हिमाचल में कब होगी मानसून की एंट्री ? इस बार कितनी होगी बरसात
इन दिनों मैदान से लेकर पहाड़ तक तप रहे हैं. गर्मी के सितम के बीच हर कोई मानसून का इंतजार कर रहा है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : May 26, 2026 at 5:44 PM IST
|Updated : May 27, 2026 at 1:33 PM IST
शिमला: देशभर में इन दिनों गर्मी कहर ढा रही है. इस बार टेंपरेचर का टॉर्चर हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य भी झेल रहे हैं. हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों का तापमान मई महीने में 40 डिग्री तक पहुंच चुका है. ऐसे में हर किसी को मानसून का इंतजार है लेकिन अभी तक मानसून ने दस्तक नहीं दी है. गर्मी से राहत पाने के लिए हिमाचल के लोग और पर्यटक भी इंतजार कर रहे हैं कि मानसून कब आएगा.
हिमाचल में मानसून कब आएगा ?
हिमाचल प्रदेश में भी इन दिनों हीट वेव का असर देखने को मिल रहा है. चिलचिलाती गर्मी से लोग परेशान है. हालांकि मई महीने में ही हिमाचल में सर्दी और फिर प्रचंड गर्मी का अहसास हुआ है. ऐसे में गर्मी से राहत पाने के लिए हर किसी को मानसून का इंतजार है. मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में मानसून की एंट्री 25 जून तक हो सकती है. वहीं, बीते साल प्रदेश में मानसून की एंट्री 20 जून को हुई थी.
'मानसून अभी अंडमान ही पहुंचा है. 1 जून तक केरल पहुंचने की उम्मीद है. उसके बाद मानसून देशभर में फैलेगा. हिमाचल में इस बार 25 जून के आसपास मानसून आने की संभावना है. हालांकि, बीते साल 20 जून को हिमाचल में मानसून की एंट्री हुईं थी और 24 जून तक पूरे प्रदेश में बारिश हो गई थी'.- शोभित कटियार, मौसम विभाग के निदेशक
इस बार कैसा रहेगा मानसून ?
मानसून पर आम लोगों से लेकर किसान बागवान तक उम्मीद लगाए बैठते हैं. मौसम विभाग की ओर से इस साल कम बारिश का अनुमान लगाया गया है. शोभित कटियार ने बताया कि बीते साल 2025 में 45 फीसदी अधिक बारिश हुईं थी. 1 मार्च से 31 मई तक बारिश को प्री मानसून बारिश कहते है. 1 जून के बाद भारत में मानसून आ जाता हैं. उसके बाद मानसून की बारिश कही जाती है.
दक्षिण-पश्चिमी मानसून क्या है?
मौसम वैज्ञानिक शोभित कटियार ने बताया, 'दक्षिण-पश्चिमी मानसून एक मौसमी हवा का पैटर्न है. जो भारतीय उपमहाद्वीप में बारिश लाता है. आमतौर पर मानसून जून से सितंबर महीने तक रहता है. ये हवा दक्षिण-पश्चिम दिशा से यानी हिंद महासागर और अरब सागर से आती है. जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा होती है, क्योंकि मानसून दक्षिण-पश्चिम से आता है. इसलिए इसे दक्षिण-पश्चिमी मानसून कहते हैं. ये मानसून मई महीने के अंत में प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिम छोर पर आना शुरू होता है और जुलाई के अंत तक पूरे भारत को कवर कर लेता है'.
मानसूनी हवाएं कैसे आगे बढ़ती है?
शोभित कटियार ने बताते हैं कि मानसून की हवाएं भारत के भूभाग और आसपास के महासागरों के बीच तापमान के अंतर के कारण आगे बढ़ती हैं. भारतीय भूभाग गर्म होता है, जिससे हवा ऊपर उठती है और भूमि पर कम दबाव का क्षेत्र बनता है. ये कम दबाव महासागरों से नम हवा को खींचता है, जो कि भारत की ओर बहती है. इसके कारण ही बारिश होती है. मानसून सबसे पहले केरल में प्रवेश करता है और उसके बाद पूरे भारत में फैलता है.
मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि मानसून कभी जल्दी तो कई बार देरी से आता है, इसका कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्र के तापमान में बदलाव है. जो मानसून के आगमन और प्रगति को प्रभावित कर सकता है. पश्चिमी विक्षोभ की लगातार उपस्थिति से भी मानसून की गति धीमी हो सकती है और मानसून आने में देरी हो सकती है.
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