गेहूं और मटर की फसल को चट कर जाती है नीलगाय, किसानों ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
भोजपुर में किसानों के लिए नीलगाय मुसीबत बन गई है, क्योंकि वह खेतों में घुसकर गेहूं और मटर की फसल को चट कर जाती है.

Published : January 7, 2026 at 1:08 PM IST
आरा: बिहार के भोजपुर में नीलगाय का आतंक बढ़ गया है. जिले के बड़हरा प्रखंड क्षेत्र के बधारों में नीलगाय लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रही है. जिस वजह से किसान परेशान हैं. गेहूं और मटर की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है. किसानों ने प्रशासन ने मदद की गुहार लगाई है.
इन गांवों में नीलगाय का आतंक: बड़हरा प्रखंड के बलुआ, नरगदा, सोहरा, नथमलपुर, नेकनाम टोला, पूर्वी गुण्डी, गजियापुर, बखोरापुर, एकवना, बबुरा, विशुनपुर और बभनगांवा समेत कई पंचायतों के गांवों में नीलगाय दिन-रात खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही है. किसानों का कहना है कि हर रोज नीलगाय के कारण फसलों को क्षति हो रही है.

गेहूं और मटर की फसल को नुकसान: नूरपुर निवासी किसान कौशल सिंह ने बताया कि गेहूं और मटर जैसी प्रमुख नकदी फसलें नीलगाय के हमले से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं. नीलगाय खेतों में घुसकर फसल चर जाती हैं और खेत की मेड़ तोड़ देती हैं, जिससे कई बार पूरी फसल बर्बाद हो जाती है. इससे किसानों की मेहनत और पूंजी दोनों पर पानी फिर रहा है.
कभी भी खेतों में घुस जाती है नीलगाय: वहीं नेकनाम टोला के किसान अनिल सिंह ने कहा कि नीलगाय झुंड बनाकर खेतों में घुसती हैं. इससे फसल बर्बाद होने के साथ-साथ मेड़ें टूट जाने के कारण खेतों की रखवाली भी मुश्किल हो गई है. चातर गांव के सुमंत हर्षवर्धन ने बताया कि शुरुआती दिनों में नीलगाय शाम के वक्त आती थे लेकिन अब नीलगाय केवल रात में ही नहीं, बल्कि दिनदहाड़े भी खेतों में पहुंचा रही हैं
"नीलगायों की संख्या लगातार बढ़ रही है. गेहूं और मटर की फसल पर सबसे बड़ी मार पड़ रही है. रात-दिन कभी भी नीलगाय आ जाती है और फसल को क्षतिग्रस्त कर देती है. सरकार द्वारा बनाए गए फसल क्षति कानून और योजनाएं प्रभावी साबित नहीं हो पा रही हैं."- किसान
किसानों ने लगाई मुआवजे की गुहार: किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि फसलों को नीलगाय के हमलों से बचाने के लिए ठोस और स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सके और सरकार की योजनाएं जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो सकें. स्थानीय ग्रामीणों का ये भी कहना है कि सरकार ने नीलगाय सहित जंगली पशुओं से फसल क्षति पर मुआवजा और राहत देने के लिए कानून और योजनाएं तो बनाई हैं, लेकिन ये नियम हमारे यहां प्रभावी नहीं हो पाए हैं.
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