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बीकानेर में होलाष्टक लगने के साथ ही रम्मतों का दौर शुरू, 400 साल से चली आ रही परंपरा

बीकानेर में देर रात शुरू होने वाली रम्मत को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है.

BIKANER RAMMAT
बीकानेर में रम्मत का आयोजन (ETV Bharat Bikaner)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 27, 2026 at 4:28 PM IST

3 Min Read
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बीकानेर: फाल्गुनी बयार की मस्ती में डूबे बीकानेर में होली का क्रेज रहता है. कहा जाता है कि ब्रज के बाद सबसे ज्यादा चर्चित होली बीकानेर की है. होलाष्टक लगने के साथ ही शहर में होली पर रौनक के रूप में दिवाली सा माहौल में नजर आता है. होली के गीतों के साथ चंग की थाप भी सुनाई देती है. बीकानेर शहर के अंदरूनी क्षेत्र जहां अधिसंख्या में पुष्करणा ब्राह्मण निवास करते हैं, जिनकी वजह से बीकानेर की होली विश्व प्रसिद्ध है. शहर में बसंत पंचमी के साथ ही रम्मतों के अभ्यास का आयोजन शुरू हो जाता है. दरअसल, किसी न किसी विषय पर मंचित होते नाटक की तरह ये मंचन होता है, जिसे रम्मत कहा जाता है.

रम्मत अब बन गई परंपरा: बीकानेर के बिस्सों के चौक में करीब 400 साल से आयोजित हो रही भक्त पूर्णमल और शहजादी नौटंकी दो रम्मत का आयोजन होता है. हर एक साल के अंतराल में एक रम्मत होती है. इस बार यहां भक्त पूर्णमल की रम्मत का मंचन हुआ. रम्मत के मुख्य कलाकार किशन कुमार बिस्सा कहते हैं कि मनोरंजन के नाम पर त्योहार के मौके पर अपनों को एक जगह एकत्रित करने के उद्देश्य से शुरू हुई यह रम्मत अब परंपरा बन चुकी है. बिस्सा कहते हैं कि वो अपने परिवार की छठी पीढ़ी के व्यक्ति हैं, जो इस रम्मत से जुड़े हैं. वे कहते है कि मैं पिछले 49 साल से रम्मत में भूमिका निभा रहा हूं.

परंपरा को बचाने युवा भी उतरे, देखें वीडियो (ETV Bharat Bikaner)

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रम्मतों का अपना अलग क्रेज: देर रात शुरू होने वाली इन रम्मत को देखने के लिए जुटी लोगों की भीड़ इसकी लोकप्रियता बताने के लिए काफी है. बीकानेर में अलग–अलग मोहल्ले के अनुसार इन रम्मतों का आयोजन होता है. दरअसल, रम्मत से पहले भगवान की स्तुति की जाती है. बिस्सा चौक में रात्रि में माता आशापुरा के स्वरूप में अवतरण पर हजारों लोगों की मौजूदगी रम्मत से जुड़ी धार्मिक आस्था को भी प्रदर्शित करती है.

Scene from Rammat in Bikaner
बीकानेर में रम्मत का दृश्य (ETV Bharat Bikaner)

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होलाष्टक के साथ रम्मतों का मंचन शुरू: रम्मतों को लेकर पुरानी पीढ़ी नहीं बल्कि युवाओं में भी क्रेज देखने को मिलता है. हालांकि, अब मोबाइल और टेक्नोलॉजी के इस युग में युवाओं को इन रम्मतों के प्रति जोड़े रखना भी कलाकारों के लिए एक चुनौती है. रम्मत से जुड़े युवा कलाकार गोविंद बिस्सा कहते हैं कि मैं पिछले 12 साल से रम्मत से जुड़ा हुआ हूं. युवा पीढ़ी हमारी इस परंपरा को समझे और आगे आने वाली पीढ़ी तक ये विरासत पहुंचे. इसलिए सबको मिलकर ये प्रयास करने होंगे और इसलिए मैं भी इससे जुड़ा हुआ हूं.