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देश में टूटेगा गेहूं उत्पादन का रिकॉर्ड, अबकी 119 मिलियन टन फसल का अनुमान, पराली प्रबंधन में बढ़ी जागरूकता

इस बार देश में गेहूं उत्पादन का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है.

Wheat production in India Record
देश में टूटेगा गेहूं उत्पादन का रिकॉर्ड (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : November 11, 2025 at 5:25 PM IST

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करनाल: इस वर्ष देश में गेहूं उत्पादन अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ने की ओर है. भारत सरकार ने 119 मिलियन टन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे कृषि विशेषज्ञों ने “पूरी तरह हासिल होने योग्य” बताया है. अनुकूल मौसम, बढ़े हुए रकबे और किसानों की मेहनत के बल पर यह अनुमान जताया जा रहा है कि यह लक्ष्य न केवल पूरा होगा, बल्कि भारत के कृषि इतिहास में यह अब तक का सबसे ऊंचा गेहूं उत्पादन साबित होगा.

करनाल के गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. रतन तिवारी (ETV Bharat)

किसानों के परिश्रम और मौसम का मिला साथ: इस बारे में करनाल के गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने बताया कि, "पिछले साल देश में लगभग 32 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुवाई की गई थी, जिससे 117.5 मिलियन टन उत्पादन प्राप्त हुआ था. इस वर्ष बुवाई का रकबा बढ़कर 34 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जिसके चलते विशेषज्ञों का मानना है कि 119 मिलियन टन के लक्ष्य को पार करना लगभग तय है."

पराली प्रबंधन में बढ़ी जागरूकता: आगे डॉ. तिवारी ने कहा कि, "किसानों में पराली प्रबंधन को लेकर इस वर्ष खासा उत्साह और जागरूकता देखने को मिली है. हम सब एक समाज में रहते हैं, अगर पर्यावरण पर कोई असर पड़ता है तो उसका प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर भी होता है. किसान भाई अब इस बात को समझ रहे हैं और पराली प्रबंधन में शानदार सुधार कर रहे हैं."

Wheat production in India Record
गेहूं उत्पादन का रिकॉर्ड (ETV Bharat)

अलग-अलग राज्यों के लिए नई वैरायटीज तैयार: संस्थान ने विभिन्न राज्यों के लिए नई गेहूं की किस्में सुझाई हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे क्षेत्रों के लिए डीबीडब्ल्यू-386 नामक नई प्रजाति को काफी प्रभावी बताया गया है. इसके अलावा पहले से लोकप्रिय वैरायटीज 3086, 2022, 303 और 187 भी उत्कृष्ट पैदावार दे रही हैं. साथ ही कुछ नई प्रजातियों को भी चिन्हित किया गया है, जिनकी आधिकारिक घोषणा केंद्रीय सरकार की स्वीकृति के बाद की जाएगी.

जलवायु परिवर्तन को मात देने वाली प्रजातियां: डॉ. तिवारी ने आगे बताया कि, "संस्थान द्वारा विकसित नई वैरायटीज़ जलवायु परिवर्तन के अनुरूप तैयार की जा रही हैं. हमारी कुछ प्रजातियां अचानक तापमान में 1–2 डिग्री के बदलाव को भी सहन कर सकती हैं. इससे मौसम की मार के बावजूद उत्पादन पर बड़ा असर नहीं पड़ता."

किसानों के लिए समय पर बुवाई का संदेश: निदेशक ने किसानों से अपील की कि 15 नवंबर तक गेहूं की बुवाई जरूर कर लें. यदि किसी कारणवश देरी हो तो 20 नवंबर तक हर हाल में बुवाई पूरी कर लें. यदि फसल देर से लगती है तो पकने में दिक्कतें आती हैं. इसलिए समय पर बुवाई करें. खेत में पानी का भराव न होने दें. साथ ही हर 15 दिन पर जारी एडवाइजरी को ध्यान से पढ़ें.

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