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रांची सदर अस्पताल में बड़ी चिकित्सकीय सफलता, सर्जरी से निकाली गई 1.45 किलो की विशाल तिल्ली

रांची सदर अस्पताल में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से 1.45 किलो की विशाल तिल्ली सफलतापूर्वक निकाली गई. मरीज को नया जीवन मिला.

SADAR HOSPITAL RANCHI
डॉक्टर के साथ मरीज और उनके परिजन (ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : June 30, 2026 at 3:15 PM IST

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Updated : June 30, 2026 at 3:23 PM IST

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रांची: सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का एक और उदाहरण सामने आया है. रांची सदर अस्पताल के सर्जरी विभाग ने एक जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है. जिसमें बुंडू प्रखंड के आनेडीह गांव की रहने वाली सुलोचना देवी की 1.45 किलोग्राम वजनी विशाल तिल्ली (स्प्लीन) को लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक निकाल दिया. ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और अब मरीज स्वस्थ होकर घर लौट रही हैं. खास बात यह है कि यह पूरा इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया.

लंबे समय से पेट दर्द से जूझ रही थी मरीज

सुलोचना देवी पिछले कई वर्षों से लगातार पेट दर्द, पेट में भारीपन और अत्यधिक कमजोरी की समस्या से परेशान थी. बीमारी के कारण उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया था. परिवार ने कई अस्पतालों और चिकित्सकों से इलाज कराया, लेकिन बीमारी का सही कारण सामने नहीं आ सका. कुछ अस्पतालों में जांच के दौरान चिकित्सकों ने खून की गंभीर बीमारी और कैंसर जैसी आशंका भी जताई, जिससे पूरा परिवार मानसिक तनाव में आ गया था.

जानकारी देते सिविल सर्जन और सर्जन (ईटीवी भारत)

गरीब परिवार के लिए इलाज बन गया था चुनौती

मरीज के पति मृत्युंजय महतो एक छोटा किसान है. सीमित आय के कारण बेहतर इलाज कराना परिवार के लिए आसान नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने पत्नी की इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर लगाए. आर्थिक परेशानियों के बीच परिवार लगातार इस उम्मीद में था कि बीमारी का सही कारण पता चल सके और पत्नी को राहत मिले.

सदर अस्पताल में गंभीर बीमारी हुई डिटेक्ट

आखिरकार मरीज ने रांची सदर अस्पताल के सर्जरी विभाग में परामर्श लिया. यहां चिकित्सकों ने विस्तृत जांच कराई तो पता चला कि मरीज की तिल्ली सामान्य से कई गुना बड़ी हो चुकी है. साथ ही उनके शरीर में खून की भी भारी कमी थी. उनका हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 5 ग्राम प्रति डेसीलीटर के आसपास था. कई बार रक्त चढ़ाने के बावजूद कुछ ही दिनों में हीमोग्लोबिन दोबारा घट जाता था. जिससे चिकित्सकों को गंभीर बीमारी की आशंका हुई.

एमआरआई रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात

रिम्स में कराई गई एमआरआई जांच में मरीज की तिल्ली का आकार लगभग 26×16 सेंटीमीटर पाया गया, जो सामान्य आकार से कई गुना बड़ा था. मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों से भी सलाह ली. विशेषज्ञों ने तिल्ली निकालने और उसके ऊतकों की बायोप्सी कराने की सलाह दी, ताकि बीमारी की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सके.

लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सफल रहा ऑपरेशन

15 जून 2026 को रांची सदर अस्पताल के सर्जरी विभाग ने आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक की मदद से मरीज का ऑपरेशन किया. इतनी बड़ी तिल्ली का दूरबीन विधि से ऑपरेशन करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है. लेकिन चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक सर्जरी पूरी की. ऑपरेशन के बाद निकाली गई तिल्ली का वजन 1.45 किलोग्राम पाया गया. ऑपरेशन के बाद उसका आकार 18×16 सेंटीमीटर मापा गया.

ऑपरेशन के बाद तेजी से सुधरी मरीज की सेहत

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिला. उनका हीमोग्लोबिन स्तर बढ़कर 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया, जो पहले की तुलना में दोगुने से भी अधिक है. चिकित्सकों के अनुसार मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.

आयुष्मान योजना बना सहारा

इस जटिल ऑपरेशन और इलाज का पूरा खर्च आयुष्मान भारत योजना के तहत वहन किया गया. यदि यही ऑपरेशन किसी निजी अस्पताल में कराया जाता, तो मरीज के परिवार को लाखों रुपये खर्च करने पड़ सकते थे. ऐसे में आयुष्मान योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुई.

इन चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने निभाई भूमिका

इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व सर्जन डॉ अजीत कुमार ने किया. ऑपरेशन टीम में एनेस्थेटिस्ट डॉ वसुधा, डॉ प्रवीण, सिस्टर-इन-चार्ज नेली, ओटी असिस्टेंट संदीप, संतोष, सृष्टि, सरिता, संजू सहित समस्त ऑपरेशन थिएटर की टीम शामिल रही. सभी ने समंवय के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई, जिसके कारण जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हो सकी.

सिविल सर्जन और उपाधीक्षक ने टीम को दी बधाई

इस सफल ऑपरेशन पर रांची के सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार और सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ बिमलेश सिंह ने पूरी चिकित्सकीय टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की बदौलत लगातार जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं. उन्होंने मरीज के स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना करते हुए पूरी टीम के कार्य की सराहना की.

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Last Updated : June 30, 2026 at 3:23 PM IST