आखिर क्यों आक्रामक हो रहे लोग? एक्सपर्ट से जानिये इसके पीछे की बड़ी वजह
पढ़िए राहुल श्रीवास्तव के संपादन में संवाददाता प्रशांत मिश्रा की रिपोर्ट

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 31, 2026 at 6:28 PM IST
लखनऊ : राजधानी में 20 अगस्त 2026 को हुए डबल मर्डर व सुसाइड की वारदात ने देखते ही देखते तीन जिंदगियां खत्म कर दीं. लखनऊ में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले भी कई घटनाएं सामने आईं जब तीन लोगों की जान चली गई. सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कोई व्यक्ति छोटी सी बात, जमीन के विवाद, पारिवारिक तनाव या बदले की भावना में इतना हिंसक क्यों हो जाता है? इस पर कल्याण सिंह कैंसर संस्थान, लखनऊ के मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव तिवारी ने ईटीवी भारत की टीम से बातचीत की.
आइये जानते हैं क्या कहते हैं मनोचिकित्सक?
डॉ. अभिनव के मुताबिक, कई बार विवाद की शुरुआत जिस चीज से होती है, बाद में वही असली मुद्दा नहीं रह जाती. मसलन जमीन विवाद में जमीन से होने वाला फायदा या नुकसान पीछे छूट जाता है और व्यक्ति इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लेता है. बड़ी संख्या में लोगों में हार स्वीकार करने की क्षमता कमजोर होती है. ऐसे में छोटी-छोटी बातें प्रतिष्ठा का सवाल बन जाती हैं और व्यक्ति उसी विवाद में इतना उलझ जाता है कि उसकी सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होने लगती है.
मनोचिकित्सक के मुताबिक, पारिवारिक विवाद में भी कुछ ऐसा ही होता है. व्यक्ति चाहता है कि चीजें उसके हिसाब से हों. जब परिवार का कोई सदस्य उसका विरोध करता है या उसकी पहुंच से बाहर जाने लगता है तो वह इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पाता. धीरे-धीरे गुस्सा, तनाव और नियंत्रण खोने की भावना बढ़ सकती है. मनोचिकित्सक के मुताबिक, कुछ मामलों में व्यक्ति की मानसिक स्थिति ऐसी हो जाती है कि वह कुछ भी कर गुजरने की स्थिति में पहुंच जाता है और जिंदगी को लेकर भी उसकी सकारात्मक सोच कम हो सकती है.

मनोचिकित्सक के मुताबिक, दुश्मनी और बदले की भावना में भी यही खतरा रहता है. व्यक्ति सोचने लगता है कि अगर उसने बदला नहीं लिया तो उसकी प्रतिष्ठा खत्म हो जाएगी. बदला नहीं ले पाने पर वह अंदर ही अंदर उसी बात को लेकर घुटता रहता है. अगर आस-पास के लोग भी उसे समझाने के बजाय उसकी नाराजगी या बदले की भावना को बढ़ावा दें तो स्थिति और खराब हो सकती है.
मनोचिकित्सक के मुताबिक, ऐसे लोगों को समय रहते पहचानना जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति लगातार किसी एक विवाद या व्यक्ति की बात करता रहे, छोटी बातों को अपनी बेइज्जती समझे, हर मामले को जीत-हार से जोड़ने लगे या बार-बार बदला लेने की बात करे तो परिवार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए. अचानक बहुत ज्यादा गुस्सा, लोगों से दूरी बनाना, लगातार नकारात्मक बातें करना या किसी को नुकसान पहुंचाने की बात करना भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं.
मनोचिकित्सक के मुताबिक, ऐसी स्थिति में उससे भिड़ने या उसे चुनौती देने के बजाय शांत तरीके से बातचीत करनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक या काउंसलर की मदद लेनी चाहिए. अगर व्यक्ति किसी को नुकसान पहुंचाने की स्पष्ट धमकी दे रहा हो या हिंसा की तैयारी करता दिखे तो उसकी और दूसरे लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल स्थानीय पुलिस या आपातकालीन सहायता लेनी चाहिए.

मनोचिकित्सक के मुताबिक, मानसिक तनाव या गुस्सा अपने आप में किसी व्यक्ति को अपराधी नहीं बनाता. लेकिन जब तनाव के साथ प्रतिष्ठा का दबाव, हार स्वीकार न करने की जिद, बदले की भावना और लगातार बढ़ती नकारात्मक सोच जुड़ जाती है तो खतरा बढ़ सकता है. समय रहते बातचीत, काउंसलिंग, परिवार का सकारात्मक रवैया और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद किसी बड़ी घटना को होने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है. इन सभी घटनाओं की कहानियां अलग-अलग हैं, लेकिन एक बात समान दिखाई देती है विवाद छोटा हो सकता है, मगर जब वही विवाद इंसान के लिए प्रतिष्ठा, हार-जीत और बदले का सवाल बन जाए तो उसका अंजाम बेहद खौफनाक हो सकता है.

