सफेद मक्खी का खौफ, कहीं सोयाबीन की तरह मूंग और उड़द भी न कर दे बर्बाद
गर्मी के मौसम में सफेद मक्खी कीट का खतरा, जानें कैसे फसलों को नुकसान पहुंचाती है व्हाइट फ्लाई

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : April 20, 2026 at 10:14 AM IST
शहडोल : गर्मी के मौसम में मूंग, उड़द की खेती करते हैं तो उन्हें थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है. इस बार सोयाबीन की फसल को जिस खतरनाक मक्खी ने बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, वह मूंग, उड़द समेत कई फसलों पर अटैकर कर सकती है. ऐसे में मध्य प्रदेश के किसानों को सफेद मक्खी नामक इस कीट से बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है.
सोयाबीन के बाद मूंग उड़द पर खतरा
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति बताते हैं, '' शहडोल जिले में मूंग उड़द का जो रकबा है, खरीफ और ग्रीष्मकालीन को मिलाकर के लगभग 10 से 11 हज़ार हेक्टेयर में हमारे यहां मूंग उड़द की खेती होती है. इसमें मुख्य रूप जो लगने वाला कीट है, जो पिछले साल हमारे सोयाबीन की फसल को नुकसान कर चुका है, वह है सफेद मक्खी, जिसे व्हाइट फ्लाई भी बोलते हैं.''
कैसे नुकसान पहुंचाती है व्हाइट फ्लाई?
कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, '' सफेद मक्खी जिसे व्हाइट फ्लाई भी बोलते हैं, इसका मुख्य काम है वायरस को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने का. इसके कारण जो मूंग-उड़द की फसल जो होती है, सोयाबीन की जो फसल होती है, उसमें आप देखेंगे कि यलो मोजेक वायरस नाम की बीमारी आती है.''

सफेद मक्खी फैलाती है यलो मोजेक, जानें इसके लक्षण
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं, '' यलो मोजेक के लक्षण की बात करें तो फसल की पत्तियों पर आप देखेंगे तो शुरुआती अवस्था में जो पत्तियां हरी होती हैं, उसमें पीले रंग के छोटे-छोटे धब्बे व स्पॉट देखने को मिलेंगे. इसकी अधिकता होने पर इन पत्तियों में सुनहरे गोल्डन कलर का पीले रंग में बदल जाता है. अगर सही समय पर इसका नियंत्रण नहीं करते हैं तो आप देखेंगे कि जिस तरह से हमारे जिले में लगभग 80 से 100% तक सोयाबीन की फसल पिछले सीजन में इस वायरस की वजह से नुकसान हुआ था, कुछ किस्म के सोयाबीन की फसल बहुत ज्यादा प्रभावित हुई थी, ठीक उसी तरह मूंग उड़द की फसल भी प्रभावित हो सकती है. इसलिए इस सफेद मक्खी पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.

सफेद मक्खी पर कैसे करें नियंत्रण
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति कहते हैं, '' इसके नियंत्रण के लिए सलाह दी जाती है कि जब भी आप इस प्रकार के पौधे दिखाई देते हैं, जिसमें यलो मोजेक के लक्षण दिखें, तो उस पौधे को जड़ से उखाड़ दीजिए, क्योंकि आप देखेंगे की पत्तियां तो छोटी हो जाएंगी, पीले रंग की हो जाएंगी और इसमें अगर फूल भी बनते तो फूल भी झड़ जाएंगे, जो फलियां बनती हैं वह फलिया भी छोटी होंगी. उसमें दाने नहीं भरेंगे, तो निश्चित रूप से किसानों को पूर्ण रूप से नुकसान हो जाता है .ऐसे पौधों को निश्चित रूप से जड़ से उखाड़ करके गड्ढा बनाकर के उसे जमीन के अंदर गड़ा देना होता है.''

वे आगे कहते हैं, '' दूसरा तरीका ये होता है की खेत के चारों तरफ जो खरपतवार हैं जो मक्खी के जीवन चक्र को आसान कर देते हैं, उन्हें अपने खेत के मेढ़ से फसल के आसपास से साफ सुथरा करके रखें, जिससे सफेद मक्खी का जीवन चक्र आगे नहीं बढ़ सकेगा. तीसरे तरीके की बात करें तो सफेद मक्खी के तीसरे कारण की बात करें तो जैविक कीटनाशक में जैसे नीम तेल की मात्रा जो होती है, उसे हम 5 एमएल पर लीटर की दर से लेकर छिड़काव करना है.''
स्टिकी ट्रैप का भी कर सकते हैं इस्तेमाल
कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक इसके अलावा एक पीला स्टिकी ट्रैप आता है, इसको कम से कम 10 से 15 प्रति एकड़ में फसल की ऊंचाई पर डंडे में लटकाना होता है, ये चिपचिपा होता है, जिससे सफेद मक्खी जो होती है, वो पीले रंग देखकर आकर्षित होती है और उसी में चिपक जाती है. इससे इनकी संख्या कुछ हद तक कम हो जाती है.
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इसके अलावा रासायनिक कीटनाशक के अंतर्गत खेती करते हैं शुरुआती अवस्था में अगर आपको पौधे में लक्षण दिखाई देते हैं तो एमिडाक्लोपिड 17.8% की जो दवा आती है, रासायनिक कीटनाशक, उसकी उसकी मात्रा 15 लीटर के टंकी में पानी लें और 6 से 7 एम एल मात्रा दवा का लेकर के आप इसका छिड़काव कर सकते हैं.

