यूपी में नसबंदी के 1.5 साल बाद महिला ने दिया बच्चे को जन्म, सरकार से बोली-कैसे पालूं, खर्च दो...
जिले में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही आई सामने, परेशान दंपति ने अफसरों से लगाई गुहार.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 28, 2026 at 10:06 AM IST
|Updated : February 28, 2026 at 10:56 AM IST
जालौन: जिले में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है. यहां एक महिला की नसंबदी तीन साल पहले हुई थी. इस महिला ने अब एक बच्चे को जन्म दिया है. आर्थिक तंगी से जूझ रही ये महिला अपने पति के साथ अफसरों की चौखट पर पहुंची. महिला ने गुहार लगाई कि जो होना था सो हो गया, अब उसे बच्चे को पालने का खर्चा सरकार की ओर से दिया जाए. आर्थिक लाचारी का हवाला देते हुए दंपति ने सरकारी से मदद मांगी है.
कब कराई थी नसबंदी: जालौन जिले के डाकोर निवासी भानुप्रताप ने बताया कि उनकी पत्नी का नाम भूरी है. उनके दो बच्चे अमित (6) और वृषभान (4) हैं. 1.5 साल पहले बच्चा अंश हुआ था. उन्होंने बताया कि दो बच्चों के बाद उन्होंने पत्नी भूरी की नसबंदी साल 2023 में सरकारी अस्पताल में कराई थी. नसबंदी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कहा था कि यह पूरी तरह से सफल है. इससे दंपत्ति संतुष्ट हो गए थे. भानुप्रताप ने आरोप लगाया कि इस नसबंदी के 1.5 साल बाद पत्नी ने बेटे अंश (1.5) को जन्म दिया. उन्होंने इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. 2 अप्रैल 2024 से वह लगातार इसकी शिकायत कर रहे हैं. भानुप्रताप ने बताया कि परिवार में उनकी पत्नी और बच्चों के अलावा पिता रामसेवक और भाई मनोज हैं. भानुप्रताप राजमिस्त्री है. इस वजह से घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. दो बच्चों के बाद इस वजह से ही पत्नी की नसबंदी कराई थी लेकिन अब तीसरा बच्चा हो गया है. शुक्रवार को उन्होंने पत्नी के साथ जिलाधिकारी जालौन को इस संबंध में मांगपत्र सौंपा. जिलाधिकारी ने इस मामले की जांच के आदेश सीएमओ को दिए हैं.
गरीबी के कारण कराई थी नसबंदी: भानुप्रताप का कहना है कि उन्होंने अपनी आर्थिक समस्याओं के चलते ही पत्नी की नसंबदी कराने का फैसला लिया था. अब पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया है. वह इसे स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही बता रहे हैं. साथ ही सरकार के हम दो, हमारे दो अभियान में लापरवाही को उजागर कर रहे हैं. दंपति की मांग है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करें. बच्चे के पालन पोषण का खर्चा सरकार से उन्हें मिलना चाहिए. उनका तर्क है कि इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है इस वजह से सरकार यह जिम्मा उठाए.
अधिकारी क्या बोले: मुख्य चिकित्साधिकारी जालौन डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि मामला डकोर क्षेत्र से संबंधित है और शिकायत प्राप्त हुई है. उन्होंने कहा कि प्रकरण की फाइल निकलवाकर जांच कराई जा रही है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से बताया जा सकेगा कि किस स्तर पर लापरवाही हुई है या नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि शासन के नियमों के अनुसार मुआवजे के संबंध में भी जांच के आधार पर निर्णय लिया जाएगा. प्रशासनिक स्तर पर शिकायत को स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया गया है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

