थी.

IFC से जुड़ी 5000 महिलाएं, 400 से अधिक मुर्गी पालन से
पलामू में इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर से 5000 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जबकि 400 से अधिक महिलाएं मुर्गी पालन और अन्य पशुपालन जैसी गतिविधि से जुड़ी हुई हैं. इंटीग्रेटेड फॉर्मिंग से जुड़ी महिलाओं को झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के माध्यम से ऋण भी उपलब्ध करवाया जा रहा है और उन्हें ट्रेनिंग भी दी जा रही है. अफीम की खेती से प्रभावित इलाकों में भी बड़ी संख्या में महिलाएं मुर्गी पालन से जुड़ गई हैं. झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी मुर्गी पालन को लेकर महिलाओं को प्रोत्साहित भी कर रही है.
वहीं इस संबंध में जेएसएलपीएस की पलामू डीपीएम अनीता केरकेट्टा बताती हैं कि “महिलाओं को इंटीग्रेटेड फार्मिंग के लिए प्रोत्साहित किया गया है और बड़ी संख्या में महिलाएं इससे जुड़कर अंडे का उत्पादन कर रही हैं.”
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