लखनऊ में जब-जब हुए बड़े हादसे, तब-तब एलडीए के एक्शन पर उठे सवाल
लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण एक्शन में आया है. लेकिन सवाल है कि समय रहते एलडीए ने काम क्यों नहीं किया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : June 24, 2026 at 10:58 AM IST
|Updated : June 24, 2026 at 11:13 AM IST
लखनऊ: अलीगंज सेक्टर डी में मकान नंबर m102 में हुए अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण के आला अधिकारियों को अब होश आया है. किसी प्लाट पर जब पहली बार ईंट रखी जाती है, तो लखनऊ विकास प्राधिकरण का सुपरवाइजर मौके पर पहुंच कर नक्शा नजरी की जांच शुरू कर देता है. मगर इस इलाके से लेकर पूरे लखनऊ में बड़े-बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, कोचिंग सेंटर, स्कूल कॉलेज लाइब्रेरी जहां बड़ी संख्या में बच्चे और युवा जाते हैं. उनकी सुरक्षा का ख्याल लखनऊ विकास प्राधिकरण के अफसर को शायद ही आता हो. जिसका नतीजा यह हुआ है कि अलीगंज सेक्टर डी में 15 माता-पिता के आंखों के तारे अब शांत हो चुके हैं.
लखनऊ विकास प्राधिकरण अब कह रहा है कि एम-102 और उसके आसपास के सभी मकान मालिकों को नोटिस दिया जा रहा है. सभी मकान मालिकों को तलब किया जा रहा है. सवाल यह उठता है कि इसी तरह की कार्रवाई लखनऊ विकास प्राधिकरण ने 2 साल पहले बारिश के दौरान दिल्ली की कोचिंग के बेसमेंट में विद्यार्थियों की डूबकर हुई मौत के बाद भी की थी.
दो साल पहले गुजरात में गेमिंग जोन में आग लगने के बाद जब युवाओं की मौत हुई थी, तब लखनऊ के अधिकतर गेमिंग जोन जो अवैध बने हुए थे, उनको सील कर दिया गया था. उन सारे गेमिंग जोन का संचालन दोबारा किया जा रहा है.
इसी तरह से होटल लेवाना में आग लगने से 4 लोगों की मौत होने के बाद लखनऊ के अनेक अवैध लोगों को नोटिस दिया गया था, मगर वहां भी सारे होटल संचालित हैं. जब-जब घटना हुई केवल कागज पर कार्रवाई करके लखनऊ विकास प्राधिकरण ने खानापूर्ति की. अधिकारियों पर कार्रवाई के नाम पर फाइल चलती रही. नतीजा शून्य ही रहा.
लखनऊ विकास प्राधिकरण के विशेष कार्य अधिकारी देवांश त्रिवेदी ने बताया कि हमने इन सभी कमर्शियल निर्माण को नोटिस दे दिया है. एम 102 से लेकर पुरनिया तक जाने वाली रोड पर कोई निर्माण नहीं छोड़ा. सभी के मालिकों को लखनऊ विकास प्राधिकरण में तलब करके उनसे जवाब मांगा गया है और आने वाले समय में कड़ी कार्रवाई की जाएगी. सवाल यह उठता है कि यह कड़ी कार्रवाई अब तक क्यों नहीं की गई.
लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे स्पष्ट सवाल उठाते हैं, एलडीए केवल और केवल दिखावे की कार्रवाई करता है. अवैध निर्माण की वजह से किसी हादसे में बच्चे मरे या बड़े किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने लखनऊ विकास प्राधिकरण पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं.
अवैध निर्माण पर हुई थी कार्रवाई, शपथ पत्र देने के बाद बच गई थी बिल्डिंग
राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद यह तथ्य निकल के सामने आया है कि जिस बिल्डिंग में एनीमेशन सेंटर चलाया जा रहा था, वह अवैध है. यहां पर कमर्शियल एक्टिविटीज की जा रही थी, जबकि यह बिल्डिंग आवासीय है. इसका आवासी नक्शा भी पास था. अब इस बिल्डिंग को लेकर एलडीए ने कार्यवाही करने का मन बना लिया है.

एलडीएवीसी प्रथमेश कुमार के पीआरओ राहुल ने ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए बताया कि इस बिल्डिंग को नोटिस जारी की गई थी. घ्वस्तीकरण के आदेश दिए गए थे, जिसके बाद बिल्डिंग के मालिक की ओर से विहित प्राधिकारी को यह लिखित एप्लीकेशन दी गई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि वह इस भवन में कमर्शियल एक्टिविटीज नहीं करेंगे इसका निर्माण आवासीय पास नक्शे के तहत ही किया जाएगा. इसके बाद ध्वस्तीकरण का आदेश निरस्त हो गया था. बिल्डिंग के स्वामी द्वारा विहत प्राधिकरण को दिए गए शपथपत्र की शर्तों की अनदेखी की गई, लिहाजा जल्द ही बिल्डिंग के संदर्भ में नोटिस जारी की जाएगी.