दिन : 20 अगस्त 2026 (लखनऊ)
गोमतीनगर का इलाका रोज की तरह व्यस्त था. इसी दौरान बैंक से बाहर निकलीं असिस्टेंट मैनेजर दिव्या मिश्रा पर उनके पति मानस बाजपेयी ने कथित तौर पर गोली चला दी. दोनों के बीच विवाद चल रहा था और तलाक की कार्यवाही भी चल रही थी. गोली चलने के बाद बैंक के बाहर अफरातफरी मच गई.
मानस वहां से निकल गया और कुछ ही देर बाद अपने घर पहुंचा. वहां उसकी बहन तूलिका मौजूद थी. पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, मानस ने अपनी बहन को गोली मारी और फिर खुद को भी गोली मार ली. इस घटना के बाद पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में नए सवाल भी सामने आ रहे हैं. पुलिस हथियारों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल सबूतों को खंगाल रही है.
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दिन : 2 फरवरी 2024 : (मलिहाबाद)
2 फरवरी 2024 की शाम को लखनऊ का मलिहाबाद इलाका अचानक गोलियों की आवाज से गूंज उठा. मोहम्मदनगर गांव में जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. मामला जमीन की पैमाइश और हिस्से को लेकर था. विवाद इतना बढ़ा कि रिश्तेदार ही एक-दूसरे के सामने बंदूक लेकर खड़े हो गए.

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दिन : 5 जनवरी 2022 (लखनऊ)
5 जनवरी 2022 की रात लखनऊ के विकासनगर सेक्टर-2 में रिटायर्ड इंडियन ऑयल कर्मचारी महमूद अली खां, उनकी पत्नी दरख्शां और छोटे बेटे शावेज की हत्या कर दी गई. पुलिस जांच में परिवार के बड़े बेटे सरफराज नवाज खान पर तीनों की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा. पुलिस के मुताबिक, परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद था. सरफराज को आशंका थी कि पिता संपत्ति छोटे भाई के नाम कर सकते हैं. इसके अलावा उसके एक रिश्ते को लेकर भी परिवार की नाराजगी सामने आई थी.
जांच के अनुसार, 5 जनवरी की रात खाने में नींद की गोलियां मिलाने का आरोप है. तीनों के गहरी नींद में जाने के बाद रात करीब 3 बजे धारदार हथियार से उनकी हत्या कर दी गई. इसके बाद शव अलग-अलग जगह फेंके गए, शावेज का शव इटौंजा, पिता का मलिहाबाद और मां का शव माल इलाके में मिला.

साल : 2005 सबसे चर्चित ट्रिपल मर्डर (लखनऊ)
राजधानी में सलीम, सोहराब और रुस्तम नाम के तीन भाइयों का नाम अपराध की दुनिया में तेजी से उभर रहा था. इसी दौरान एक ऐसी वारदात हुई, जिसने पूरे शहर को हिला दिया. कुछ ही देर में तीन लोगों की हत्या कर दी गई और इसके पीछे वजह बताई गई, भाई की हत्या का बदला. बताया जाता है कि 2004 में रमजान के दौरान शहजादे की हुसैनगंज इलाके में हत्या हुई थी. 2005 में बदला लेने के लिये लखनऊ के अलग-अलग इलाकों में करीब एक घंटे के भीतर तीन हत्याएं हुईं.
रिपोर्टों के मुताबिक, हुसैनगंज, खदरा और मड़ियांव में तीन लोगों को निशाना बनाया गया. करीब दो दशक बाद 2025 में यह मामला फिर चर्चा में आया, जब जेल में बंद सोहराब पत्नी से मिलने के लिए पैरोल पर बाहर आया और निर्धारित समय पर वापस नहीं लौटा. बाद में उसकी गिरफ्तारी की खबर सामने आई.
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दिन : 25 जून 2015 (सीतापुर)
सीतापुर के महोली में 25 जून 2015 को चुनावी रंजिश में तीन लोगों की जान चली गई. घटना बड़ागांव में हुई थी. उस समय प्रधान पद के प्रत्याशी जितेंद्र अपने सहयोगियों सुंदर लाल और लालजी के साथ मौजूद थे. इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी और फिर मारपीट शुरू हो गई. देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और गोलियां चलने लगीं. फायरिंग में जितेंद्र, सुंदर लाल और लालजी की मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक, वारदात के पीछे पंचायत चुनाव की पुरानी रंजिश थी. मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान हरिवंश सिंह उर्फ भूरे समेत 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था. पुलिस ने जांच के दौरान हरिवंश और राजेंद्र को अवैध तमंचे के साथ गिरफ्तार भी किया था. 19 जून 2025 को सीतापुर की अदालत ने सभी 12 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई.
दिन : 6 जून 2017 (सीतापुर)
6 जून 2017 की रात सिविल लाइंस इलाके में हुई वारदात ने पूरे सीतापुर शहर को हिला दिया. गल्ला कारोबारी सुनील जायसवाल, उनकी पत्नी कामिनी और 14 वर्षीय बेटे रितिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई. शुरुआती पुलिस जांच में वारदात को लूट के प्रयास से जोड़कर देखा गया था. पुलिस के मुताबिक, बदमाश लूट के इरादे से पहुंचे थे. इसी दौरान सुनील जायसवाल ने विरोध किया तो बदमाशों ने उन पर गोली चला दी. पति को बचाने के लिए कामिनी और उनका नाबालिग बेटा भी सामने आ गए. हमलावरों ने दोनों को भी गोली मार दी. कुछ ही पलों में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और हमलावरों की तलाश शुरू हुई. वारदात के बाद व्यापारियों में आक्रोश फैल गया और पुलिस से जल्द खुलासे की मांग की गई.
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