पिता की मौत के बाद मां ने कर ली दूसरी शादी, जर्जर गौशाला में पशुओं के साथ रहने को मजबूर 'अनाथ' बच्चे
चंबा के सुदूर इलाके में चार बेसहारा बच्चे सरकार से लगा रहे मदद की गुहार.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 18, 2025 at 9:04 PM IST
चंबा: "मेरे पिता जी की मौत 31 मई 2022 में हुई थी. घर की परस्थितियां ठीक नहीं थी, इसलिए मैंने 10वीं पास करके पढ़ाई छोड़ दी है. छोटा भाई बाहर काम करता है, मेरे दो और छोटे भाई बहन स्कूल में पढ़ाई करते हैं और..." दिल को झकझोर देने वाले बयान उस असहाय, अनाथ लड़की (निशा) के हैं जो चंबा जिले के सुदूर इलाके में एक टूटे-फूटे कमरे में रहने को मजबूर है. निशा की जिंदगी में इतना बड़ा तूफान कैसे और क्यों आया, आखिर ऐसा क्या हुआ कि अब उसे सरकार से मदद की दरकार है. निशा ने जो कुछ बताया है, उससे सुनने के लिए भी हिम्मत चाहिए...
'घर में चूल्हा जल सके इसलिए 15 साल का भाई बाहर करता है काम'
चंबा जिले के ग्राम पंचायत भजोत्रा के मटवाड़ गांव से एक दिल को झकझोर कर रख देने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां चार नाबालिग मासूम बच्चे ऐसे हैं, जिनका बचपन हालातों की भेंट चढ़ गया. बचपन में ही पिता का साया उठ गया. पिता की मौत के बाद मां ने दूसरी शादी कर ली और वह भी घर छोड़कर चली गई.
निशा ने बताया कि, "हम चार भाई-बहन इस घर में रहते हैं. यहीं पे खेती-बाड़ी करते हैं. मेरा छोटा भाई बाहर काम करने गया है, ताकि परिवार का गुजर-बसर हो सके. खेती के काम और भाई जो थोड़ा-बहुत पैसा भेजता है उससे किसी तरह से हमारा गुजारा हो जाता है. छोटी बहन छठी कक्षा में पढ़ाई करती है और मेरा सबसे छोटा भाई तीसरी कक्षा में पढ़ाई करता है. मैंने 10 पास करके पढ़ाई छोड़ दी है."
सरकार से मदद की दरकार
निशा का कहना है कि, सरकार की ओर से अभी तक घर के लिए कुछ नहीं मिला. हमारी सरकार से गुहार है कि हमें रहने के लिए घर दे दे, घर के अलावा और जितना भी संभव हो सरकार हमारी मदद करें. हमारे भाई-बहन स्कूल में पढ़ाई करते हैं, इसलिए जितना भी हो सके सरकार उनकी भी मदद करे.

आज इन मासूमों के पास न माता-पिता का सहारा है, न सिर पर पक्की छत और न ही भविष्य की कोई सुरक्षा. घर की सबसे बड़ी लड़की निशा जो 17 वर्ष की है, उसको अपने छोटे भाई बहनों के पालन पोषण के लिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी. वह भी आगे पढ़ना चाहती थी, लेकिन हालात के आगे सपनों ने घुटने टेक दिए. हालांकि, सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद प्रशासन इन बच्चों की सुध लेने के लिए पहुंचा है.
मदद में कहां आ रही परेशानी?
एसडीएम सलूणी चंद्रवीर सिंह बताया कि आखिर निशा की मदद में प्रशासन को कहां परेशानी पेश आ रही है. एसडीएम ने बताया कि, "BDO साहब से बात हो गई है, सबसे पहले मनरेगा में गौशाला जो प्रमिशेबल एक्टिविटी है, उसे पास कराएंगे. इसमें थोड़ी से परेशानी ये रही है कि इसमें जो सबसे बड़ी बच्ची है, वो 18 साल की नहीं हुई है. वह कुछ ही दिनों में 18 साल की होने वाली है. 18 साल की उम्र होते ही उसके नाम का जॉब कार्ड बन जाएगा, उसके नाम की सैंक्शन अलाऊ होने शुरू हो जाएगी. अगर वो काम करना चाहेगी तो वह खुद ही मनरेगा में काम कर पाएगी, और 320 रुपए दिहाड़ी कमा पाएगी. उसकी मदद करने में हम एक महीने लेट हो रहे हैं."
SDM ने दिए ये आदेश
मामला सामने आने के बाद सलूणी के एसडीएम चंद्रवीर सिंह खुद अपनी टीम के साथ कठिन रास्ता तय करते हुए प्रभावित परिवार के पास पहुंचे. और हर संभव मदद का उन्हें आश्वासन दिया. इसके साथ ही चंद्रवीर सिंह ने कहा कि, इन बच्चों को सुख आश्रय योजना में जोड़ा गया है. उन्होंने कहा कि चूंकि बच्चे लंबे समय से एक ही कमरे में पशुओं के साथ रह रहे हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर बीएमओ को इन सभी बच्चों को मेडिकल कराने के निर्देश दिए हैं. बच्चों के घर के लिए GEO टैगिंग के लिए भी आदेश दिए गए हैं. इसके अलावा दोनों बच्चियों को 'वात्सल्य योजना' से भी जोड़ने की तैयारी की जा रही है, ताकि उनकी आर्थिकी धीरे-धीरे सुदृढ़ हो सके.

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