कौन होता है पंचायत सचिव? गांव के विकास में क्या होती है इनकी भूमिका, जानें कितना महत्वपूर्ण है ये पद
क्या आपको पता है कि पंचायत सचिव कौन होता है? गांव के विकास में कितनी अहम होती है इनकी भूमिका?

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : November 4, 2025 at 3:14 PM IST
शिमला: जब भी बेस्ट वेब सीरीज की बात हो तो सबके जेहन में पंचायत सीरीज का नाम जरुर आता है. गांव की सादगी भरी जीवन पर बनी पंचायत सीरीज दर्शकों के दिलों में बस चुकी है, लेकिन क्या आपको पता है कि गांवों में पंचायत सचिव कौन होता है और पंचायत सचिव का क्या काम होता? हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार 300 पंचायत सचिवों की भर्ती करने जा रही है. ऐसे में आइए जानते हैं ‘गांव का चीफ सेक्रेटरी’ के बारे में.
कौन होता है पंचायत सचिव?
हिमाचल प्रदेश में 90 फीसदी जनता गांव में बसती है. ग्रामीण क्षेत्रों में जनता से जुड़ा ऐसा कोई भी सरकारी काम नहीं है, जो पंचायत सचिव के बिना पूरा हो. पंचायत सचिव राज्य सरकार के अधीन एक प्रशासनिक पद है, जो ग्राम पंचायत के कामकाज का प्रबंधन करता है. गांव की गली-मोहल्लों से लेकर पंचायत भवन तक हर सरकारी काम की डोर पंचायत सचिव के हाथों में बंधी होती है. कहा जाए तो गांव की सरकार का असली चेहरा पंचायत सचिव का पद है.
पंचायत सचिव का काम?
ग्रामीण क्षेत्रों में विकास से लेकर लोगों के जन्म-मृत्यु तक के हर सरकारी काम में पंचायत सचिव की भूमिका अहम होती है. यानी गांव में अगर कोई बच्चा जन्म लेता है तो उसका पहला सरकारी रिकॉर्ड पंचायत सचिव के जरिए बनता है. वहीं, जब कोई गुजर जाता है तो उसकी मृत्यु प्रमाणित करने वाला भी वही होता है. जन्म से लेकर मृत्यु प्रमाणपत्र तक, पेंशन फाइल, राशन कार्ड से लेकर मनरेगा भुगतान तक हर दस्तावेज में पंचायत सचिव की कलम चलती है.
300 पंचायत सचिवों की भर्ती
वहीं, हर योजना के कागज पर पंचायत सचिव की मुहर जरूरी है. बिना उसके हस्ताक्षर के कोई काम पूरा नहीं होता. पंचायत सचिव जनता और प्रशासन के बीच सेतु का काम करता है. इसीलिए ग्रामीण इलाकों में पंचायत सचिव को ‘गांव का चीफ सेक्रेटरी’ भी कहा जाता है. वहीं, अब ग्रामीण क्षेत्रों में A टू Z कार्य को समय पर पूरा करने के लिए सरकार पंचायत सचिवों के 300 भरने जा रहे है. जिसके लिए फाइलों के स्तर पर प्रक्रिया शुरू हो गई है. ऐसे में यहां हम पंचायत सचिव की शक्तियों और उससे जुड़े कार्यों की जानकारी दे रहे हैं.
पंचायत सचिवों के कामों को मुख्यत: चार वर्गों में बांटा जाता सकता है. जिसमें प्रशासनिक कार्य, वित्तीय कार्य, विकास एवं कल्याण कार्य और जनसेवा व समन्वय कार्य शामिल है. आइए पंचायत सचिवों के द्वारा किए जाने वाले कार्य के बारे में जानें.
प्रशासनिक कार्य
- ग्राम सभा और पंचायत बैठकों का आयोजन करना.
- बैठकों की कार्यवाही (Minutes) लिखना और रिकॉर्ड सुरक्षित रखना.
- ग्राम पंचायत के सभी दस्तावेज, रजिस्टर और अभिलेखों का संधारण करना.
- पंचायत के सभी निर्णयों को लागू करवाने में सहायता करना.
वित्तीय कार्य
- ग्राम पंचायत की आय और व्यय का लेखा-जोखा रखना.
- विकास योजनाओं में खर्च की निगरानी और लेखा परीक्षण (Audit) के लिए तैयारी करना.
- टैक्स, फीस या अन्य पंचायत राजस्व की वसूली में सहयोग देना.
- पंचायत के बजट की तैयारी और उसे पंचायत के समक्ष प्रस्तुत करना.
विकास और कल्याण कार्य
- केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं (मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि) को जमीन पर लागू करवाना.
- गांव में पानी, सड़क, शिक्षा, स्वच्छता व स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित परियोजनाओं का निरीक्षण और रिपोर्टिंग.
- ग्राम विकास रिपोर्ट और योजनाओं की प्रगति की निगरानी करना.
जनसेवा और समन्वय कार्य
- गांव में स्वास्थ्य से संबंधित योजनाएं.
- ग्रामीणों और पंचायत के बीच संपर्क सेतु के रूप में कार्य करना.
- विवाह का पंजीकरण करना.
- जन्म, मृत्यु, जाति, निवास आदि प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया में सहायता देना.
- पशुओं की जनगणना करना.
- पंचायत जनप्रतिनिधियों व सरकारी अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करना.

बीडीओ पद से सेवानिवृत्त हुए अधिकारी राजेंद्र सिंह तेजटा का कहना है, 'पंचायत सचिव ग्राम पंचायत का प्रशासनिक और विकासात्मक आधार का स्तंभ है, जो गांव के विकास और शासन दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. लेकिन इसके बाद भी पंचायत सचिव अकेले अपने कार्यालय में चपरासी से लेकर अधिकारी तक का पूरा काम खुद ही करता है. जनता से जुड़े कार्यों और ऑफिस के इतने सारे कामों को अकेले देखना मुश्किल होता है. वहीं, स्टाफ के नाम पर पंचायत सचिव के पास सिवाय चौकीदार के अलावा कुछ नहीं हैं. पंचायत सचिव के महत्वपूर्ण पद को देखते हुए, उन्हें स्टाफ सहित अन्य सुविधाएं भी दी जानी चाहिए'.
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