CM नीतीश ने जिसको उत्तराधिकारी बनाने का संकेत दिया वो सत्ता से दूर हुए, अब सम्राट चौधरी का क्या होगा?
नीतीश कुमार सियासत के मंझे हुए राजनेता हैं. कहा जाता रहा है कि वह अपने उत्तराधिकारियों को ऐन मौके पर साथ छोड़ देते हैं. पढ़ें


Published : January 8, 2026 at 8:41 PM IST
पटना : बिहार में पिछले 20 सालों से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं. पिछले 20 सालों में नीतीश कुमार ने आधा दर्जन नेताओं को अपना उत्तराधिकारी बनाने के संकेत दिए. विडंबना यह है कि जिन नेताओं पर नीतीश कुमार ने हाथ रखा है, बिहार की सियासत में वह हाशिये पर पहुंच गए और सत्ता से दूर हो गए.
5 नामों की होती है चर्चा : सुशील मोदी से लेकर प्रशांत किशोर, आरसीपी सिंह, तेजस्वी यादव इसके बड़े उदाहरण हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि नीतीश कुमार की यह सियासी रणनीति रही है कि उनके कद के बराबर कोई नहीं पहुंच पाए. ना पार्टी में और ना ही गठबंधन के किसी दल में. नीतीश कुमार ने पहले ऐसे नेताओं पर हाथ रखा और फिर उन्हें सत्ता से काफी दूर कर दिया.
दरअसल, नीतीश कुमार जब भी किसी नेता की खूब तारीफ करने लगने लगते हैं तो सियासी गलियारों में उस नेता के भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है. क्योंकि कभी मुख्यमंत्री ने बिहार के पांच नेताओं की खूब तारीफ की, राजनीति में कद भी बढ़ाया उत्तराधिकारी बनाने के संकेत भी दिए लेकिन बाद में राजनीतिक रूप से हाशिये पर पहुंचाने में भी बड़ी भूमिका निभाई.
1. सुशील मोदी : नीतीश कुमार के साथ शुरुआती दिनों में स्वर्गीय सुशील मोदी उनके मजबूत साथी हुआ करते थे. नीतीश कुमार ने सुशील मोदी का कद बिहार बीजेपी में काफी बड़ा कर दिया था. सरकार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी का ही नंबर था. 2010 विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए नरेंद्र मोदी को बिहार इसलिए नीतीश कुमार ने आने नहीं दिया क्योंकि उस समय उनका कहना था कि मेरे पास तो एक मोदी है ही.

2014 में जब नीतीश कुमार अलग हो गए तो सुशील मोदी को भाजपा ने विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री उम्मीदवार भी बनाया था. चुनाव में एनडीए की जीत नहीं हुई और उसके बाद सुशील मोदी का बीजेपी में भी कद घटा और बिहार की राजनीति में भी हाशिये पर जाने लगे.
बाद में जब नीतीश कुमार फिर से पाला बदलकर एनडीए में आए तो सुशील मोदी को जीवनदान जरूर मिला लेकिन कुछ दिनों के लिए. बाद में बीमारियों की वजह से सुशील मोदी का निधन भी हो गया. लेकिन निधन होने से पहले सुशील मोदी के राजनीतिक रूप से हाशिये पर जाने के पीछे नीतीश कुमार से उनकी दोस्ती को बड़ा कारण माना गया गया.
2. उपेंद्र कुशवाहा : एक समय में उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार के खास माने जाते थे. नीतीश कुमार ने कई मौका पर कहा कि मेरे बाद तो आप को ही देखना है. हालांकि जब उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार से अलग हुए तो उनकी स्थिति रही यह किसी से छिपी नहीं है. 2014 में केन्द्रीय मंत्री बने. बाद में 2024 तक किसी चुनाव में उन्हें जीत नसीब नहीं हुई. बीजेपी से फिर से गठबंधन के बाद उन्हें संजीवनी जरूर मिली है.

3. प्रशांत किशोर : प्रशांत किशोर बड़े रणनीतिकार माने जाते हैं. 2015 में नीतीश कुमार के लिए बिहार चुनाव के समय काम किया. जब महागठबंधन की सरकार बन गई तो कुछ समय बाद ही प्रशांत किशोर जदयू में शामिल हो गए. नीतीश कुमार उन्हें जदयू का दो नंबर कुर्सी सौंप दिया और अपना वारिस तक बताने लगे.
बाद में प्रशांत किशोर की दूरी नीतीश कुमार से बढ़ने लगी. प्रशांत किशोर ने बिहार में अपनी अलग पार्टी भी बना ली. 2025 विधानसभा चुनाव से पहले 3 सालों तक प्रशांत किशोर बिहार में लंबी पदयात्रा की लेकिन चुनाव में उनका खाता तक नहीं खुला. एक तरह से प्रशांत किशोर आज राजनीतिक हाशिये पर पहुंच चुके हैं.

