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रक्षाबंधन पर भाई ने नहीं निभाया फर्ज, पिता की मौत के बाद घर से भागा, बेटी ने दी मुखाग्नि

मुक्तिधाम सेवा समिति के सचिव मनोज पांडे और उनकी टीम ने अंतिम संस्कार करने में की बेटी की मदद. रवि प्रजापति की रिपोर्ट.

Daughter performs last rite Vidisha
विदिशा में बेटी ने किया पिता का अंतिम संस्कार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 28, 2026 at 9:02 PM IST

2 Min Read
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विदिशा: मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित मुक्तिधाम में रक्षाबंधन के दिन एक ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जिसने समाज में दम तोड़ते रिश्तों की हकीकत को सामने रख दिया. पिता की मौत के बाद जहां बेटा अपनी जिम्मेदारी छोड़कर घर से भाग खड़ा हुआ, वहीं दूसरी तरफ परिवार की बेटी ने पिता की अंतिम यात्रा और क्रिया-कर्म का पूरा फर्ज निभाया.

कैंसर से जूझते पिता और आर्थिक तंगी का संघर्ष

पुरनपुरा के गली नंबर 2 में रहने वाले धनकड़ परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा, जब परिवार के मुखिया पिछले तीन वर्षों से कैंसर जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ गए. घर में पत्नी शारदा, बेटी ज्योति और बड़ा बेटा रंजीत था. बीमार पिता मजदूरी करके किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे. बेटी ज्योति कोरोना काल से पहले नौकरी करती थी, लेकिन महामारी के दौरान उसकी नौकरी चली गई, जिससे परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गया.

बीमार पिता के इलाज में बेटे ने नहीं की कोई मदद

बेटे रंजीत ने गलत संगति में आकर न तो बीमार पिता के इलाज में कोई मदद की और न ही परिवार की जिम्मेदारी उठाई. रक्षाबंधन के दिन, जब पिता ने अंतिम सांस ली, तो रंजीत घर में ही चोरी करके फरार हो गया और अपने लाचार पिता को मरते छोड़ गया.

मुक्तिधाम में मूसलाधार बारिश के बीच अंतिम विदाई

मुक्तिधाम सेवा समिति के सचिव मनोज पांडे के अनुसार, रक्षाबंधन की सुबह बारिश के बीच मुक्तिधाम में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सभी की आंखें नम कर दीं. हाथ में हांडी और आंखों में आंसुओं का समंदर लिए बेटी अपने पिता के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही थी. शव वाहन में पिता के पार्थिव शरीर के साथ केवल ज्योति, उसकी मां और मोहल्ले के 2-3 पड़ोसी ही थे. रास्ते में इस दृश्य को देखकर राहगीर अनुपम जौहरी और तिवारी बंधु भी स्वतः ही सहयोग के लिए मुक्तिधाम तक साथ चले आए.

मुक्तिधाम सेवा समिति ने संभाला मोर्चा

बेटी के असीम साहस और परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मुक्तिधाम सेवा समिति के सचिव मनोज पांडे और उनकी टीम ने आगे आकर परिवार को सहारा दिया और अंतिम संस्कार संपन्न करवाने में बेटी की मदद की. मुक्तिधाम में लकड़ी, कंडे या किसी भी सामग्री के लिए बेटी से कोई शुल्क नहीं लिया गया.