100 साल बाद मध्य प्रदेश में घूमेंगे जंगली भैंसे और गैंडे, टाइगर के बदले असम से हिमंता देंगे सौगात
गुवाहटी में मुख्यमंत्री मोहन यादव को असम सीएम हिमता बिस्वा सरमा ने सौंपा गिफ्ट. एक जोड़ी टाइगर और 6 मगरमच्छ के बदले 1 जोड़ी गैंडे, कोबरा और वाइपर मिलेगा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 9, 2026 at 10:16 AM IST
|Updated : January 9, 2026 at 11:55 AM IST
भोपाल : मध्यप्रदेश के जंगलों में अब बाघ और चीतों के अलावा 100 साल पहले प्रदेश से विलुप्त हो चुके जंगली भैसों की एंट्री होने वाली है. इतना ही नहीं अब जंगल में गैंडे भी धमाल मचाते पर्यटकों को नजर आएंगे. दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार असम से जंगली भैंसे, गैंडे और 3 कोबरा लानी की तैयारी में है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गुवाहाटी दौरे पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने वन्य जीवों को एमपी भेजने की सहमति दे दी है. इनमें से कुछ को भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में रखा जाएगा. मध्यप्रदेश इसके बदले में असम को एक जोड़ी टाइगर और 6 मगरमच्छ देगा.
एमपी में 100 साल बाद जंगली भैंसे की वापसी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, '' मध्यप्रदेश में चीतों के बाद अब जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना से प्रदेश की जैव विविधता में एक नया अध्याय जुड़ेगा. यह प्रयास एक प्रजाति के संरक्षण के साथ ही प्रदेश के जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. मध्यप्रदेश की पहचान टाइगर स्टेट और लेपर्ड स्टेट के बाद अब जंगली भैंसों और गैंडा के रूप में भी बनेगी. प्रदेश सरकार वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ उन वन्य जीवों को वापस मध्यप्रदेश के जंगलों में लाने की कोशिश कर रहा है, जो कभी प्रदेश के जंगलों में रहा करते थे.''

भैंसों के साथ एमपी आएगा आसामी गैंडों का जोड़ा
मध्यप्रदेश में करीबन 100 साल पहले तक जंगली भैंसा पाया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे इसकी संख्या मध्यप्रदेश के जंगलों से खत्म होती चली गई. अब इनकी अधिकांश संख्या असम के जंगलों में ही देखी जा सकती है. इसके अलावा छत्तीसगढ के कुछ हिस्सों में भी आसाम से ही लाए गए जंगली भैंसे पाए जाते हैं, क्योंकि यहां भी ये विलुप्ती की कगार पर पहुंच गए थे. वहीं, अब मध्यप्रदेश के जंगलों में भैसों के साथ आसाम से लाए गए गैंडे भी देखे जा सकेंगे.

कान्हा टाइगर रिजर्व भैंसों के लिए उपयुक्त
जंगली भैसों को लाए जाने के साथ ही इन्हें पुर्नस्थापित करने के लिए इनके लिए आवास का भी अध्ययन करा लिया गया है. देहरादून के भारतीय वन्यजीव संस्थान के अध्ययन से यह सामने आया है कि मध्यप्रदेश का कान्हा टाइगर रिजर्व जंगली भैंसों के पुनःस्थापन के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र है. यहां घास के मैदानों की गुणवत्ता दूसरे टाइगर रिजर्व से बेहतर है. यहां पानी की उपलब्धता भी पर्याप्त है और इसके अलावा यहां इंसानी गतिविधियां बहुत कम हैं. साथ ही दूसरे शाकाहारी जीवों की संख्या भी यहां पर्याप्त है.
मध्यप्रदेश में वन्य जीव और जैव विविधता को समृद्ध करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। मध्यप्रदेश से विलुप्त जंगली भैंस प्रजाति की पुनर्स्थापना होगी। असम से आगामी 3 साल में 50 जंगली भैंस, एक जोड़ी गैंडा और तीन कोबरा लाये जाएंगे। कान्हा टाइगर रिजर्व में भैंसों का पुनर्स्थापना होगा।… pic.twitter.com/rzjkg2Ee9A
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) January 8, 2026
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गैंडा, जंगली भैंसा लाने की प्रक्रिया शुरू
उधर असम सरकार से सहमति मिलने के बाद अब राज्य सरकार ने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और भारत सरकार से इससे जुड़ी अनुमतियों को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है. इन वन्यजीवों को मध्यप्रदेश लाकर यहां उनका संरक्षण किया जाएगा. साथ ही उनकी यहां संख्या बढ़ सके इसके लिए प्राकृतिक माहौल उपलब्ध कराया जाएगा. इस कदम से नेशनल पार्कों में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा.