4. आरसीपी सिंह : राजनीति में बड़ा नाम आरसीपी सिंह का भी है. आरसीपी सिंह भी जदयू में नीतीश कुमार के बाद दूसरे नंबर के नेता माने जाते थे. नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी के तौर पर उन्हें देखा जा रहा था. पार्टी में उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष तक बनाया गया, लेकिन आरसीपी सिंह की भी स्थिति अन्य नेताओं की तरह ही हुई. प्रशांत किशोर की पार्टी में भी शामिल हो गए थे. उससे पहले बीजेपी में भी शामिल हुए, लेकिन उसके बाद भी राजनीति में आरसीपी सिंह की स्थिति सुधरी नहीं. आज आरसीपी सिंह अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.
5. तेजस्वी यादव : इस सूची में तेजस्वी यादव के नाम की चर्चा किए बिना कहानी अधूरी रहेगी. 2022 में नीतीश कुमार पाला बदलकर महागठबंधन में शामिल हुए थे और तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया था. कई कार्यक्रमों में तेजस्वी यादव की तारीफ करते थे. उस समय यह भी कहते थे कि मेरे बात तो सब इसी को देखना है. तेजस्वी यादव का कद बिहार की राजनीति में तेजी से ऊपर बढ़ा दिए.
इसके बाद जब नीतीश कुमार पाला बदलकर फिर से एनडीए के साथ सरकार बना ली, तब तेजस्वी यादव भी सत्ता से दूर हो गए. तेजस्वी यादव महागठबंधन के नेता के तौर पर विधानसभा चुनाव और उससे पहले लोकसभा के चुनाव में जरूर उतरे लेकिन दोनों चुनाव में आरजेडी का प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा. विधानसभा चुनाव में तो तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री के उम्मीदवार बनाए गए थे लेकिन राजद केवल 25 सीटों पर सिमट गई. तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री की कुर्सी के दावेदारों में देखा जा रहा था लेकिन आज सत्ता से काफी दूर जा चुके हैं.

अब चर्चा सम्राट चौधरी की : नीतीश कुमार के साथ पांचों नेताओं की चर्चा हमेशा होती रहेगी. ताजा मामला सम्राट चौधरी को लेकर है. सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है. नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी की हर जगह चर्चा कर रहे हैं. उन्हें सरकार में दो नंबर की ताकत वाला नेता भी माना जाता है.
दरअसल, नीतीश कुमार सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी के जन्मदिन के कार्यक्रम में पहुंचे थे. नीतीश कुमार ने पहुंचकर जिस प्रकार से सम्राट चौधरी की तारीफ की, कहा 'अच्छा काम कर रहा है आगे जाएगा'. सियासी गलियारे में इसका मतलब निकाला जाने लगा. लोग कहने लगे कि नीतीश कुमार के कहने का मतलब था, मेरे बाद यही देखेगा.
Live : पूज्य पिताजी श्री शकुनी चौधरी जी के 90वें जन्मदिवस के अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री @nitishkumar जी समेत वरिष्ठ नेतागण, कार्यकर्तागण और जनता-जनार्दन द्वारा शुभकामनाएँ प्राप्त... https://t.co/bFHMTl1Lrn
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) January 4, 2026
राजनीतिक विशेषज्ञ प्रिय रंजन भारती का कहना है कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के चाणक्य हैं. मुख्यमंत्री की कुर्सी हमेशा उनके पास रहे, उन्हें पता है यह कैसे संभव होगा? इसलिए गठबंधन किसी की हो मुख्यमंत्री वही बनते रहे हैं. जिन नेताओं कि नीतीश कुमार ने तारीफ कर दी ऐसे नेताओं का राजनीति में भविष्य बेहतर नहीं रहा है यह तो रिकॉर्ड में है.
''इन दिनों नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी की खूब तारीफ कर रहे हैं. सम्राट चौधरी की तारीफ करना उनकी मजबूरी भी है. इसलिए यह कहना कि पहले के नेताओं के साथ जो हुआ सम्राट चौधरी के साथ होगा यह सही नहीं होगा.''- प्रिय रंजन भारती, राजनीतिक विशेषज्ञ
'नीतीश कुमार चतुर राजनेता' : वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडे का कहना है कि नीतीश कुमार के साथ जिन दिग्गज नेताओं ने काम किया अधिकांश सक्रिय है लेकिन सत्ता से दूर हैं. सुनील पांडे का कहना है कि नीतीश कुमार चतुर राजनेता हैं इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है. नीतीश कुमार ने कई नेताओं को अपना सम्मोहन दिया, लेकिन उसका परिणाम बहुत अच्छा नहीं रहा है.

'नीतीश जिनके साथ उन्हीं की भाषा बोलते' : आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि नीतीश कुमार लंबे समय से राजनीति में हैं. कई लोग उनके साथ आए और कई लोग छोड़कर भी गए. तेजस्वी यादव को भी उन्होंने कहा था कि अच्छा काम कर रहे हैं, आगे बढ़ाना है, इन्हीं को सब कुछ देखना है. नीतीश कुमार अपनी सुविधा के अनुसार गठबंधन में जिसके साथ रहते हैं उसकी तारीफ करते हैं. नीतीश कुमार की यह सियासी रणनीति रहती है या कुछ और पर यह सही है कि जिस गठबंधन के साथ नीतीश कुमार रहते हैं उसी की भाषा बोलते हैं.
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