14 या 15 फरवरी कब है शिवरात्रि, पूजा विधि से लेकर और शुभ मुहूर्त तक यहां जानें सब कुछ
महाशिवरात्रि के दिन भद्रा योग भी बन रहा है. पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी की शाम 5 बजकर 04 मिनट से भद्रा की शुरुआत होगी

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 11, 2026 at 7:20 PM IST
कुल्लू: भगवान शिव सनातन धर्म में पूजनीय देवता है और भगवान शिव को औघड़ दानी भी कहा गया है. भक्ति भाव से की गई पूजा अर्चना से भगवान शिव तुरंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनचाहा वरदान भी देते हैं. ऐसे में भगवान शिव को समर्पित शिवरात्रि का त्यौहार भी शिव भक्तों के लिए काफी महत्व रखता है.
शिव मंदिरों में भी महाशिवरात्रि के आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. शिव भक्त इस बात को लेकर संशय में हैं कि ये त्यौहार कब मनाया जाएगा. इस बार शिवरात्रि पर 14 या 15 फरवरी को लेकर कन्फ्यूजन है. ईटीवी भारत ने आचार्य आशीष शर्मा से बातचीत कर ये जानने का प्रयास किया कि शिवरात्रि का त्योहार कब मनाया जाएगा.
कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर मनाई जाती है शिवरात्रि
आचार्य आशीष शर्मा ने बताया कि 'फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है और देशभर में भगवान शिव के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है. इस बार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी रविवार को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी. इस तिथि का समापन 16 फरवरी सोमवार को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा. ऐसे में चतुर्दशी तिथि रात्रि में पड़ने के कारण 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाएगा.'
भद्रा का भी बन रहा योग
इस साल महाशिवरात्रि के दिन भद्रा योग भी बन रहा है. कालीबाड़ी मंदिर के वरिष्ठ पुजारी मुक्ति चक्रवर्ती ने बताया कि पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी की शाम 5 बजकर 04 मिनट से भद्रा की शुरुआत होगी, जो 16 फरवरी की सुबह 5 बजकर 23 मिनट तक रहेगी. यानी करीब 12 घंटे से अधिक समय तक भद्रा का प्रभाव रहेगा. हालांकि इस बार भद्रा का वास पाताल लोक में है. शास्त्रों के अनुसार, जब भद्रा पाताल में स्थित होती है, तो उसका नकारात्मक प्रभाव पृथ्वी पर नहीं पड़ता. ऐसे में महाशिवरात्रि पर शिव पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक बिना किसी बाधा के किए जा सकते हैं.
कब है पूजा का शुभ मुहूर्त
आचार्य आशीष कुमार शर्मा ने बताया कि 'शिवरात्रि में रात्रि पूजन का विशेष महत्व शास्त्रों में लिखा गया है. 15 फरवरी शाम 6:11 बजे से रात 9:22 बजे तक प्रथम पहर की पूजा आयोजित की जाएगी. वहीं, द्वितीय प्रहर की पूजा रात 9:23 बजे से देर रात 12:34 बजे तक आयोजित होगी. तीसरे प्रहर की पूजा 16 फरवरी रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक होगी और उसके बाद चौथे प्रहर पूजा की 16 फरवरी सुबह 3:46 बजे से सुबह 6:59 बजे तक की जाएगी. ऐसे में भक्त अपनी श्रद्धा भक्ति भाव के अनुसार भगवान शिव की चार पहर पूजा कर सकते हैं.'
कैसे करें पूजन
आचार्य आशीष कुमार ने बताया कि शिवमहापुराण में य बात लिखी गई है कि भगवान शिव की पूजा बिना बिल्व पत्र के नहीं होती है. ऐसे में शिवरात्रि पूजा में भक्त बिल्वपत्र का विशेष ध्यान रखें. बिल्वपत्र समर्पित होने से ही शिव को पूजा सफल होती है. उसके साथ साथ महाशिवरात्रि पर सुगंधित व्यंजन और उत्तम वस्तुओं सहित विविध वस्तुएं भगवान शिव को अर्पित करें. इसके बाद गुग्गल आदि से धूप दीप प्रज्वलित करें. भक्त अपनी इच्छा से भगवान शिव को कमल, शंखपुष्प, कुशपुष्प, धतूरा, मन्दार, द्रोणपुष्प, तुलसीदल और बिल्वपत्र से भगवान शंकर का पूजन अर्चन करें.
आचार्य आशीष कुमार शर्मा ने बताया कि शिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा में सफेद चंदन और भस्म को अर्पित करने का बहुत महत्व माना गया है. ऐसे में शिव भक्त को शिवलिंग पर सफेद चंदन या भस्म से त्रिपुंड बनाना चाहिए और बाद में प्रसाद स्वरूप अपने माथे पर भी तिलक के रूप में धारण करना चाहिए. इसके अलावा हिंदू धर्म में रुद्राक्ष को भगवान शिव का महाप्रसाद माना गया है. मान्यता है कि पूजा में इसे चढ़ाने पर महादेव शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और मनचाहा आशीर्वाद देते हैं. महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से भगवान शिव को रुद्राक्ष अर्पित करना चाहिए और उसे उनका प्रसाद मानते हुए लाल या सफेद रंग के धागे में गले या बाजू में धारण करना चाहिए.
ऐसे दूर करें राहु-केतू का दोष
महाशिवरात्रि पर यदि आप किसी शिवालय पर न जा सकें, तो अपने घर में पारद या फिर मिट्टी से बने पार्थिव शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा और अभिषेकर करें. इसके अलावा कुंडली में राहु और केतु से जुड़ा दोष होने पर महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा में जल में कुश और दूर्वा डालकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए. इस जल चढ़ाने के बाद भगवान शिव को 21 सफेद पुष्प अर्पित करें. वहीं, भक्त का जीवन अगरआर्थिक रूप से परेशान चल रहा है तो इस महाशिवरात्रि पर स्फटिक से बने शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा और गाय के कच्चे दूध से रुद्राभिषेक करना चाहिए. महाशिवरात्रि पर महादेव की पूजा का ये उपाय भक्त सुख-समृद्धि प्रदान करेगा.
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