72 घंटे का शीतलहर अलर्ट और ठंड में ठिठुरता पटना, सार्वजनिक जगहों पर अलाव जलाने के दावों की जानें हकीकत
72 घंटे तक बिहार में शीतलहर-अलर्ट के बाद ठंड से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने कैसे उपाय किए उसके लिए देखिए ये ग्राउंड रिपोर्ट-


Published : December 20, 2025 at 8:57 PM IST
पटना : पूरा बिहार ठंड की चपेट में है और कोहरे की चादर में लिपटा हुआ है. पटना में कड़ाके की ठंड ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर अलाव की व्यवस्था न होने से राहगीर, ऑटो-रिक्शा चालक और फुटपाथ पर रहने वाले लोग भीषण शीतलहर में ठिठुरने को मजबूर हैं.
72 घंटे तक शीतलहर का रेड अलर्ट : मौसम विभाग ने राज्य के आधे से अधिक जिलों में अगले 72 घंटे तक शीतलहर का रेड अलर्ट जारी किया हुआ है. हालांकि जिला प्रशासन का दावा है कि चौक चौराहे जो शहर के प्रमुख हैं, वहां ठंड से बचाव के लिए अलाव का प्रबंध किया जा रहा है. लेकिन ग्राउंड पर रियलिटी कुछ अलग ही है.
पश्चिमी विक्षोभ से गिरा तापमान : मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के कई जिलों में न्यूनतम तापमान 8 से 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा रहा है. पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दिन का अधिकतम तापमान भी 14-16 डिग्री के बीच सिमट गया है और रात का तापमान 9-10 डिग्री तक गिर रहा है. मौसम विभाग की मानी तो अगले एक सप्ताह तक ठंड से राहत के आसार नहीं है. ऐसे में इस भीषण सर्दी के बीच प्रशासन की ओर से पर्याप्त बचाव और राहत के इंतजाम न होने से आम जनजीवन संकट में है.
चौक-चौराहों पर ठंड से लड़ते लोग : सामान्यतः शीतलहर की स्थिति में प्रशासन शहर के प्रमुख स्थानों पर शाम 6-7 बजे तक अलाव की व्यवस्था करता है. लेकिन इस बार यह व्यवस्था चरमराई हुई है. पटना के नूतन राजधानी अंचल क्षेत्र, जहां डीएम कार्यालय, जंक्शन, एयरपोर्ट और सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय स्थित हैं, वहां भी अलाव का मुकम्मल प्रबंध नहीं है. ईटीवी भारत की टीम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में रात्रि पड़ताल की और जो हालात देखे, वह प्रशासनिक उदासीनता की कहानी बयान करते हैं.

1-आर ब्लॉक चौराहा
दावों और हकीकत के बीच की खाई : शाम 8 बजे, जब ठंड अपने चरम पर पहुंच रही थी, आर ब्लॉक चौराहे पर कहीं भी अलाव जलता नहीं दिखा. नगर निगम द्वारा इस स्थान पर अलाव की व्यवस्था का दावा किया जा रहा था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक विपरीत थी. स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले साल अलाव जलने से उन्हें काफी राहत मिली थी, लेकिन इस बार वे केवल शॉल में दुबककर ठंड सहने को मजबूर हैं. यहां ऑटो चालक और और फुटपाथ पर रहने वाले ठंड से ठिठुरते नजर आए.
2-इनकम टैक्स चौराहा
व्यस्त मार्ग पर सर्द रात : रात 10 बजे शहर के सबसे व्यस्त इस चौराहे और इसके आसपास भी कोई अलाव की व्यवस्था नहीं थी. रिक्शा चालकों ने अपने वाहनों पर ही चादरें ओढ़कर ठंड से बचने की कोशिश की. यहां मौजूद हम लोगों ने बताया कि पिछले साल यहां नियमित रूप से आग जलती थी, जिसके आसपास बैठकर वे अपने शरीर में थोड़ी गर्मी ले पाते थे. भीषण शीतलहर के इस दौर में ऐसी बुनियादी राहत का अभाव उनकी मजबूरी को और बढ़ा रहा है.

3-जेपी गोलंबर
विलंब से शुरू हुई राहत : रात 11 बजे जेपी गोलंबर स्थित होटल मौर्या के पास रेन बसेरे के बगल में अंततः नगर निगम की गाड़ी लकड़ी उतारते और कर्मचारी अलाव जलाते दिखे. निगम के कर्मचारियों ने बताया कि सभी निर्धारित स्थानों पर लकड़ी पहुंचाने और अलाव तैयार करने में समय लग रहा है. निगम कर्मियों ने बताया की प्रशासन की ओर से प्रति स्थान केवल 25 किलो लकड़ी ही उपलब्ध कराई जा रही है. रैन बसेरे में रहने वाले लोगों ने राहत जताई और कहा कि भोजन के बाद ठंड बहुत लग रही थी और अब आग के सहारे वे अपने शरीर को कुछ देर में गर्म कर सकेंगे.
प्रशासन को त्वरित कार्रवाई की जरूरत : मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में ठंड का प्रकोप और बढ़ सकता है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी लोगों से घर से बाहर न निकलने, गर्म कपड़े पहनने और खाली पेट बाहर न जाने की सलाह दी है. इन सब के बीच पटना जैसे बड़े शहर में, जहां हजारों लोग रोजाना काम के सिलसिले में सड़कों पर रहते हैं. ऐसे में जिला प्रशासन के लिए अलाव की व्यवस्था करना केवल एक राहत उपाय नहीं, बल्कि एक आवश्यक सेवा भी है.
प्रशासन जल्द करे मुकम्मल इंतजाम : वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी इस मामले पर कहते हैं कि ''रात के समय ठिठुरते रिक्शा चालकों और फुटपाथ पर सोने वाले परिवारों की मौजूदगी प्रशासनिक तैयारियों पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है. आने वाले और भी ठंडे दिनों के मद्देनजर, जिला प्रशासन को तत्काल इस ओर ध्यान देने और हर संभव स्थान पर राहत के इंतजाम पूरे करने की आवश्यकता है. तभी शीतलहर की यह लहर मानवीय संकट का रूप नहीं ले पाएगी. हालांकि जिला प्रशासन ने काफी रैन बसेरा का प्रबंध किया है और अलाव का भी प्रबंध किया जा रहा है. लेकिन यह प्रबंध जितनी तेजी से पूरी कर ली जाए, उतना ही लोगों के लिए बेहतर होगा.''
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