रायपुररानी की "रंजो’" बनी खेतों की कमांडर, खेत में ट्रैक्टर तो सड़कों पर दौड़ाती है थार, पशुओं की खरीद-बिक्री से खेती तक, दिलचस्प है "लेडी फार्मर आइकन" की स्टोरी
पंचकूला की रंजो खेती, पशुपालन और पशु कारोबार संभालते हुए परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही है.

Published : June 5, 2026 at 10:38 AM IST
|Updated : June 5, 2026 at 12:11 PM IST
पंचकूला: कुश्ती का अखाड़ा हो, रेसलिंग का मैट हो, क्रिकेट का मैदान हो या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुबसूरती की बात, हरियाणा की बेटियों ने हर जगह लट्ठ गाड़ा है. प्रदेश की बेटियां सभी क्षेत्रों में अव्वल हैं. ऐसे ही एक महिला हरियाणा के जिला पंचकूला के रायपुर रानी की पहचान बनी हुई है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ करीब दस किले जमीन की खेती कर रही हैं.
इतना ही नहीं उनके पास करीब 35-40 पशुधन भी हैं. साथ ही वह दूसरे राज्यों या जिलों में जाकर पशुओं (भैंस व गाय) की खरीद-बिक्री भी करती हैं. यह महिला गांव शाहजहांपुर (कंडरवाला) की रहने वाली रंजना उर्फ रंजो है, जिन्हें गांव से लेकर दूर-दराज तक के लोग रंजो के नाम से जानते हैं.
खेतों में ट्रैक्टर तो सड़कों पर थार और बुलेट: रंजो ट्रैक्टर भी चलाती हैं और खेतीबाड़ी के काम में उसका भरपूर इस्तेमाल करती हैं. लेकिन यदि उनके शौंक की बात करें तो वह सड़कों पर धक-धक आवाज वाली युवाओं की पसंद बुलेट और थार को भी चलाती हैं. जहां अकसर गांवों में युवतियों व महिलाओं को परिवार और सामाजिक अड़चनें घेरे रहती हैं, वहीं रंजो इन सभी अड़चनों की ओर ध्यान न देते हुए अपनी जिम्मेदारियों को तो बखूबी पूरा कर ही रही हैं लेकिन साथ ही अपने शौंक भी पूरे कर रही हैं. गांव की सड़कों पर जब बुलेट की आवाज सुनाई देती है या फिर थार से उड़ती धूल दिखती है तो ग्रामीण समझ जाते हैं कि रंजो ही कहीं आ-जा रही होगी.
लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने वाली रंजना उर्फ रंजो से ईटीवी भारत ने उनके गांव जाकर बातचीत की. जिम्मेदारियों, शौंक और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में भी रंजो ने ईटीवी भारत से जानकारियां सांझा की.
चार बेटियां व एक बेटे की मां है रंजो: ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान रंजो ने बताया कि, "मेरा मायका गांव महमूदपुर में है. बीस साल पहले खेतीबाड़ी का काम करने वाले राजेन्द्र उर्फ राजू से मेरी शादी हुई. मेरी चार बेटियों और एक बेटा है.सबसे बड़ी बेटी करीब 16 वर्ष की है, जबकि सबसे छोटी बेटी चार साल की है और बेटा एक साल का है. मेरे भाई भी खेतीबाड़ी करते हैं और एक भाई कनाडा गया है. मेरी सभी बहनों की शादी हो गई है."

घरवाले भी करते हैं सपोर्ट: रंजों ने आगे बताया कि, "बच्चों और घर के अन्य पारिवारिक सदस्यों की जिम्मेदारी को निभाती हूं. मैं हर दिन सुबह चार बजे से देर शाम तक अपने कामकाज निपटाती हूं. इन जिम्मेदारियों को पूरा करने में मेरे पति राजू और ससुर बनारसी दास सहित परिवार के अन्य सदस्य सपोर्ट करते हैं. मैं सुबह पशुओं का दूध निकालने से दिन की शुरूआत करती हूं. फिर दूधिया (मिल्क वेंडर) मेरे पशुबाड़े से दूध ले जाता है, जिसके बाद मैं और काम को पूरा करने में लग जाती हूं. फिलहाल मैं खेत में पानी देने और मिट्टी को अलट-पलट करने में जुटी हूं. क्योंकि कुछ दिनों बाद मुझे खेत में जीरी लगानी है. इसके अलावा मैं खेतों में मक्की, बाजरा, चेरी और गेहूं की फसल की बुआई भी करती हूं."

आठवीं तक पढ़ी लेकिन सीखने की आदत बरकरार:रंजना उर्फ रंजो ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है. शादी होने के बाद ससुराल की जिम्मेदारियों और बच्चों के पालन-पोषण व अन्य कारणों से वह आगे नहीं पढ़ सकी. रंजो कहती हैं कि, "भले ही मैं ज्यादा पढ़ लिख नहीं पाई, लेकिन हर तरह का काम सीखना मुझे पसंद है. शुरूआत से ही मैंने सिलाई-कढ़ाई-बुनाई सहित घर के सभी कामकाज सीखे. यहां तक कि बचपन से खेतीबाड़ी भी करती रहीं. ससुराल में आने के बाद पशुओं की खरीद-बिक्री करनी भी शुरू की. इसके लिए मैं अन्य राज्यों और जिलों में पशुओं को देखने व खरीदने आती-जाती रहती हूं. मैं हर चीज के लिए भगवान का धन्यवाद करते हूं कि उन्होंने मुझे इतनी हिम्मत दी कि मैं आज सब काम कर पाती हूं और मुझे औरों की तरह घबराहट भी नहीं होती."

लोगों भी करती हैं मदद: रंजो ने बताया कि, "मैं अपने गांव या आसपास का क्षेत्र कहीं से भी यदि कोई जरूरतमंद किसी काम के लिए मेरे पास पहुंचता है तो फिर मैं समय नहीं देखती. सुबह हो या रात, जरूरतमंद का काम किसी भी कारण से क्यों न रूका हुआ हो, मैं उसे पूरा करवाने के लिए उनके साथ जाती हूं."
रंजो के मिलनसार स्वभाव और मधूर व्यवहार के कारण ही गांव और आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोग बड़ी संख्या में उनके साथ (स्पोर्ट) में रहते हैं. ईटीवी भारत ने उनसे पूछा कि क्या वह राजनीति में भी दिलचस्पी रखती हैं तो उन्होंने इससे इनकार किया लेकिन यह जरूर कहा कि लोग बड़ी संख्या में उनके साथ हैं और उनका सपोर्ट करते हैं.
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