महिला दिवस 2026: माउंट एवरेस्ट फतह करने निकलेंगी छत्तीसगढ़ की अमिता श्रीवास, कई ऊंची चोटियों पर लहराया परचम
महिला दिवस पर एक साहसी महिला की कहानी जो इसी महीने अपनी मंजिल माउंट एवरेस्ट फतह करने निकलेगी. कहा- सपने देखो तो एक्शन भी लो.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : March 1, 2026 at 6:29 PM IST
|Updated : March 1, 2026 at 8:14 PM IST
जांजगीर-चांपा: जिले की चांपा नगर में रहने वाली अमिता श्रीवास अब माउंट एवरेस्ट फतह करने की तैयारी में हैं. पेशे से अमिता आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, लेकिन उनके सपने बहुत बड़े हैं. सीमित संसाधनों और साधारण परिवार से आने के बावजूद उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने का लक्ष्य तय किया है. अब वह इस सपने को सच करने के लिए कड़ी मेहनत और विशेष ट्रेनिंग ले रही हैं.
बड़ी चोटियों पर लहरा चुकी हैं परचम
अमिता पहले ही कई ऊंची चोटियों को फतह कर चुकी हैं. उन्होंने लद्दाख स्थित यूटी कांगरी (6,070 मीटर) और कांग यात्से (6,250 मीटर) पर सफल चढ़ाई की है. इन उपलब्धियों के साथ वह छत्तीसगढ़ की तीसरी माउंटेनियर बन चुकी हैं. इन अभियानों ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया और अब उनका लक्ष्य है माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहराना.

संघर्ष से शिखर तक का सफर
अमिता चांपा नगर के वार्ड नंबर 4 में अपने परिवार के साथ रहती हैं. उनके पिता बुजुर्ग हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं रही, लेकिन अमिता ने कभी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. घर की दीवारों पर सजे मेडल और प्रमाण पत्र उनकी मेहनत की कहानी खुद बयान करते हैं. उन्होंने 2018 से पर्वतारोहण की दिशा में कदम बढ़ाया. इसके लिए उन्होंने माउंट आबू से बेसिक और एडवांस कोर्स किया. ट्रेनिंग के दौरान सिक्किम में 5,500 मीटर की ऊंचाई तक चढ़ाई की. जिसके बाद कई ऊंची चोटियों पर चढ़ाई की.

एवरेस्ट के लिए खास तैयारी
माउंट एवरेस्ट पर ऑक्सीजन की मात्रा सामान्य से काफी कम, लगभग 33 प्रतिशत ही होती है. ऐसे में अमिता योग, प्राणायाम और अनुलोम-विलोम के जरिए सांसों को नियंत्रित करने की प्रैक्टिस कर रही हैं. साथ ही रोज 10 किलोमीटर दौड़ लगाती हैं और वेटलिफ्टिंग भी करती हैं ताकि ऊंचाई पर जरूरी सामान खुद उठा सकें. करीब 9 वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद अब वह मार्च महीने में एवरेस्ट अभियान के लिए रवाना होने वाली हैं.

जिला प्रशासन का सहयोग
अमिता को जिला प्रशासन की ओर से आर्थिक सहायता भी मिल रही है. प्रशासन ने उनके हौसले को सराहा और पर्वतारोहण अभियानों में मदद की है. अमिता का कहना है कि वह एवरेस्ट फतह कर अपने जिले और प्रदेश का नाम रोशन करना चाहती हैं.

महिलाओं के लिए संदेश
अमिता कहती हैं कि सपने देखना कभी मत छोड़िए. अगर लक्ष्य तय कर लिया है तो पूरी मेहनत और एकाग्रता से उसे हासिल करने में जुट जाइए. उनका मानना है कि कोई भी लक्ष्य छोटा या बड़ा नहीं होता, बस इरादे मजबूत होने चाहिए.
सपने बड़े-छोटे नहीं होते लेकिन सपना देखा है तो उसके लिए एक्शन लेना होगा, बिना एक्शन के सपना पूरा नहीं होगा- अमिता श्रीवास, पर्वतारोही
अमिता श्रीवास आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखती हैं. ETV भारत भी ऐसी महिलाओं के जज्बे को सलाम करता है जो दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं.

